Net Worth in Hindi-नेटवर्थ क्या होता है | Networth कैसे कैलकुलेट करते है

अक्तूबर 13, 2021
क्या आप जानते है? Net worth क्या है? आपकी कितनी NetWorth है? और इसे कैलकुलेट करने के लिए आप नीचें दिए Net worth Formula का use कैसे करेंगे |
what is Net Worth in hindi

What is Net Worth in Hindi

Net worth को समझने के लिए हम इसके दोनों शब्दों को अलग करेंगे -

Net = शुद्ध
Worth = सम्पति 

अर्थात इसका मतलब शुद्ध सम्पति है

इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार
नेट वर्थ किसी व्यक्ति या कंपनी की संपत्ति और दायित्व के बीच का अंतर है। 
इसका उपयोग तो कम्पनी, व्यक्ति , संस्था आदि के साथ किया जाता है जो उस कम्पनी , व्यक्ति या संस्था के आर्थिक स्थितियों को बताता है |


अब सवाल ये उठता है कि कम्पनी, व्यक्ति या संस्था की शुद्ध सम्पति क्या होती है |

कम्पनी, व्यक्ति या किसी संस्था का Net worth उनकी कुल सम्पति (Total Asset) में कुल दायित्व (Total Libelities) में घटाने से प्राप्त होता है |

आपने अक्सर तरह तरह के माध्यमों से चाहे वह टीवी , रेडियो, या फिर समाचार पत्रों में हो, किसी कम्पनी , फिल्म स्टार्स , स्पोर्ट्स पर्सन(खिलाडियों ) के Net worth के बारे में सुना होगा |

अगर आप किसी कम्पनी या सेलिब्रेटीज का आर्थिक स्थिति (Financial Position ) के बारे में जानना चाहते है तो आपको उस कम्पनी या सेलिब्रिटीज का Net worth कैलकुलेट करना होगा |

Networth की गणना

Net worth की गणना करना बहुत ही आसान है अगर आपको जोड़ना व घटाना आता है तो आप आसानी से Net worth कैलकुलेट कर सकते है |

नोट: यह फार्मूला स्टॉक मार्केट की किसी कंपनी के नेट वर्थ को जानने के लिए आप प्रयोग कर सकते है |


Net Worth = (Total Asset -Total Liabilities)
नेट वर्थ = कुल सम्पति – कुल दायित्व

यहाँ पर आपको net worth कैलकुलेट करने के लिए कुल सम्पति व कुल दायित्व को जानना आवश्यक है क्योंकि इनके बिना आप किसी व्यक्ति या कम्पनी का नेट वर्थ नही निकाल सकते है |


कुल सम्पति : सबसे पहले आपको सभी सम्पतियों का लिस्ट बनाना होगा अगर आपने अमिताभ बच्चन की डायलॉग सुनी हो "आज मेरे पास गाड़ी है , बंगला है , बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है? " तो आप आसानी से कुल सम्पतियो की लिस्ट बना सकते हो |


कुल सम्पति में  जमीन , प्लांट , बैंक बैलेंस, इन्वेस्टमेंट, स्टॉक, म्यूच्यूअल फंड्स , गाड़ी, बंगला सब को शामिल किया है |


कुल दायित्व : कुल दायित्व में किसी भी प्रकार का लोन (कार लोन , गोल्ड लोन , होम लोन आदि ) को शामिल किया जाता है |


उदहारण के लिए हमने माना कि एक कंपनी का कुल सम्पति 1000 करोड़ है व कुल दायित्व 700 करोड़ है 
तो उस कम्पनी का नेट वर्थ होगा -

300 करोड़ = 1000 करोड़  – 700 करोड़

इस प्रकार हम कह सकते है कि उस कम्पनी की नेट वर्थ 300 करोड़ है |

ब्लू चिप कंपनी क्या है | ब्लू चिप कंपनीयो की विशेषता | Blue Chip Companies in Hindi

अक्तूबर 13, 2021
क्या आप जानते है ब्लू चिप कंपनी (Blue Chip Companies) क्या है? और ब्लू चिप कंपनियों में निवेशको का ज्यादा भरोसा क्यों होता है? तो चलिए जानते है ब्लू चिप कम्पनियों की सारी अनसुनी बातों को|

Blue Chip Company kya hai

ब्लू चिप क्या है (Blue Chip Kya Hai)

ब्लू चिप का इतिहास बहुत पुराना है, ब्लू चिप नाम, पोकर नाम के एक खेल से लिया गया है | पोकर खेल में ब्लू चिप सबसे मूल्यवान होता था |

ब्लू चिप कंपनी क्या है (Blue Chip Companies in Hindi)

स्टॉक मार्केट में बड़ी कम्पनियों को, जो बड़ी हो गयी है और अपना बिज़नस आसानी से कर रही है| उन कंपनियो को ब्लू चिप कंपनी कहा जाता है |

Blue Chip Companies का मार्केट कैपिटलाइजेशन ज्यादा होता है और इन कंपनियों  के शेयर प्राइस में उतार-चढ़ाव कम होता है| इसके अतिरिक्त Blue Chip shares या companies की अर्निंग स्थिर व नियमित होती है|

