म्यूच्यूअल फण्ड में कितना रिस्क होता है | Are Mutual Funds Risky?

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पैसो को निवेश करने से रिस्क तो होता है, कहीं पर ज्यादा रिस्क तो कही पर कम रिस्क और म्यूच्यूअल फण्ड भी इससे बचा नही है | म्यूच्यूअल फण्ड में भी रिस्क होते है लेकिन कितना रिस्क होता है ये बता पाना आसान नही है | फिर भी चलिए जानते है कि म्यूच्यूअल फण्ड में रिस्क क्या होता है |
Are Mutual Funds Risky?

Are Mutual Funds Risky?

"Mutual funds investments are subject to market risk. Please, read all scheme related documents carefully before investing."

ऐसा ही बोला जाता है न टीवी में आने वाले विज्ञापनों में "म्यूच्यूअल फण्ड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, योजना से जुड़ें सारे दस्तावेज़ सावधानी से पढ़े |"

यहाँ बाजार कोई भी हो सकता है जैसे शेयर बाजार, गोल्ड, रियल एस्टेट, बांड मार्केट आदि | म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक बेहतर विकल्प माना जाता है क्योकिं यह डाईवर्सिफ़िइड होता है |

डाईवर्सिफ़िइड मतलब म्यूच्यूअल फण्ड में लगायें निवेशकों का पैसा अलग-अलग एसेट जैसेः शेयर बाजार(इक्विटी), बांड(डेब्ट) आदि में लगाये जाते है इसलिए इन एसेट के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के कई प्रकार है और इन्ही के आधार पर रिस्क लेवल भी|  जैसे -


  • इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड
  • डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड 
  • हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड का रिस्क ज्यादा होता है क्योकिं इक्विटी फण्ड का पैसा शेयर बाजार में कंपनियों के शेयर खरीदनें में लगाया जाता है | इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के हो सकते है | जैसे: स्मालकैप, लार्ज कैप आदि |

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड में रिस्क कम होता है क्योकिं डेब्ट फण्ड का पैसा कंपनियों के बांड में व सरकारी बांड में भी लगाया जाता है | डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के भी अलग- अलग प्रकार है | जैसे: गिल्ट फण्ड, इनकम फण्ड आदि|

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड का पैसा कंपनियों के शेयर में और सरकारी व कंपनी के बांडों लगाया जाता है इसलिए इसमें रिस्क  मीडियम होता है | इनके भी कई प्रकार होते है | जैसेः बैलेंस्ड फण्ड, डायनामिक फण्ड

क्या मार्केट रिस्क के अलावा और भी कोई जोखिम है ?

हां, और म्यूच्यूअल फण्ड के रिस्क को कुछ फैक्टर से पता किया जा सकता है और इनमें निवेश करने के लिए उन रिस्क को भी कम किया जा सकता है |

फण्ड मैनेजर की क्षमता व मैनेजमेंट

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के बाद एक रिस्क फण्ड मैनेजर की क्षमता है मतलब अगर आपनें पैसें इन्वेस्ट कियें और फण्ड मैनेजर ने अच्छा परफोर्म नही किया तो आपको रिटर्न भी अच्छे नही मिलेंगे |

मार्केट रिस्क तो सभी के लिए एक सामान होता है लेकिन फण्ड मैनेजर व उसकी टीम की क्षमता का रिस्क हर एक फण्ड में अलग- अलग हो सकता है |

एक अच्छा फण्ड मैनेजर मार्केट रिस्क से भी बचा सकता है इसलिए म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के रिस्क को कम करने के लिए एक अच्छे फण्ड मैनेजर को चुनना बहुत अवश्यक है |

एक अच्छा फण्ड मैनेजर चुनने के लिए फण्ड मैनेजर ट्रैक रिकार्ड चेक करें, कितने फण्ड मैनेज कर रहा है ? कितने रिटर्न ला रहा है ?


Annual Report कैसे पढ़ें | How to Read An Annual Report

क्या आप जानते है ? Annual रिपोर्ट कैसे पढ़ते है ?..आज के इस विडियो में मैं बताऊंगा कि Annul Report में  क्या क्या देखना चाहिए और किन चीजों पर हमें फोकस करना चाहिए और क्या पढना चाहिए?


How to Read An Annual Report


Annual Report क्या है ?

Annual Report कंपनी के द्वारा हर साल Shareholders और इंटरेस्टेड पार्टीज के लिए 
फाइनेंसियल इयर के एंड में पब्लिश किया जाता है| Annual Report में कंपनी साल
 भर यानि कि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के business का लेखा जोखा हिसाब किताब देती है|

किसी कंपनी का एक्यूरेट, trusted और रिलाएबल फाइनेंसियल डाटा लेने का सबसे अच्छा माध्यम एनुअल रिपोर्ट होता है |

अगर आप एनुअल रिपोर्ट पढना चाहते है तो आपको एनुअल रिपोर्ट कंपनि के वेबसाइट या NSE, BSE के वेबसाइट से सॉफ्ट कॉपी के रूप में मिल जाता है उसे आप डाउनलोड करके पढ़ सकते है |

