Sep 17, 2019

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम क्या है | Equity Linked Savings Scheme (ELSS) in Hindi

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क्या आप टैक्स बचाने के साथ-साथ अपने निवेश में अच्छा रिटर्न भी कमाना चाहते है ? और क्या यह संभव है ?तो चलिए जानतें है यह कैसे संभव है व ELSS क्या है और इसके क्या-क्या फायदे है ?
ELSS in Hindi

Equity Linked Savings Scheme या ELSS क्या है?

ईएलएलएस या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के नाम से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि ईएलएलएस एक टैक्स सेविंग स्कीम है | अर्थात् ईएलएलएस में पैसे लगाकर आप सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपयें तक के निवेश में टैक्स छूट का फायदा उठा सकतें है |

ईएलएलएस एक इक्विटी फण्ड होता है | अगर आप ELSS में पैसा लगाते है तो यह पैसा इनडायरेक्ट रूप से इक्विटी या शेयर में लगाया जाता है अर्थात् आप ईएलएलएस में पैसा लगाकर टैक्स में छुट व ज्यादा रिटर्न कमा सकतें है |

Equity Linked Savings Scheme में लगाया गया पैसा 3 साल के लिए लॉक हो जाता है मतलब ईएलएलएस का लॉक इन पीरियड 3 साल का होता है | ईएलएलएस ही एक ऐसा टैक्स सेविंग स्कीम है जिसका लॉक इन पीरियड अन्य टैक्स सेविंग स्कीम की तुलना में बहुत कम है |

पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड ) का लॉक इन पीरियड 15 साल है, जबकि एफडी (फिक्स्ड डिपाजिट ) का 5 साल लॉक इन पीरियड है | जो ELSS के लॉक इन पीरियड से ज्यादा है | इसके साथ ही ELSS में रिटर्न भी अन्य स्कीमों की तुलना में बेहतर होता है |

यह लॉन्ग टर्म में इन्वेस्ट कर संपत्ति बनाने का बेहतर विकल्प कहा जा सकता है | इसके अतिरिक्त ईएलएलएस के निवेश से मिलने वाला रिटर्न 1 लाख रुपयें से ज्यादा होने पर 10% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लिया जाता है |

क्या ELSS में निवेश करना सही है?

ईएलएलएस या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में रिटर्न व रिस्क अधिक होता है क्योकिं इसमें इन्वेस्ट किया गया पैसा इक्विटी मतलब कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है | अतः केवल टैक्स सेविंग के लिए ही ELSS में इन्वेस्ट न करें|

अगर आप स्टॉक या शेयर के उतार-चढ़ाव के रिस्क को संभाल सकते है तभी आपको ईएलएलएस में पैसे लगाने चाहिये, अन्यथा ELSS आपके लिए सही नही है |
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Sep 16, 2019

एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड (ईटीएफ ) क्या होता है | Exchange Traded Fund (ETF) in Hindi

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ETF का फुल नाम Exchange Traded Fund (एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड) होता है | मगर ETF क्या है ? और ये म्यूच्यूअल फण्ड से अलग क्यों है ? और ETF के क्या-क्या फायदे होते है ?
Exchange Traded Fund (ETF) in Hindi

Exchange Traded Fund या ETF क्या है ?

एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड को अगर अलग-अलग समझते है तो एक्सचेंज का अर्थ स्टॉक एक्सचेंज, ट्रेडेड का अर्थ खरीदने-बेचने वाला, फण्ड मतलब बहुत से इन्वेस्टर्स का पैसा |

इस तरह से ETF या एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड का मतलब स्टॉक एक्सचेंज में हर दिन बाजार के निर्धारित समय में ख़रीदा व बेचा जाने वाला फण्ड है | ETF अलग-अलग सिक्योरिटीज़ ( शेयर, बांड, कमोडिटी, मुद्रा आदि) के आधार पर कई प्रकार के हो सकते है | इनमें से कुछ नीचें दिए गये है |

Exchange Traded Fund के प्रकार

गोल्ड ETF- गोल्ड ETF का प्राइस सोने के प्राइस पर बेस्ड होता है जब गोल्ड का प्राइस ऊपर जाता है तो गोल्ड ETF का प्राइस भी ऊपर जाता है और गोल्ड के दाम नीचें जाता है तो ETF का प्राइस भी नीचें चला जाता है |

करेंसी ETF- यह ETF आपको किसी देश के करेंसी को खरीदें बिना ही करेंसी मार्केट में भाग लेने का मौका देता है |

इंडेक्स फण्ड ETF- यह ETF एक पैसिव म्यूच्यूअल फण्ड की तरह होता है | जब कोई इन्वेस्टर इंडेक्स फण्ड या इंडेक्स फण्ड ETF खरीदता है तो वह इंडेक्स (सेंसेक्स, निफ्टी आदि ) के अंतर्गत आने वाले स्टॉक या शेयर के एक पोर्टफोलियो को खरीदता है |

ETF या Exchange Traded Fund के क्या फायदे है ?