ब्लू चिप स्टॉक का मार्केट वैल्यूएशन भी बहुत अधिक होता है, इसके साथ बाजार में गिरावट (बुलिश मार्केट ) के दौरान भी ब्लू चिप कंपनियों का रिटर्न, स्माल कैप व मिड कैप वाले कंपनियों से बेहतर होता है और इन्ही सब वजह से ब्लू चिप कंपनियों में निवेशकों का ज्यादा भरोसा होता है क्योकिं ये कंपनिया कई दशकों से बिज़नस कर रही होती है|

ब्लू चिप कंपनियों प्रॉफिट होने पर डिविडेंड देने के लिए भी बहुत फेमस होती है | और इसलिए ये कंपनिया निवेशको के लिए बहुत ही आकर्षक हो जाती है |

भारत में ब्लू चिप कम्पनी (Indian Blue Chip Companies)

भारत में कई Blue Chip Companies है, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन अधिक है एवं लगातार अच्छा बिज़नस कर रहे है | आइये कुछ कंपनियों को देखते है|

  • Tata Consultancy Services (TCS)
  • Infosys
  • Indian Tobacco Company (ITC)
  • State Bank of India (SBI)

म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते है ? Types of Mutual Fund in Hindi

अक्तूबर 13, 2021
एक बेहतर निवेशक बनने व लाभ लेने के लिए म्युचुअल फंड्स के प्रकार ( Type of Mutual Funds) को समझना आवश्यक है | इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे कि भारत में म्युचुअल फंड्स के प्रकार कितनें है |
Mutual Fund Investment image

म्युचुअल फण्ड सही है ?

आपने ये विज्ञापन तो जरुर देखा होगा "म्युचुअल फंड्स सही है " लेकिन क्या आप बिना म्युचुअल फंड्स के प्रकार ( Type of Mutual Funds) को समझे बिना बता  सकते है कि कौन सा म्युचुअल फण्ड सही है | इससे पहले हम म्युचुअल फण्ड के बारे में बता चुके है | आइये जानते है म्यूच्यूअल फंड्स के कितने प्रकार है |

म्यूचुअल फंड के प्रकार (Mutual Fund ke Prakar)

Mutual Fund आपके और हमारे जैसे लोगों से एकत्रित किया हुआ बहुत सारा पैसा है जिसे इन्वेस्टमेंट के लिए लोगों से, लोगों के फायदे के लिए कलेक्ट किया जाता है |

लेकिन क्या कोई एक ही कम्पनी इन सारे फंड्स को कलेक्ट या मैनेज करने का काम करती है तो ऐसा नही है |

भारत में लगभग 50 से भी ज्यादा म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी काम कर रही है जो लोगों का पैसा इकठ्ठा करती है |

जिसकी वजह से हमारे पास बहुत सारे ऑप्शन्स ( Mutual Funds Scheme व ऑफर ) है जिसे अलग अलग कम्पनिया प्रोवाइड करती है |

Mutual Fund Types

म्युचुअल फंड्स में निवेश करने का हमारा व आपका उद्देश्य अलग अलग हो सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए कोई भी म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी अपने स्कीम लाती है |

Based on Asset Class (एसेट क्लास पर आधारित )

इस प्रकार के फंड्स अलग अलग एसेट में इन्वेस्ट करते है जैसे: बांड्स, शेयर, आदि | 
  • Equity Funds
  • Debt Funds
  • Hybrid or Balanced Funds
  • Tax - Saving Funds
  • Sector Funds
  • Index Funds
  • Funds of Funds

Based on Structure (स्ट्रक्चर पर आधारित )

स्ट्रक्चर आधारित म्यूच्यूअल फंड्स वे होते है जो एक निश्चित समय में ख़रीदा एक बेचा जा सकता है -
  • Closed-Ended Funds
  • Open-Ended Funds

Based on Investment Objective(लक्ष्य पर आधारित )

इस प्रकार के म्यूच्यूअल फंड्स स्कीम आपके इन्वेस्टमेंट लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया जाता है -
  • Growth Funds
  • Income Funds
  • Liquid Funds

एनुअल रिपोर्ट क्या है और एनुअल रिपोर्ट कैसे पढ़ें | How to Read Annual Report in Hindi

अक्तूबर 13, 2021
क्या आप जानते है ? एनुअल रिपोर्ट क्या है और एनुअल रिपोर्ट कैसे पढ़ते है ? अगर नहीं तो कोई बात नहीं, इस पोस्ट को पढ़ने बाद आपको पता चल जाएगा कि Annul Report में क्या - क्या देखना है , किन - किन चीजों पर हमें ज्यादा फोकस देना होता है और किस सेक्शन में कम समय देना होता है |


Annual Report in Hindi


एनुअल रिपोर्ट क्या है ( Annual Report Kya Hai)

Annual Report कंपनी के द्वारा हर साल Shareholders और इंटरेस्टेड पार्टीज के लिए 
फाइनेंसियल इयर के एंड में पब्लिश किया जाता है | Annual Report में कंपनी साल
 भर यानि कि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के business का लेखा जोखा हिसाब किताब देती है|