How to Read An Annual Report

किसी भी एनुअल रिपोर्ट को पढ़ते समय नीचें दिए गये बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखे | एनुअल रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सेक्शन होते है और उन सेक्शन से आपको काम की सारी जानकारी लेनी होती है |

मार्केटिंग कंटेंट

जब भी आप किसी Annual Report को डाउनलोड करते है तो ये आवश्यक देखे कि कंपनी ने ज्यादा कलरफुल Annual Report तो नही बनाया मतलब क्या मार्केटिंग मटेरियल की तरह पेश किया है, मात्र इमेजेज तो नही रखे है |

अगर ऐसा है तो वो कंपनी आपका ध्यान भटकना चाहती है ताकि आपसे वह फैक्ट्स को छुपा सके तो ऐसे कंपनियों से सावधान रहना आपकी जिम्मेदारी है |

फाइनेंसियल हाइलाइट्स

इस सेक्शन में कंपनी पिछले कई वर्षों के डाटा को हाईलाइट करता है...जिसमे ग्राफ, टेबल आदि का use करती है...इस सेक्शन में कंपनी के कई सालो के ऑपरेशन व् business performance को compare करती है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट एंड Management Discussion and analysis

ये एनुअल रिपोर्ट के दो इम्पोर्टेन्ट सेक्शन है...इस सेक्शन से आपको मैनेजमेंट के business और इंडस्ट्री का क्या पर्सपेक्टिव है | यहाँ पर लिखे एक एक वर्ड को ध्यान से पढना इन्वेस्टर्स के लिए बहुत ही आवस्यक है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट से आपको पता चलता है कि जो व्यक्ति टॉप में बैठा है उसका business के प्रति क्या विचार है, क्या मैनेजमेंट ट्रांसपेरेंट है या नही..कुछ गलत या सही आपसे hide तो नही रही है...कही मैनेजमेंट हवा में तो बात नही कर रही है...ये सब को आपको ध्यान देना है…

Management डिस्कशन एंड एनालिसिस पुरे Annual Report का मोस्ट इम्पोर्टेन्ट सेक्शन है...क्योकि यहाँ कंपनी इकॉनमी के मैक्रो ट्रेंड, कंट्री में इकनोमिक एक्टिविटी, ग्लोबल इकनोमिक और business sentiment के बारे में बात करती है |

कंपनी यहाँ पर इंडस्ट्री व् business के फ्यूचर में क्या एक्स्पेक्ट करती है उसे भी discuss करती है |

शेयर होल्डिंग पैटर्न

कंपनी का कितना शेयर किसके पास है...promoters ग्रुप ने अपनी shareholoding कम कि है या ज्यादा, घरेलू व विदेशी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी या institution ने कितने percent hoding रखी है|

पब्लिक के पास कितना शेयर है इन सब के लिए शेयर होल्डिंग पैटर्न चेक करे….Ctrl + F और टाइप करे shareholiding pattern |

फाइनेंसियल स्टेटमेंट

इस सेक्शन में कंपनी के पुरे साल भर किये गये काम का हिसाब किताब रहता है -
  • Balance sheet statement
  • Profit loss statement
  • Cash flow statement
इन सब स्टेटमेंट को बहुत ही सावधानी से पढना होता है | इसके साथ स्टेटमेंट के notes को भी आवश्यक रूप से पढ़े ताकि सभी स्टेटमेंट को अच्छे से डिटेल में समझा जा सके |

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स्टॉक मार्केट में buy व sell आर्डर की बात करते है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले स्टॉक ब्रोकर का नाम आता है क्योंकि स्टॉक ब्रोकर के पास ही हम ट्रेडिंग व डीमैट अकाउंट ओपन कराते है |

अब यहाँ सवाल ये आता है कि Best Stock Broker  कौन सा है जिसे चुनना चाहिए इसके लिए आपको कुछ बातों को ध्यान रखना आवश्यक है -
  • आप एक नये निवेशक है तो आपको किस प्रकार की सुविधा ( फुल सर्विस या डिस्काउंट सर्विस) चाहिए | 
  •  क्या आप खुद से रिसर्च करना चाहते है |
  • आप कम से कम सर्विस चार्ज ( 0 ब्रोकरेज ) देना चाहते है |
  • जो स्टॉक ब्रोकर आप चुनने वाले है उसका कस्टमर रिलेशनशिप कैसा है |
  • स्टॉक ब्रोकर ने कोई फ्रॉड या स्कैम या पैसा लेकर भागी नही है मतलब शेयर ब्रोकर की हिस्ट्री कैसी है |
  • फण्ड ट्रान्सफर करने के फैसिलिटी कैसी है |
  • ट्रेडिंग प्लेटफार्म (मोबाइल एप्प व वेबसाइट) कैसा है |

इन सब बातों को गौर करे तो एक Best Stock Broker को आसानी से सेलेक्ट कर सकते है तो चलिए ऐसे ही एक डिस्काउंट सर्विस ब्रोकर के बारे में जानते है |