  • इसका एक्सपेंस रेश्यो अन्य फण्ड की तुलना में कम होता है
  • यह मार्केट ओपन होने के बाद आसानी से ख़रीदा व बेचा जा सकता है 
  • यह डाइवर्सिफाइड होता है तो रिस्क भी कम हो जाता है
  • टैक्स लाभ के लिए भी ETF सही होता है
  • इसमें रिटर्न भी शेयर के इंडेक्स की तरह मिलता है

Exchange Traded Fund और Mutual Fund में अंतर

ETF व म्यूच्यूअल फण्ड दोनों में अंतर होता है | ETF के मूल्य में बदलाव रियल टाइम में होता है जबकि म्यूच्यूअल फण्ड NAV के मूल्य में परिवर्तन दिन के अंत में होता है |

ETF को म्यूच्यूअल फण्ड के एनएफओ की तरह ही एसेट मैनेजमेंट कम्पनी पेश करती है उसके बाद ETF शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए लिस्ट किया जाता है |

एक निवेशक ETF को रियल टाइम मूल्य में खरीद-बेच सकता है मतलब ETF का ट्रेडिंग किया जा सकता है जबकि म्यूच्यूअल फण्ड में ट्रेडिंग संभव नही है |

ETF को खरीदनें- बेचने के लिए डीमैट अकाउंट होना जरुरी है पर म्यूच्यूअल फण्ड खरीदनें के लिए डीमैट अकाउंट होना जरुरी नही है |

इसके अतिरिक्त ETF में एक्सपेंस रेश्यो (फण्ड का खर्च ) भी म्यूच्यूअल फण्ड की तुलना में कम होता है |
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इंडेक्स फण्ड क्या है | Index Funds in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का बेहतर विकल्प है | बाजार में म्यूच्यूअल फण्ड के कई विकल्प निवेश करने के लिए उपलब्ध है | इंडेक्स फण्ड भी उन्ही विकल्पों में से एक है | पर इंडेक्स फण्ड के बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है |
Index Funds in Hindi

Index Fund क्या है?

Index Fund एक इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड है | जैसा कि इसके नाम में इंडेक्स है इसका मतलब यह है कि इंडेक्स फण्ड में लगाया गया पैसा शेयर बाजार के इंडेक्स में लगाया जाता है |

Index fund एक पैसिव फण्ड होता है अर्थात इसमें अनुभवी फण्ड मैनेजरों के द्वारा शेयर नही चुना जाता है | बल्कि इंडेक्स के कंपनियों में निवेश किया जाता है |

भारतीय शेयर बाजार में दो मुख्य इंडेक्स सेंसेक्स व निफ्टी के साथ कई इंडेक्स है अतः इंडेक्स फण्ड का पैसा सेंसेक्स के 30 कंपनिया या निफ्टी के 50 कंपनियों में या अन्य सेक्टरों के इंडेक्स में लगाया जाता है |

इसके अतिरिक्त इंडेक्स फण्ड में एक्टिव फण्ड (जिसमे फण्ड मेनेजर की आवश्यकता होती है ) की तुलना में एक्सपेंस रेश्यो ( फण्ड का खर्च ) कम होता है |

भारत जैसे उभरते देशों में इंडेक्स फण्ड में निवेश कम किया जाता है क्योकिं भारत जैसे बाजारों में अच्छे शेयर चुनकर फायदा लिया जा सकता है | इसलिए ज्यादातर सलाहकार एक्टिव फण्ड को ही चुनने की सलाह देते है |

Index fund का सीधा सम्बन्ध स्टॉक मार्केट से होता है इसलिए शेयर बाजार के गिरने पर इंडेक्स फण्ड का रिटर्न कम हो जाता है | इंडेक्स फण्ड से लॉन्ग टर्म में 15% से 16% का एवेरज रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है |

इंडेक्स फण्ड उन इन्वेस्टर के लिए अच्छा होता है जो शेयर में इन्वेस्ट करना चाहते है लेकिन शेयर बाजार को ट्रैक नही कर पाते है | इसलिए वे इंडेक्स फण्ड में लगाकर लॉन्ग टर्म के लिए छोड़ देते है |

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Sep 14, 2019

म्यूच्यूअल फण्ड एनएफओ क्या है | Mutual Fund NFO in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड निवेश की बात की जाती है तो उसमें म्यूच्यूअल फण्ड NFO के बारे में चर्चा जरुर होती है | तो चलिए जानतें है आखिर म्यूच्यूअल फण्ड NFO क्या है और इसे जानना क्यों जरुरी है ?
Mutual Fund NFO in Hindi

Mutual Fund NFO क्या है?