किसी कंपनी का सही , trusted और विश्वासनिय फाइनेंसियल डाटा लेने का सबसे अच्छा माध्यम एनुअल रिपोर्ट होता है |

अगर हम एनुअल रिपोर्ट पढना चाहते है तो हम एनुअल रिपोर्ट कंपनी की वेबसाइट या NSE, BSE की वेबसाइट से सॉफ्ट कॉपी के रूप में डाउनलोड करके पढ़ सकते है | यह एकदम फ्री होता है और कोई भी इसे डाउनलोड करके पढ़ सकता है |

एनुअल रिपोर्ट कैसे पढ़ें (Annual Report Kaise Padhe)

किसी भी एनुअल रिपोर्ट को पढ़ते समय नीचें दिए गये बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखे | एनुअल रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सेक्शन होते है और उन सेक्शन से हमें काम की सारी जानकारी लेनी होती है |

मार्केटिंग कंटेंट

जब भी आप किसी Annual Report को डाउनलोड करते है तो ये आवश्यक देखे कि कंपनी ने ज्यादा कलरफुल Annual Report तो नही बनाया मतलब क्या मार्केटिंग मटेरियल की तरह पेश किया है, मात्र इमेजेज तो नही रखे है |

अगर ऐसा है तो वो कंपनी आपका ध्यान भटकना चाहती है ताकि आपसे वह फैक्ट्स को छुपा सके तो ऐसे कंपनियों से सावधान रहना आपकी जिम्मेदारी है |

फाइनेंसियल हाइलाइट्स

इस सेक्शन में कंपनी पिछले कई वर्षों के डाटा को हाईलाइट करता है...जिसमे ग्राफ, टेबल आदि का use करती है...इस सेक्शन में कंपनी के कई सालो के ऑपरेशन व् business performance को compare करती है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट एंड Management Discussion and analysis

ये एनुअल रिपोर्ट के दो इम्पोर्टेन्ट सेक्शन है...इस सेक्शन से आपको पता लगता है कि कंपनी के मैनेजमेंट का business और इंडस्ट्री के प्रति क्या पर्सपेक्टिव है | यहाँ पर लिखे एक - एक शब्द को ध्यान से पढना इन्वेस्टर्स के लिए बहुत ही आवश्यक है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट से आपको पता चलता है कि जो व्यक्ति टॉप में बैठा है उसका business के प्रति क्या विचार है, क्या मैनेजमेंट ट्रांसपेरेंट है या नही..कुछ गलत या सही आपसे छुपाया तो नही रहा है...कही मैनेजमेंट हवा में तो बात नही कर रहा है...ये सब को आपको ध्यान देना है…

Management डिस्कशन एंड एनालिसिस पुरे Annual Report का सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन है...क्योकि यहाँ कंपनी इकॉनमी के मैक्रो ट्रेंड, देश की आर्थिक गतिविधियों, विश्व की आर्थिक गतिविधियों और बिज़नस सेंटिमेंट के बारे में बात करती है |

कंपनी यहाँ पर इंडस्ट्री व् business के फ्यूचर में क्या उम्कमीद करती है उसे भी चर्चा करती है |

शेयर होल्डिंग पैटर्न

कंपनी का कितना शेयर किसके पास है... प्रोमोटर्स ग्रुप ने अपनी shareholoding कम कि है या ज्यादा, घरेलू व विदेशी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी ने कितने परसेंट शेयर होल्डिंग अपने पास रखी है| पब्लिक के पास कितना शेयर है |

इन सबका शेयर होल्डिंग पैटर्न चेक करे…. इसके लिए Ctrl + F बटन दबाये व shareholiding pattern लिखकर सर्च करने से कंपनी का शेयर होल्डिंग पैटर्न दिखाई देता है |

फाइनेंसियल स्टेटमेंट

यह सेक्शन किसी भी कंपनी का महत्वपूर्ण सेक्शन होता है जो कंपनी के फाइनेंसियल व बिज़नस की स्थिति को बताता है | इस सेक्शन में कंपनी के पुरे साल भर किये गये काम का हिसाब किताब रहता है -
  • Balance sheet statement
  • Profit loss statement
  • Cash flow statement
इन सब स्टेटमेंट को बहुत ही सावधानी से पढना होता है | इसके साथ स्टेटमेंट के notes को भी आवश्यक रूप से पढ़े ताकि सभी स्टेटमेंट को अच्छे से डिटेल में समझा जा सके |

आईपीओ अलॉटमेंट कैसे चेक करें | How to Check IPO Allotment in Hindi

अक्तूबर 12, 2021 Add Comment

IPO में अप्लाई किया है, IPO Allotment भी हो गया है लेकिन यह कैसे पता करें कि आपको अलॉटमेंट मिला है या नहीं | इस पोस्ट में मैं बताने वाला हूँ कि आप किसी भी आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक कर सकते है |


आपने चाहे किसी भी कंपनी के आईपीओ में अप्लाई किया हो, कोई सा भी रजिस्ट्रार (kfintech, LinkIntime etc.) हो | इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको  IPO Allotment Status चेक करना आ जाएगा |