5Paisa India's Discount Broker

5Paisa भारत का सबसे फ़ास्ट बढ़ने वाला डिस्काउंट ब्रोकर है | इसमें डीमैट अकाउंट खोलना बहुत ही आसान और पेपरलेस है | आप घर बैठे 10 मिनट में अपना डीमैट अकाउंट 5Paisa के साथ खोल सकते है |

5Paisa में जब आप शेयर्स को खरीद कर लॉन्ग टर्म ( लम्बे समय ) के लिए रखते है तो आपको कोई ब्रोकरेज चार्ज ( 0 ब्रोकरेज ) भी नहीं देना पड़ता है | जबकि ट्रेडिंग (रोज खरीद-बेच ) करने वालो को हर ट्रेड में 10 रूपये देने पढ़ते है |

5Paisa के डीमैट अकाउंट से आप स्टॉक्स, म्यूच्यूअल फण्ड, बीमा पालिसी आदि भी ले सकते है | और अगर इसके मोबाइल एप्प की बात करें तो वो भी काफी फ़ास्ट चलती है |

प्लस एक अच्छी बात की आप 5Paisa का डीमैट अकाउंट नीचें क्लीक करके फ्री में खोल सकते है |


Demat Account कैसे  खोले ?


अगर आप डीमैट अकाउंट खोलना चाहते है तो कुछ Documents की आवश्यकता होंगी -
  • पैन कार्ड 
  • एक फ़ोटो
वही आपको एड्रेस प्रूफ के लिए इनमे से कोई एक डाक्यूमेंट्स देने की आवश्यकता होंगी:
  • आधार कार्ड 
  • वोटर कार्ड
  • राशन कार्ड 
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • इलेक्ट्रीसिटी बिल 
  • पासपोर्ट 
व इनकम प्रूफ के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स
  • कैंसल चेक ( Cheque )
  • या बैंक स्टेटमेंट
बस फिर आपका डीमैट अकाउंट शेयर खरीद कर रखने के लिए तैयार है |




मल्टी कैप फण्ड क्या है | क्या आपको निवेश करना चाहिए | Multi Cap Funds in Hindi

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क्या मल्टी कैप फण्ड , लार्ज कैप फण्ड से बेहतर वेल्थ बनाने वाले फण्ड होते है ? क्या आपको multi cap funds में इन्वेस्ट करना चाहिए ? मल्टी कैप फण्ड में आपको कितने समय के लिए इन्वेस्ट करना चाहिए ?

Multi Cap Funds in Hindi

Multi-Cap Funds क्या है?

Multi Cap Funds एक डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूच्यूअल होता है मतलब Multi Cap Funds का पैसा मार्केट कैप के आधार पर लार्ज कैप, मिडकैप व स्मालकैप कंपनियों में लगाया जाता है |  

मल्टी कैप फण्ड का पोर्टफोलियों बहुत ज्यादा डायवर्सिफाइड होता है क्योकि यह अलग-अलग सेक्टर के लार्ज, मीडियम व स्माल कैप स्टॉक्स से मिलकर बनती है | इसमें SEBI ( Securities and Exchange Board of India) के नियम के तहत 65% पैसा इक्विटी व इक्विटी से रिलेटेड अन्य इंस्ट्रूमेंट में लगाना अनिवार्य है |

Multi Cap Funds एक इक्विटी फण्ड है और इन स्कीम्स में डायनामिक इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी को अपनाया जाता है इसलिए निवेशकों को किसी भी इक्विटी से जुड़े स्कीम्स में निवेश करने का लक्ष्य 5-10 वर्ष का रखना चाहिए |

Multi Cap Funds के फायदे

Multi Cap Funds, फण्ड मैनेजर को अपने होल्डिंग्स को लार्ग कैप, मिड कैप व स्माल कैप कंपनियों में शेयर बाजार के आउटलुक के आधार पर बदलने का लचीलापन देती है  अर्थात जब मिडकैप व स्मालकैप कंपनियों का वैल्यूएशन महंगा होने लगता है तब फण्ड मैनेजर लार्ज कैप स्टॉक्स में जा सकते है |

इसके विपरीत जब लार्ज कैप स्टॉक्स का वैल्यूएशन महंगा होने लगता है तो फण्ड मैनेजर मिडकैप व स्मालकैप स्टॉक्स में निवेश कर सकते है |

इस तरह से प्योर स्मालकैप व मिडकैप फण्ड की तुलना में Multi Cap Funds लम्बे समय में कम रिस्क वाला हो जाता है और निवेशकों को प्योर लार्ज कैप फण्ड से बेहतर रिटर्न देता है |

Multi Cap Funds ऐसे निवेशकों के लिए बेहतर है जो मीडियम रिस्क या बैलेंस्ड रिस्क लेने के साथ बाजार के उतार चढ़ाव को सहन कर सकते है और लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहते है |

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लार्ज कैप फण्ड क्या है | निवेशकों के लिए क्यों है फायदेमंद | Large Cap Mutual Funds in Hindi

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क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर औसत रिटर्न चाहते है लेकिन ज्यादा रिस्क नही लेना चाहते है ? तो चलिए आज लार्ज कैप म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानते है जो आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है |