जब भी कोई AMC ( एसेट मैनेजमेंट कंपनी ) कोई नया फण्ड स्कीम लाती है तो उसे NFO कहा जाता है | NFO का फुल फॉर्म New Fund Offer (न्यू फण्ड ऑफर ) है |

जब कोई AMC म्यूच्यूअल फण्ड NFO लाती है तो इसका उद्देश्य निवेशकों से पैसा जुटाना होता है ताकि शेयर्स या सरकारी बांड आदि में लगाया जा सकें |

एसेट मैनेजमेंट कंपनी NFO (न्यू फण्ड ऑफर) एक निश्चत समय के लिए या किसी भी समय निवेश करने के लिए ला सकती है अर्थात् Mutual Fund NFO क्लोज एंडेड या ओपन एंडेड हो सकते है |

कई AMC ( एसेट मैनेजमेंट कंपनी ) ऐसी भी होती है जो न्यू फण्ड ऑफर केवल इसलिए लाती है ताकि उनकें पास सभी प्रकार के फण्ड स्कीम हो सकें | उदाहरण के लिए अगर XYZ एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास लार्ज कैप फण्ड व स्मालकैप फण्ड है तो ऐसे में वो कंपनी अपना मिडकैप फण्ड भी NFO के जरिये ला सकती है |

अक्सर ऐसी कंपनियां (AMC) पब्लिक से ज्यादा से ज्यादा पैसा जुटाने के लिए NFO (न्यू फण्ड ऑफर) का जोरदार और जोरशोर से प्रचार प्रसार करती है ताकि अधिक से अधिक निवेशक उस कम्पनी के NFO में निवेश करें |

क्या Mutual Fund NFO में पैसा लगाना चाहिए?

इसके जवाब में मेरा एक ही सवाल है | Mutual Fund NFO में पैसा क्यों लगाना चाहिए ? क्या आपको NFO में केवल इसलिए इन्वेस्ट कर देना चाहिए क्योकिं आपको म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट 10 रुपयें में मिल रहे है |

 आपको NFO में पैसा बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए क्योकिं मार्केट में इतनें सारे स्कीम या फण्ड पहले से उपलब्ध है | जिनके फण्ड, फण्ड मैनेजर व पोर्टफोलियो के परफॉर्मेंस का ट्रैक रिकार्ड भी उपलब्ध है लेकिन NFO या नये फण्ड में आपको इसकी कोई जानकारी नही होती है |

और यदि आपको अपने पोर्टफोलियो को बेहतर करने के लिए न्यू स्कीम की जरुरत है तब भी आपको NFO को बहुत ही ध्यानपूर्वक चुनाव करना चाहिए |

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Sep 11, 2019

म्यूच्यूअल फण्ड एनएवी क्या है | Mutual Fund NAV in Hindi

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अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है या आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे है तो Mutual fund NAV को जानना बहुत ही आवश्यक है | तो आइये म्यूच्यूअल फण्ड NAV से जुड़ीं सारी बातों को जानतें है |
Mutual Fund NAV in Hindi

Mutual Fund NAV क्या है?

Mutual Fund NAV का मतलब नेट एसेट वैल्यू होता है | इसे आप म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट का प्राइस या दाम भी कह सकते है |

जब आप म्यूच्यूअल फण्ड खरीदते है तो आपको इन्वेस्ट किये गये पैसे के लिए Mutual फण्ड यूनिट दिया है और इसके प्रति यूनिट के दाम को ही NAV कहा जाता है |

Mutual Fund NAV का प्राइस या दाम घटता-बढ़ता रहता है | और इस उतार-चढाव के कारण ही म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टर को फायदा या नुकसान होता है | मतलब mutual fund NAV से आपके इन्वेस्टमेंट में कितना रिटर्न आया है इसका पता लगाया जाता है |

म्यूच्यूअल फण्ड NAV का उतार चढाव शेयर बाजार और डेट मार्केट आदि पर निर्भर करता है | अर्थात इन सिक्योरिटीज़ या साधन के दाम घटने या बढ़ने का सीधा संबध Mutual fund NAV से होता है | यानि कि म्यूच्यूअल फण्ड NAV भी घटता-बढ़ता है |

Mutual Fund NAV कैसे काम करता है ?

मान लीजिये एक फण्ड में NAV का प्राइस 50 रूपये है और आप 5000 रूपयें निवेश करतें है तो आपको 5000/50 =  100 म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट मिलते है |

मान लीजिये एक साल बाद Mutual Fund NAV का प्राइस 60 रूपयें हो जाता है | इसका मतलब NAV में 20%
का ग्रोथ हुआ है | और अगर आप इसे 60 रुपयें के NAV में ही बेच देते है तो आपको 60 X 100 यूनिट = 6000 रुपयें मिलते है |

नोट: जब आप किसी म्यूच्यूअल फण्ड को बेचते है या रिडीम करते है तो आपको एग्जिट लोड के रूप में फीस देना होता है | जो 1% या एक फीसदी होती है |

मतलब जब आप म्यूच्यूअल फण्ड से बाहर निकलते है तो आपको  60 x 100 यूनिट - 1% एग्जिट लोड ( इस उदाहारण में 60 रूपये) = 5940 रूपयें मिलते है |

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