(आईपीओ अलॉटमेंट कैसे चेक करें (How to Check IPO Allotment )

अगर आपने किसी कंपनी के आईपीओ में अप्लाई किया है तो उस कंपनी का एक रजिस्ट्रार होता है जो उस कंपनी के आईपीओ से संबंधित डाटा, इन्फोर्मेशन, इन्वेस्टर्स के आईपीओ एप्लीकेशन फॉर्म्स कलेक्ट करता है | invalid एप्लीकेशन को रिजेक्ट करता है, valid एप्लीकेशन का लिस्ट तैयार करता है, फिर आईपीओ अलॉटमेंट का प्रोसेस पूरा करता है और यह भी ध्यान रखता है कि जिनको आईपीओ अलॉटमेंट मिला है उनके डीमैट खाते में शेयर सही से पंहुचा है और जिनको आईपीओ अलॉटमेंट नहीं मिला है उनके खाते में पैसा वापस चला गया है | यह सारे काम रजिस्ट्रार करता है |

ये रजिस्ट्रार अलग - अलग कंपनी के आईपीओ के लिए अलग - अलग हो सकते है | अब अगर आपको आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस चेक करना है तो उन कंपनी के रजिस्ट्रार के वेबसाइट में जाना होगा, कुछ रजिस्ट्रार का वेबसाइट लिंक और चेक करने का पूरा प्रोसेस मैंने नीचें बता दिया है ताकि आपको ज्यादा खोजना न पड़े |

आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस के लिए क्या चाहिए ( IPO Allotment Status Ke Liye Requirement)

आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए दो चीज बहुत जरुरी होता है - पहला पैन नंबर और दूसरा एप्लीकेशन नंबर | जब भी आप किसी आईपीओ में अप्लाई करते है तो प्रोसेस पूरा होने के बाद उसमें एक Application नंबर मिलता है | यही दोनों चीज आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए चाहिए |


KFintech Private Limited

स्टेप 1 Select IPO में उस आईपीओ का नाम सेलेक्ट करना है जिसमें अप्लाई किया है 
स्टेप 2 Query by के विकल्प में से PAN चुन लेना है, आप DPID या एप्लीकेशन नंबर भी चुन सकते है 
स्टेप 3 PAN वाले बॉक्स में अपना PAN Numberडालना है 
स्टेप 4 Captcha वाले बॉक्स में उसके ऊपर दिया कोड डालना है 
स्टेप 5 Submit बटन पर क्लिक करके स्टेटस चेक कर लेना है 


 

Link Intime India Private Ltd

स्टेप 0 Linkintime का वेबसाइट खोलना है Investor Services में जाकर Public Issues पर क्लिक करना है 
स्टेप 1 Select IPO में उस आईपीओ का नाम सेलेक्ट करना है जिसमें अप्लाई किया है 
स्टेप 2 विकल्प में से PAN चुन लेना है, आप DPID या एप्लीकेशन नंबर भी चुन सकते है 
स्टेप 3 PAN वाले बॉक्स में अपना PAN Numberडालना है 
स्टेप 4 Submit बटन पर क्लिक करके स्टेटस चेक कर लेना है 


BSE India Website

स्टेप 0 BSE India का वेबसाइट खोलना है Investor Services में जाकर Status of Issue Application पर क्लिक करना है 
स्टेप 1 Issue type में equity चुनना है 
स्टेप 2 Select IPO में उस आईपीओ का नाम सेलेक्ट करना है जिसमें अप्लाई किया है 
स्टेप 3 एप्लीकेशन नंबर डालना अनिवार्य है  
स्टेप 4 PAN वाले बॉक्स में अपना PAN Number डालना अनिवार्य है 
स्टेप 5 I'm not a robot पर टिक लगाना है 
स्टेप 6 Search बटन पर क्लिक करके स्टेटस चेक कर लेना है 

BSE india Website



अब मैं उम्मीद करता हूँ कि आप यह जान गए होंगे कि आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करना है |

डीमैट अकाउंट क्या है इसे कहाँ व कैसे खोलें | Demat Account in Hindi

अक्तूबर 12, 2021
शेयर बाजार से शेयर खरीदनें के लिए डीमैट अकाउंट खुलवाना जरुरी होता है, डीमैट अकाउंट जिसमे शेयर खरीद कर रखा जाता है तो आइये डिटेल में जानते है कि डीमैट अकाउंट क्या है इसे कहाँ व कैसे खोलें ?