Large Cap Mutual Funds in Hindi

Large Cap Mutual Funds in Hindi

लार्ज कैप फण्ड, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड का एक प्रकार है | इसमें निवेश किया गया पैसा मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर बड़ी कंपनियों के शेयर्स में लगाये जाते है |

Large Cap Mutual Funds लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न दे सकते है और यह म्यूच्यूअल फण्ड में पहली बार निवेश करने लोगों के लिए अच्छा माना जाता है क्योकि लॉन्ग टर्म फण्ड ज्यादा अस्थिर नही होते है और लगातार निवेशकों को एक औसत रिटर्न देते रहते है |

लार्ज कैप फण्ड का 75% से 80% पैसा स्टॉक मार्केट के बड़ी कंपनियों  (मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर ) में लगाया जता है | और शेष 20% से 25% पैसा स्मालकैप व मिडकैप कंपनियों में लगाया जाता है ताकि इन्वेस्टर का रिस्क कम करने के बाद बेहतर रिटर्न भी दिया जा सकें |

Large Cap Mutual Funds क्यों है फायदेमंद

Large Cap Mutual Funds में ज्यादा रिस्क नही होता है क्योकि इसका पैसा लार्ज कैप कंपनीज में निवेश होता है | लार्ज कैप कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत, अच्छे ब्रांड, व ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देती है इसलिए इसमें भरोसा भी किया जाता है |

लार्ग कैप कंपनिया लम्बे समय से व्यापार कर रही होता है इसलिए ऐसी कंपनियां कई तेजी व मंदी के समय को देखी रहती है और उन हालातो को अच्छे से हैंडल भी कर सकती है | इसके साथ ही लार्ज कैप कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस भी अच्छे से लागू होता है जिसका फायदा लार्ज कैप फण्ड में देखने को मिलता है |

Large Cap Mutual Funds लॉन्ग टर्म में सम्पत्ति बनाने में मदद करती है लेकिन इसके साथ ही शोर्ट टर्म में यह रेगुलर डिविडेंड भी देती है व इसमें रिस्क कम होने से Large Cap Mutual Funds सोने पर सुहागा हो जाता है |

Large Cap Mutual Funds शुरुआत में ज्यादा बेहतर रिटर्न नही दिखाती है लेकिन समय के साथ इसका रिटर्न भी धीरे-धीरे बढ़ते जाता है |


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स्मालकैप फण्ड में क्या खास है | निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान | Small Cap Funds in Hindi

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क्या Small Cap Mutual Funds में ज्यादा रिटर्न मिलता है ? क्या आप जानना चाहते है कि स्माल कैप फण्ड में क्या खास है ? तो चलिए जानते है कि स्माल कैप फण्ड आखिर क्या है और क्या है खास?

Small Cap Mutual Funds in Hindi

Small Cap Funds in Hindi

वे फण्ड जो मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर छोटे कंपनियों में निवेश करते है, स्मालकैप Mutual Fund कहते है | स्माल कैप वह छोटे कम्पनियां होते है जो अपने डेवलपमेंट के चरण में होते है |

स्मालकैप फण्ड में रिस्क लार्ज कैप फण्ड की तुलना में अधिक होता है क्योकिं स्मालकैप फण्ड का पैसा स्टार्टअप या शुरुआत में कम कमाई करने वाले बिज़नस में लगाया जाता है |

स्मालकैप कंपनियां अपने डेवलपमेंट फेज में होती है इसलिए ऐसे कंपनियों में पैसा लगाने से स्मालकैप फण्ड के निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है | लेकिन स्मालकैप कंपनियां स्थायी नही होती है और न ही लार्ज कैप कंपनियों की तरह सफल होती है इसलिए इसमें (स्मालकैप फण्ड ) निवेश करने से रिस्क भी बहुत ज्यादा होता है |

स्मालकैप फण्ड उन निवेशकों के लिए बेहतर हो सकती है जो ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता रखने के साथ-साथ लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करना चाहते है क्योकि लम्बें समय में स्मालकैप Mutual Fund, मिड कैप व लार्ज कैप से ज्यादा रिटर्न दे सकता है |

स्मालकैप फण्ड शोर्ट टर्म में अच्छा रिटर्न नही देते है क्योकिं स्मालकैप कम्पनीयों में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और यह केवल निवेशकों के रिस्क को बढ़ाता है |

इसके अतिरिक्त बुल मार्केट के समय में स्मालकैप फण्ड का रिटर्न, मिड कैप व लार्ज कैप फण्ड से भी ज्यादा हो सकता है | जबकि बेयर मार्केट के समय में स्मालकैप फण्ड से निवेशकों को घाटा भी मिड कैप व लार्ज कैप से भी ज्यादा हो सकता है |

Small Cap Mutual Funds में निवेश से पहले क्या याद रखें ?