Demat Account in Hindi

डीमैट अकाउंट क्या है ( Demat Account in Hindi )

डीमैट अकाउंट एक ऐसा अकाउंट है जो बैंक अकाउंट की तरह ही होता है इसमें फर्क यह है कि हम बैंक अकाउंट में पैसे रखते है जबकि डीमैट अकाउंट में शेयर रखा जाता है |

डीमैट अकाउंट में आपको शेयर मार्केट से  शेयर खरीदनें के लिए ही पैसे रखने होते है पर इसमें कोई भी मिनिमम बैलेंस रखने की जरुरत नही है |

डीमैट अकाउंट कहाँ खोले ( Demat Account Kaha Khole)

जिस प्रकार हम किसी अच्छे बैंक में खाता खोलते है उसी प्रकार डीमैट अकाउंट खोलने के लिए हमें एक अच्छा सा स्टॉक ब्रोकर चुनना होता है जो आपको अच्छी सर्विसेस देता हो |

भारत में बहुत सारे स्टॉक ब्रोकर है, उसमें से हमारे लिए अच्छा स्टॉक ब्रोकर चुनना बहुत चुनौती-भरा काम है | उनमे से कुछ मुख्य निम्न है जिनमें आप अपना खाता खुलवा सकतें है | इसे मैंने क्रम से रखा है -
  • Zerodha
  • Upstox
  • Angel Broking
  • 5 Paisa
  • Samco
  • MotilalOswal
  • ShareKhan
इन सबके आलावा हमारे पास कई बैंक भी है जो डीमैट अकाउंट खोलते है या स्टॉक ब्रोकर की सर्विसेस देते है -
  • Kotak Securities LTD
  • ICICI Securities LTD
  • SBI (State Bank of India )
  • Axis Securities LTD
  • HDFC Securities LTD

डीमैट अकाउंट खोलने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें

  • एक अच्छा स्टॉक ब्रोकर चुने 
  • स्टॉक ब्रोकर जो कम से कम या जीरो ब्रोकरेज  (सर्विसेस के लिए चार्ज ) ले रहा हो 
  • फुल सर्विस ब्रोकर हर महीनें स्टॉक टिप्स के नाम पर चार्जर्स लेते है, अतः जीरो ब्रोकरेज को चुन सकते है |

डीमैट अकाउंट कैसे  खोले ( Demat Account Kaise Khole)

अगर हम डीमैट अकाउंट खोलना चाहते है तो कुछ Documents की आवश्यकता होती है, हम उन डॉक्यूमेंट का प्रयोग कर सकते है जिनसे हमनें अपना बैंक अकाउंट खोला था | जैसे -
  • पैन कार्ड 
  • आधार कार्ड
  • एक फ़ोटो
वही एड्रेस प्रूफ के लिए हम इनमे से कोई भी एक डाक्यूमेंट्स दे सकते है -
  • वोटर कार्ड
  • राशन कार्ड 
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • इलेक्ट्रीसिटी बिल 
  • पासपोर्ट 
इनकम प्रूफ के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स
  • कैंसल चेक ( Cheque )
  • या बैंक स्टेटमेंट

डीमैट अकाउंट कहा खुलता है ( Demat Account Kaha Khulta Hai )


इंडिया में SEBI (Securities Exchange Board of India) के निर्देशानुशार Demat account केवल दो संस्थाओ के द्वारा खोले जाते है:
  • Central Depository Services Limited (CDSL)
  • National Securities Depository Limited(NSDL)
हम डीमैट अकाउंट खोलने के लिए डायरेक्ट इन दोनों संस्थाओ के पास नही जा सकते है लेकिन अपने मनपसंद स्टॉक ब्रोकर या बैंक के पास जाकर अपना Demat Account खुलवा सकते है |


डीमैट अकाउंट खोलने के लिए कुछ मामूली सी फीस (400 से 500 रूपयें ) स्टॉक ब्रोकर व बैंक लेते है जो केवल एक बार अकाउंट ओपन करते वक़्त ही लगता है | इसके अलावा Demat Account में दी जा रही सेवाओं के लिए Annual maintanence Charge  (AMC ) लिया जाता है जो साल भर का लगभग 300 रूपये होता है |

आईपीओ क्या है ? आईपीओ में पैसा कैसे लगायें ? IPO in Hindi | Initial Public Offering In Hindi

अक्तूबर 11, 2021
शेयर बाजार में हम अक्सर एक शब्द सुनते रहते है "आईपीओ" तो आइये इसे जानते है कि यह आईपीओ क्या होता है और इसमें पैसा कैसे लगाया जाता है | हम इस पोस्ट के माध्यम से जानने वाले है IPO kya hota hai |


What is IPO in Hindi

आईपीओ क्या होता है (IPO Kya Hota Hai)

जब कोई कम्पनी पहली बार अपना शेयर पब्लिक को ऑफर करती है या कहे कि पहली बार पब्लिक को  अपना शेयर बेचती है तो उसे IPO यानी initial Public Offering कहा जाता है | कोई भी कम्पनी का ऐसा करने के पीछे अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए पैसा इकठ्ठा करना होता है या कंपनी दूसरें कई कारण से भी अपने आईपीओ ला सकते है |

कम्पनी अपना आईपीओ क्यों लाती है ? (Company IPO Kyu Lati Hai)

कोई भी कम्पनी जब IPO यानि पहली बार शेयर को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करती है तो इसके पीछे कई कारण होते है | जैसे -

1) कंपनी को पैसे की जरूरत - कंपनी को पैसा चाहिए और कंपनी इसके लिए लोन लेना नही चाहती है और इसलिए कंपनी अपने बिज़नस का थोडा सा हिस्सा बेचकर अपने पैसो की जरूरत को पूरा करती है, कंपनी को पैसे की जरुरत मशीन खरीदने के लिए, प्लांट लगाने के लिए, ऑफिस की बिल्डिंग बनाने आदि के लिए हो सकती है |