Small Cap Mutual Funds में निवेश करने से निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है लेकिन इसमें रिस्क भी बहुत ज्यादा होता है इसलिए निवेश से पहले स्मालकैप फण्ड का अच्छे से एनालिसिस करें और अगर आप रिस्क ले सकते है तब ही स्मालकैप फण्ड में निवेश करें अन्यथा न करें |
  • Small Cap Mutual Funds के रिस्क को कम करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को डाईवर्सिफाई करे व फण्ड का रिसर्च करने में ज्यादा समय दे |
  • लम्बें समय के लिए निवेश करें ताकि बाजार के अस्थिरता से बच सकें |
  • बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए फण्ड में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये भी निवेश कर सकते है |
  • अस्थायी कारणों से व बाजार के शोर्ट टर्म लाभ या हानि के कारण ही फण्ड की खरीदी-बिक्री न करें | 
  • मार्केट को टाइम करने व अनुमान लगाने की भूल कभी न करें |
  • स्मालकैप Mutual funds शोर्ट टर्म में बहुत अस्थिर रिटर्न देते है इसलिए लम्बे समय ( 5 साल से अधिक) के लक्ष्य के साथ निवेश करें |
  • स्मालकैप फण्ड में निवेश करने से पहले फण्ड के खर्च (एक्सपेंस रेश्यो ) को अवश्य जाँच करें |

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जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है तो क्या आपके मन में भी सवाल आता है कि आपको इक्विटी फण्ड मे इन्वेस्ट करना चाहिए या फिर डेट फण्ड में | तो चलिए आज समस्या का भी समाधान करते है और जानते है हाइब्रिड फण्ड के बारे में |
Hybrid Mutual Funds in Hindi

Hybrid Mutual Funds क्या है?

हाइब्रिड फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक विकल्प है जो आपको डेट, इक्विटी व अन्य एसेट क्लास में निवेश करने की सुविधा देता है | इसमें न तो रिस्क ज्यादा होता है और न ही रिटर्न ज्यादा होता है मतलब हाइब्रिड फण्ड मीडियम रिस्क के साथ मीडियम रिटर्न देता है |

अगर आप इक्विटी फण्ड में निवेश करते है तो इसमें सही ज्ञान न होने से पैसे डूबने का जोखिम होता है व इसके साथ ज्यादा रिटर्न भी मिल सकता है जबकि डेट फण्ड में कम रिस्क होने के कारण रिटर्न भी कम होता है

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड में इक्विटी व डेट दोनों एसेट में निवेश किया जाता है | इसका मतलब हाइब्रिड फण्ड डेट व इक्विटी एसेट का मिक्सचर होता है इसलिए hybrid mutual funds में इक्विटी फण्ड से कम रिस्क और डेट फण्ड से ज्यादा रिस्क होता है |

Hybrid Mutual Funds के प्रकार

इक्विटी या डेट में इन्वेस्ट करने के आधार पर हाइब्रिड फण्ड को कई केटेगरी में रखा गया है | ये केटेगरी म्यूच्यूअल फण्ड वर्गीकरण नॉर्म का अनुशरण करती है जो निम्नलिखित है |

Aggressive म्यूच्यूअल फण्ड - इसमें 15% से 35% फण्ड डेट इंस्ट्रूमेंट और शेष इक्विटी में निवेश किया जाता है इसलिए इस फण्ड में थोड़ा सा रिस्क होता है |

Balanced म्यूच्यूअल फण्ड - इस फण्ड में 40% से 60% के बीच का कॉम्बिनेशन रख कर लक्ष्य के आधार पर इक्विटी व डेट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है |

Conservative म्यूच्यूअल फण्ड - इसमें केवल 10% से 25% पैसा ही इक्विटी में निवेश किया जाता है और शेष फण्ड डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है ताकि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे क्योकि इसमें बहुत ही कम रिस्क लेने वाले व्यक्ति निवेश करते है |

Dynamic एसेट एलोकेशन फण्ड - यह फण्ड फ्लेक्सिबल होता है मतलब किसी भी सिक्योरिटीज डेट या इक्विटी में निवेश करने का कोई फिक्स्ड स्ट्रक्चर नही होता है |

Equity सेविंग फंड्स - इस फण्ड का 65% भाग इक्विटी में लगाया जाता है और कम से कम 10% भाग डेट सिक्योरिटीज में एलोकेट किया जाता है |

Multi-एसेट एलोकेशन फण्ड - इस फण्ड में डेट, इक्विटी व अन्य एसेट क्लास में निवेश किया जाता है | इसमें सभी एसेट क्लास में कम से कम 10% एलोकेशन किया जाता है |

Arbitrage फण्ड - आर्बिट्राज फंड एक हाइब्रिड फण्ड होता है | इस फण्ड का 65% हिस्सा इक्विटी (कंपनियों के शेयर) या इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है | इसा फण्ड का पैसा इक्विटी में लगाये जाने के कारण रिस्क अधिक होता है इसलिए इसमें बेहतर रिटर्न मिलने की सम्भावना होता है |


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इक्विटी फण्ड क्या है | इक्विटी फण्ड के प्रकार | Equity Mutual Funds in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड स्टॉक में इन्वेस्ट करने का इनडायरेक्ट तरीका होता है | इक्विटी फण्ड कई प्रकार के हो सकते है | तो चलिए इक्विटी फण्ड को पुरे डिटेल्स में जानते है | और ये कितनें तरह के होते है ?

Equity Mutual Funds in Hindi

Equity Funds क्या है ?

इक्विटी फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड का एक विकल्प है | इसमें इन्वेस्ट किया गया पैसा कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है इसलिए इसे इक्विटी फण्ड कहते है | जब एक फण्ड का 65% या उससे अधिक पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है तो उसे इक्विटी फण्ड कहा जाता है | इसके शेष 35% या कम राशि को डेट सिक्योरिटीज या इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है |

इक्विटी फण्ड लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न देता है लेकिन इसमें रिस्क भी होता है क्योकिं इस फण्ड का पैसा शेयर बाजार में ट्रैड होने वाले शेयरों में इन्वेस्ट किया जाता है | इक्विटी फण्ड आपको 14% - 15% का औसत रिटर्न दे सकती है |

Equity Funds के प्रकार

म्यूच्यूअल फण्ड अलग-अलग प्रकार के होते है क्योकिं कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन कम या ज्यादा होता है | और ये कंपनियां विभिन्न सेक्टर या इंडस्ट्री की हो सकती है |

इसके साथ ही फण्ड हाउस या एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के स्टाइल के आधार पर भी म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के हो सकते है |

स्माल कैप, मिड कैप, लार्ज कैप या मल्टी कैप

यहाँ कैप का मतलब मार्केट कैपिटलाइजेशन है | शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर छोटी-बड़ी होती है |

इस प्रकार जो फण्ड ज्यादा मार्केट कैप वाले अच्छी कंपनियों में पैसा लगाती है उसे लार्ज कैप फण्ड कहते है | इसमें बाजार का उतार-चढाव थोड़ा कम होता है |

वहीं जो फण्ड मीडियम कैप व स्मालकैप वाले कंपनियों में पैसा लगाती है उसे क्रमशः मिड कैप व स्मालकैप फण्ड कहते है | इन फण्ड में बाज़ार के ऊपर-नीचें होने पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है |

सेक्टर फण्ड, डाइवर्सिफाइड फण्ड और थीमेटिक फण्ड

सेक्टर फण्ड का पैसा एक ही सेक्टर के कई कंपनियों में निवेश किया जाता है | जैसे आईटी, बैंकिंग, रिटेल, एग्रीकल्चर सेक्टर आदि | इसमें एक ही सेक्टर में इन्वेस्ट होने से निवेशक को जोखिम भी ज्यादा होता है |

जबकि डाइवर्सिफाइड फण्ड में लगाया पैसा अलग-अलग सेक्टर के कंपनियों में इन्वेस्ट किया जाता है इसलिए इसमें जोखिम सेक्टर फण्ड की तुलना में कम हो जाता है |

थीमेटिक फण्ड का पैसा एक थीम को फॉलो करके लगाया जाता है | जैसे स्टार्टअप आदि |

एक्टिव फण्ड और पैसिव फण्ड

ये फण्ड पूरी तरह से फण्ड हाउस व फण्ड मैनेजर के इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर निर्भर करता है | अगर फण्ड मैनेजर कंपनियों का एनालिसिस व रिसर्च करके उसे अपने पोर्टफोलियो में रखता है तो ऐसे फण्ड को एक्टिव फण्ड कहते है |

जबकि पैसिव फण्ड उसे कहते है जिसमे फण्ड मैनेजर इंडेक्स ( सेंसेक्स व निफ्टी आदि) के कंपनियों में निवेश करता है जिससे इसका रिटर्न भी इंडेक्स के समान ही आता है इसलिए इस फण्ड को इंडेक्स फण्ड भी कहते है|

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | What is Mutual Funds in Hindi

म्यूच्यूअल फण्ड एनएवी क्या है | नेट एसेट वैल्यू काम कैसे करता है | Mutual Fund NAV in Hindi

रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड क्या है ?
डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड क्या है ?

म्युचुल फण्ड के कितने प्रकार है | Types of Mutual funds

इक्विटी फण्ड क्या है | इक्विटी फण्ड के प्रकार | Equity Mutual Funds in Hindi
डेट फण्ड क्या है | डेट फण्ड के प्रकार | Debt Mutual Funds in Hindi
हाइब्रिड फण्ड क्या है | हाइब्रिड फण्ड के प्रकार | Hybrid Mutual Funds in Hindi

स्मालकैप फण्ड में क्या खास है | निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान | Small Cap Mutual Funds in Hindi
लार्ज कैप फण्ड क्या है | निवेशकों के लिए क्यों है फायदेमंद | Large Cap Mutual Funds in Hindi
मल्टी कैप फण्ड क्या है | क्या आपको निवेश करना चाहिए | Multi Cap Funds in Hindi


क्या है इंडेक्स फण्ड | क्या आपको निवेश करना चाहिए | Index Funds in Hindi
एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड (ईटीएफ ) क्या होता है | Exchange Traded Fund (ETF) in Hindi
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम क्या है | Equity Linked Savings Scheme (ELSS) in Hindi

SIP या Lumpsum बेहतर रिटर्न किसमे मिलता है?