2)  लोन चुकाने के लिए - कभी कभी कई कम्पनी अपने ऊपर की लायबलिटी / दायित्व को पूरा करने के लिए यानि की लोन को चुकाने के लिए भी अपने आईपीओ लाती है ताकि उन पैसो का उपयोग कम्पनी के उपर जो लोन है उसे चुकाया जा सके |

3) शुरुवाती निवेशकों को बाहर निकलने का रास्ता देने के लिए - जब कंपनी छोटी होती है उस वक्त कई ऐसे बड़े - बड़े इन्वेस्टर्स होते है जो कम्पनी में अपना पैसा लगाये होते है उन सभी इन्वेस्टर्स को EXIT दिलाने के लिए भी कम्पनी आईपीओ लाती है, क्योकि कम्पनी के पास अपने शेयर को वापस खरीदने के लिए buyback करने के लिए पैसा नहीं होता है तो वह पब्लिक को आईपीओ के जरिये शेयर्स ऑफर करती है और उनसे पैसे इकठ्ठा करती है |

आईपीओ में पैसा कैसे लगायें (IPO me Paisa Kaise Lagaye)

जब भी किसी कंपनी का आईपीओ आता है तो उस कम्पनी के शेयर्स को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करना होता है | यह एक बहुत लम्बा प्रोसेस होता है जिसमे तीन से चार महीनें या उससे भी अधिक समय लग जाता है |

किसी कम्पनी का आईपीओ जब आता है तो उसे पब्लिक के द्वारा खरीदने के लिए दो - चार दिन का निश्चित समय रखा जाता है जिसमें कोई भी अलग - अलग माध्यम से शेयर ब्रोकर या बैंक आदि के द्वारा ख़रीदा या अप्लाई किया जा सकता है |

जब आप किसी भी IPO में अप्लाई करते है उसके बाद आपको आईपीओ में अलोटमेंट मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती है | आईपीओ अलोटमेंट का प्रोसेस अलग तरीके से किया जाता है कई बार आपको आईपीओ में अलोटमेंट मिल जाता है, कई बार अलोटमेंट नही मिलता है यह सारा चीज निर्भर करता है कि आईपीओ में कितना सब्सक्रिप्शन यानि कि कितने लोगों ने अप्लाई किया |

अगर आईपीओ में ज्यादा लोग अप्लाई करते है तो उस कंडीशन में आईपीओ अलोटमेंट मिलने का चांस बहुत कम होता है क्योंकि बहुत सारे ने अप्लाई किया है इसलिए अलोटमेंट किसी के भी खाते में जा सकता है |

यह सब एक लाटरी सिस्टम के माध्यम से होता है जिसमे जिसका नाम आता है उसी को अलोटमेंट मिलता है |आईपीओ सब्सक्राइब, आईपीओ अलोटमेंट, आईपीओ लिस्टिंग किस दिन होगा यह पहले से ही तय होता है |

 आईपीओ अलोटमेंट प्रोसेस पूरा होने के बाद फाइनल डे आता है जिस दिन कम्पनी के शेयर्स स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होता है और फिर लिस्ट होने के बाद शेयर्स को कोई भी स्टॉक एक्सचेंज से शेयर ब्रोकर के माध्यम से खरीद व बेच सकता है |

पीई रेश्यो क्या है | | PE Ratio in Hindi | Price Earnings Ratio in Hindi | पीई रेश्यो कैसे निकाले और इसका सही प्रयोग कैसे करें

अक्तूबर 09, 2021
 शेयर बाजार की बात हो और PE Ratio का जिक्र न हो ऐसा हो नही सकता है क्योंकि PE Ratio एक इन्वेस्टर के लिए बहुत काम ही काम की चीज है | तो चलिए जानते है पीई रेश्यो क्या है ? पीई रेश्यो कैसे निकाले ? और इसका सही से प्रयोग कैसे करते है | 

What is PE Ratio in Hindi

पीई रेश्यो क्या है (PE Ratio Kya Hai)

अगर आप दो कंपनी के शेयरों या दो इंडस्ट्री या दो देशों के बाजारों की तुलना करना चाहते है तो PE Ratio बहुत ही काम का है।

PE Ratio का पूरा नाम Price Earnings Ratio है | यह सबसे पोपुलर रेश्यो है  | पीई रेश्यो से यह पता चलता है कि एक इन्वेस्टर किसी कंपनी का शेयर खरीदनें के लिए उस कंपनी की कमाई से कितना गुना अधिक पैसा देना चाहता है |

इसके अतिरिक्त पीई रेश्यो से कोई कंपनी का शेयर सस्ता है या महंगा पता लगाया जा सकता है | इसी कारण से PE रेश्यो का प्रयोग इन्वेस्टर अधिक करते है | आइये देखते है कि पीई रेश्यो निकलता कैसे है ?