शेयर बाजार क्या है | Share Market in Hindi
शेयर बाजार में निवेश कैसे करें | Share Market me Nivesh Kaise Kare

डेट फण्ड क्या है | डेट फण्ड के प्रकार | What are Debt Mutual Funds in Hindi

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क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करना चाहतें है लेकिन ज्यादा रिस्क लेने से डरते है ? अगर हाँ तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे है | आज के इस पोस्ट में आप डेट फण्ड के बारे में सीखने वाले है | तो चलिए जानतें है Debt Mutual funds क्या होता है |

Debt Mutual Funds in Hindi

Debt Mutual Funds क्या है ?

डेट फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड का एक विकल्प है | यह उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो कम रिस्क लेकर अपनें पैसे को निवेश करना चाहते है | डेट फण्ड में निवेशकों के लगायें पैसे को सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट बांड, ट्रेज़री बिल, व अन्य प्रकार के सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है अर्थात् उधार के रूप में संस्थाओ को दिया जाता है|

डेट फण्ड में इक्विटी फण्ड के तुलना में रिस्क कम होता है | इक्विटी फण्ड में पैसा कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है इसलिए इक्विटी फण्ड में रिस्क ज्यादा होता है |

डेब्ट फण्ड में लगाया गया पैसा एक निश्चित समय के लिए, निश्चित ब्याज़ दर पर लगाया जाता है | अतः निवेशकों को इस बात का खबर रहता है कि समयावधि समाप्त होने पर उन्हें एक "फिक्स इनकम" मिलने वाला है | डेट फण्ड को फिक्स इनकम मिलने के वजह से ही फिक्स इनकम सिक्यूरिटी कहा जाता है |

डेट फण्ड में लगाया पैसा कम या ज्यादा समय के लिए अलग-अलग क्रेडिट रेटिंग्स की सिक्योरिटीज़ में भी लगाया जाता है ताकि निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाया जा सकें, परंतु कई बार क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर इन सिक्योरिटीज़ में रिस्क भी होते है | जहां ज्यादा क्रेडिट रेटिंग वालें संस्थाओ अपना उधारी व ब्याज़ चुकाने में बेहतर मानी जाती है |

आप डेट फण्ड में कम समय (3 या 6 माह ) या लम्बे समय के (3 या 5 साल से अधिक ) के लिए इन्वेस्ट कर सकते है | समय ( मैच्योरिटी) के आधार पर डेट फण्ड भी अलग-अलग हो सकते है |

डेट फण्ड में 3 साल या उससे ज्यादा होने के बाद 20% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाता है जबकि शोर्ट-टर्म में निवेशक को डेट फण्ड से मिलने वाले कैपिटल गेन को टोटल इनकम में जोड़कर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स देना होता है |

Debt Mutual Funds कैसे करता है ?

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों के शेयर पर निर्भर होता है उसी प्रकार डेट म्यूच्यूअल फण्ड पूरी तरह से ब्याज़ दर पर निर्भर करता है |

ब्याज़ दर (रेपो रेट व रिवर्स रेपो ), जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) नियंत्रित करती है अर्थात RBI ही ब्याजदर को अर्थव्यवस्था के परिस्थितियों के आधार पर कम या ज्यादा करती है |

और इस ब्याजदर के उतार-चढाव के आधार पर ही कॉर्पोरेट बांड या डेट सिक्योरिटीज जारी करती है | इसका मतलब है कि डेट फण्ड का रिटर्न ब्याजदर पर निर्भर होता है |

अगर ब्याजदर कम होता है तो बांड की कीमत बढ़ जाती है और निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलता है जबकि ब्याजदर ज्यादा होता है तो बांड की कीमत घट जाती है | इसका मतलब डेट इंस्ट्रूमेंट का की कीमत ब्याजदर के विपरीत होता है |

Debt Mutual Fund के प्रकार

जिस तरह इक्विटी फण्ड, मार्केट कैप व इन्वेस्टिंग स्टाइल के आधार कई प्रकार के होते है उसी प्रकार डेट फण्ड मैच्योरिटी के समय के आधार पर कई प्रकार के होते है |

लिक्विड फण्ड - इस फण्ड का पैसा ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है जिन की मैच्योरिटी 91 दिन से ज्यादा नही होती है | यह फण्ड बचत बैंक की तुलना में अच्छा विकल्प होता है क्योकिं इसमें बेहतर रिटर्न मिलता है और कम समय के लिए होता है |

लिक्विड फण्ड का पैसा कम समय में मैच्योर होने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट में लगया जाता है इसलिए इसमें रिस्क कम होता है व रिटर्न के नेगेटिव होने का चान्स बहुत ही कम होता है |

डायनामिक फण्ड - डायनामिक फण्ड में, निवेश में मिलने वाला ब्याज़ दर बदलता रहता है इसलिए निवेश के मैच्योर होने का समय भी बदलता रहता है अर्थात ब्याज दर से सीधा सम्बन्ध होने के कारण पैसे का निवेश भी जल्दी या देर से किया जाता है |