पीई रेश्यो कैसे निकाले  (PE Ratio Kaise Nikale)

पीई रेश्यो निकालने के लिए हमें कंपनी का ईपीएस (EPS) पता होना आवश्यक है | ईपीएस की मदद से ही हम किसी कंपनी का पीई रेश्यो निकाल सकते है | इसका फार्मूला इस प्रकार है -

Market Price / EPS = PE Ratio 
शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय = पीई रेश्यो

हम किसी भी कम्पनी का PE रेश्यो तब तक नहीं जान सकते है जब तक हम उस कंपनी का EPS नही जान लेते है|

आइये उदहारण की सहायता से इसे समझने का प्रयास करे , एक कंपनी JKL है जिसके 10 लाख शेयर है | कंपनी JKL को वर्ष 2050 में  20 लाख का नेट प्रॉफिट(शुद्ध लाभ ) हुआ | इस कम्पनी JKL का शेयर की बाजार में कीमत 40 रूपयें है | तो इसका ईपीएस क्या होगा -


EPS = 20 लाख / 10 लाख = 2 रूपये


इस प्रकार कंपनी JKL का ईपीएस 2 रूपयें है, चलिए अब हम इसका पीई रेश्यो निकालते है -


PE Ratio = JKL का शेयर मूल्य 40 रूपये  / JKL का EPS 2 रूपये = 20


यहाँ पर कंपनी JKL का पीई रेश्यो 20 निकलकर आता है | इसका मतलब यह है कि इन्वेस्टर्स प्रति शेयर 2 रूपयें कमाने के लिए 20 गुना ज्यादा पैसे देने को तैयार है |

नोट : किसी भी कंपनी का ईपीएस उस कंपनी के नेट प्रॉफिट से निकलता है जो कम या ज्यादा हो सकता है | किसी भी कंपनी का पीई रेश्यो कंपनी के ईपीएस व कंपनी के शेयर की कीमत से निकलता है जो कम या ज्यादा हो सकता है |  

पीई रेश्यो का सही प्रयोग कैसे करे (PE Ratio ka Sahi Use Kaise Kare)

PE Ratio का प्रयोग कर हम किसी कंपनी के ग्रोथ बढ़ने या घटने का अंदाजा भी लगा सकते है | इसके लिए कम्पनी के पिछलें कुछ सालों का रिकॉर्ड देखियें और पता करे कि मैक्सिमम PE कितना था उसके बाद पुरे इंडस्ट्री के औसत PE को पता करे और अंत में पुरे बाजार का औसत PE पता करके एक दुसरे से तुलना करे |

ध्यान रखने वाली बात (Points to Remember)

  • कभी भी केवल PE रेश्यो को ही देखकर निवेश न करे
  • पूरी कंपनी व बिज़नेस की फंडामेंटल एनालिसिस करे 
  • PE दिखाता है कि कोई शेयर सस्ता या महंगा ट्रेड हो रहा है 
  • ज्यादातर लोग 21 से ज्यादा PE वाले स्टॉक पर इन्वेस्ट नही करते

EPS Full Form -EPS क्या होता है | EPS in Hindi

अक्तूबर 09, 2021
शेयर बाजार से किसी कंपनी का शेयर खरीदनें से पहले हम ईपीएस जरुर देखते है तो यह ईपीएस क्या है और ईपीएस जानना एक इन्वेस्टर के लिए इतना जरुरी क्यों है | आइये इस पोस्ट के माध्यम से जानते है कि ईपीएस क्या है |
 
What is eps in hindi

ईपीएस क्या है (EPS Full Form in Hindi )

किसी भी कंपनी का ईपीएस उसका सबसे महत्वपूर्ण फाइनेंसियल रेश्यो है जो कंपनी के प्रॉफिट को एनालिसिस करने में मदद करता है | EPS का Full Form - इसका पूरा नाम Earnings Per Share होता है, किसी भी कंपनी का हर शेयर पर कितना प्रॉफिट हो रहा है यह जानने के लिए हम उस कंपनी का EPS देखतें है | इससे हम किसी भी कम्पनी का तिमाही, वार्षिक ग्रोथ का अंदाजा लगा सकते है |

ईपीएस कैसे निकालें (EPS Kaise Nikale)

किसी भी कंपनी का EPS हम आसानी से निकाल सकते है इसके लिए सबसे पहले हमें कंपनी का तिमाही या वार्षिक नेट प्रॉफिट का पता होना आवश्यक है और फिर कंपनी के टोटल शेयर्स से भगित कर देना है |

शुद्ध लाभ / कुल शेयरों की संख्या
Net Profit / Total Number of Shares

आइये इसे एक उदाहरण लेकर समझते है मान लीजिये एक कंपनी है ABC जिसका कुल 1 लाख शेयर है | कंपनी ABC वर्ष 2021-22 में 40 लाख रूपयें का नेट प्रॉफिट कमाती है तो कंपनी ABC को हर शेयर में कितनी कमाई होती है या कंपनी ABC का ईपीएस क्या होगा -

वर्ष 2021-22 का EPS = 40 लाख रूपयें / 1 लाख शेयर = 40 रुपयें

यहाँ पर कंपनी ABC का ईपीएस वर्ष 2021-22 में 40 रूपयें आया है मतलब कंपनी ABC को अपने हर शेयर पर 40 रूपये की कमाई हुई | किसी कंपनी भी  का ईपीएस जितना अधिक होता है, यह उस कंपनी में पैसे लगाने वाले इन्वेस्टर के लिए बहुत अच्छा है |