शोर्ट टर्म या अल्ट्रा शोर्ट टर्म डेट फण्ड - ये डेट फंड्स ऐसे इन्वेस्टर के लिए बहुत ही उपयुक्त है जो 3 साल के लिए निवेश करना चाहते है क्योकिं यह फण्ड 3 साल में मैच्योर हो जाते है | इसके साथ ही ब्याज़ दर में बदलाव का भी इन फंड्स में ज्यादा प्रभाव नही होता है |

इनकम फण्ड - इनकम फण्ड में मैच्योरिटी का समय कम से कम 5 औसतन होता है इसलिए इस फण्ड का पैसा ब्याज़ दर के आधार पर अलग-अलग सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है ताकि निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाया जा सकें |

गिल्ट फण्ड - इस फण्ड का पैसा केवल सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट किया जाता है | गिल्ट फण्ड उन निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है जो कम रिस्क के साथ एक अच्छे विकल्प की तलाश में है | गिल्ट फण्ड में क्रेडिट रिस्क कम होता है क्योकिं गिल्ट फण्ड का पैसा सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता है |

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मुद्रास्फीति क्या है | महंगाई कैसे बढ़ती है | What is Inflation Meaning in Hindi

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What is Inflation Meaning in Hindi:क्या मुद्रास्फीति के कारण दैनिक आवश्यकताओं की चीजें महंगी हो जाती है ? क्या मुद्रास्फीति का प्रभाव हम सब पर पड़ता है ? यदि हाँ तो मुद्रास्फीति या महंगाई से बचने के क्या तरीके है ? चलिए जानते है आखिर क्यों मुद्रास्फीति अच्छी नही होती है ?

What is Inflation Meaning in Hindi

मुद्रास्फीति या Inflation क्या है ?

मुद्रास्फीति एक ऐसी स्थिति है जिसमें जिस मुद्रा (रुपयें ) से आप सामान खरीदते है उसकी वैल्यू कम हो जाती है क्योकिं देश में ज्यादा मुद्रा (सिक्के व नोट की संख्या ) हो जाते है | और वस्तुओं (खानें-पीने, दैनिक उपयोग व अन्य सामान ) की कीमत बढ़ जाती है |

इस तरह से महंगाई (मुद्रास्फीति ) में रुपयें सभी के पास आ जाते है | जिसकी वजह से मुद्रा से खरीदनें की शक्ति कम हो जाती है और उपयोग की वस्तुयें कम हो जाती है जिससे वस्तुओं की कीमत आसमान छूने लगती है |

मुद्रास्फीति के समय भी देश में मुद्रा (रुपयें ) का चलन तो पहले जैसा ही होते रहता है लेकिन इस तरह मुद्रा की वैल्यू घटने पर भी प्रभाव दिखाई नही देता है |

इसका सबसे ज्यादा प्रभाव कम इनकम वाले एवं मध्यमवर्गीय परिवार पर होता है क्योकिं महंगाई बढ़ने के कारण ऐसे परिवार अपनी दैनिक उपयोग के वस्तुओं(खानें-पीने, दैनिक उपयोग के अन्य सामान ) को भी खरीद नही पाते है |

याद करिये आज से 10 साल पहले 100 रुपयें में आप बहुत सा सामान खरीद कर ले आते थे लेकिन आज 100 रुपयें में केवल एक या दो सामान ही मिलती है | इसकी मुख्य वजह मुद्रास्फीति (महंगाई) है |

उदाहरण: आज एक कुर्सी 100 रुपयें  में मिलता है और आप 100 रुपयें  बैंक में जमा करते है | एक साल बाद कुर्सी  की कीमत 106 (100 + 6 महंगाई) रुपयें हो जाती है लेकिन आपके बैंक में जमा 104 (100+ 4 ब्याज ) रुपयें होते है मतलब आपके 100 रुपयें में खरीदनें की शक्ति 2 प्रतिशत कम हो गयी है |

मुद्रास्फीति हर साल 5% - 6% की दर से बढ़ती है मतलब हर साल मुद्रा ( रूपये ) से खरीदनें की शक्ति 5-6 प्रतिशत कम होते जाती है इसलिए मुद्रा (रुपयें ) के खरीदनें की शक्ति को बढ़ाना जरुरी हो जाता है |

महंगाई या मुद्रास्फीति (inflation) से कैसे बचें?

मुद्रास्फीति या महंगाई से बचने का केवल एक ही तरीका है | इससे बचनें के लिए आपको मुद्रा (रुपयें) की वैल्यू को बढ़ाना है | मुद्रा (रुपयें) की वैल्यू बढ़ाने के लिए आपको मुद्रा (रुपयें) को सही से उपयोग में लाना है |
  • मुद्रा की बचत करना 
  • मुद्रा की बचत कर बैंक में न रखना क्योकिं बैंक में 4% ब्याज मिलता है जो महंगाई दर (6%) से कम है
  • बचत करने के बाद मुद्रा का निवेश करना ताकि महंगाई दर से ज्यादा का ब्याज ( रिटर्न ) मिल सके
नोट: निवेश का अर्थ = किसी ऐसे जगह में मुद्रा(रूपये) को लगाना जिसमें रिस्क या जोखिम कम हो और जिससे महंगाई दर (6%) से ज्यादा का ब्याज ( रिटर्न ) मिल सकें |

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