ईपीएस कम या ज्यादा होता सकता है और यह कंपनी के नेट प्रॉफिट पर निर्भर करता है | अगर कंपनी को किसी वर्ष अधिक प्रॉफिट होता है तो उसका ईपीएस बढ़ जाता है वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट घटने से ईपीएस भी घट जाता है |

जैसे अगर वर्ष 2022-23 में कंपनी ABC बिज़नस अच्छे से नहीं होता है, और कंपनी ABC केवल 20 लाख रूपये ही नेट प्रॉफिट कमा पाती है तो कंपनी का ईपीएस भी कम हो जाएगा -

वर्ष 2022-23 का EPS = 20 लाख / 1 लाख = 20 रुपयें

नोट:  हमने देखा कि किस तरह से एक कंपनी का ईपीएस या अर्निंग्स पर शेयर,  कंपनी के Net profit में उतार चढ़ाव के साथ घटता-बढ़ता है | 


किसी कंपनी का ईपीएस ज्यादा होना एक अच्छा संकेत होता है, क्योकिं कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर जितना ज्यादा होता है इससे इन्वेस्टर्स को उतना ही ज्यादा फायदा होता है | लेकिन जब भी किसी कंपनी का एनालिसिस करना हो तो हमें केवल और केवल ईपीएस ही नहीं देखना चाहिए , ईपीएस के अलावा और भी कई सारे फैक्टर्स को देखकर ही हमें इन्वेस्टमेंट करना चाहिए |

आईपीओ अलोटमेंट कैसे होता है | IPO Allotment in Hindi

अक्तूबर 05, 2021 Add Comment
क्या आप जानते है IPO Allotment कैसे होता है? IPO में बिड्स लगाने वाले इन्वेस्टर्स कौनसे केटेगरी के होते है? और आप IPO में Allotment पाने का मौका कैसे बढ़ा सकते है?

IPO Allotment Process in Hindi

आईपीओ क्या है? (IPO Kya Hai) 

जब पहली बार एक कंपनी अपना शेयर पब्लिक के लिए लाती है, स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराती है तो उसे Initial Public Offering (IPO) कहा जाता है |

अगर कंपनी अच्छी होती है तो लिस्टिंग के दिन निवेशको को फायदा होता है इसलिए ज्यादातर इन्वेस्टर्स IPO में अप्लाई करते है |

IPO में अप्लाई करने वाले निवेशको को तीन केटेगरी में रखा गया है-
  • क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Qualified Institutional Investors)
  • नॉन इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Non-Institutional Investors)
  • रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors)

Qualified Institutional Investors

ये ऐसे ऑर्गेनाइजेशन या इंस्टिट्यूशन होते है जो पब्लिक के लिए, या इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए निवेश करते है |

इनके पास निवेश करने के लिए बहुत ज्यादा पैसे होते है | IPO में इनके लिए 50% रिज़र्व कोटा होता है |

Qualified Institutional Investors के उदाहारण म्यूच्यूअल फण्ड, इन्शुरन्स कंपनी आदि है|

Non-Institutional Investors

ये ऐसे इंडिविजुअल्स होते है जो IPO में 2 लाख से अधिक का बिड लगाते है | इन्हें हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स भी कहा जाता है |

 इनके लिए आईपीओ में रिज़र्व कोटा 15% होता है |

Retail Investors

ऐसे निवेशक जो IPO में 10 हजार से 2 लाख रूपये तक का बिड लगाते है वे रिटेल इन्वेस्टर्स की केटेगरी में आते है |

अगर आप 2 लाख से अधिक का बिड करते है तो आपको Non-Institutional Investors से अप्लाई करना होता है |

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए आईपीओ में 35% रिज़र्व कोटा होता है |

आईपीओ अलोटमेंट कैसे होता है  (IPO Allotment Kaise Hota Hai)

अगर आपने आईपीओ में अप्लाई किया है तो आपको पता होगा कि हम लोग आईपीओ में 4, 10, 18 शेयर्स नही खरीद सकते है बल्कि हमे कम्पनियों के द्वारा निर्धारित किया गया शेयर्स खरीदने होते है |

 ये शेयर्स कंपनिया lot में रखती है जैसे 1 lot = 50 शेयर, 100, 300, 400 आदि | सेबी के रूल्स के अनुसार एक lot की कीमत 10 हजार से 15 हजार के बीच होती है |

IPO Undersubscription

अगर जितने lots है उनसे कम मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO अंडरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | IPO अंडरसब्सक्रिप्शन के कंडिशन में इन्वेस्टर्स को उनके बोली में फुल शेयर मिलते है |

IPO Oversubscription

अगर जितने lots है उनसे ज्यादा मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO ओवरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | ओवरसब्सक्रिप्शन भी दो प्रकार से हो सकते है |

कम लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब कम लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड हो जाता है तो सभी अप्लाई करने वालो को 1 lot मिलते है |

उदाहरण- एक कम्पनी ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 18000 इन्वेस्टर्स ने IPO में अप्लाई किया तो ऐसे में 18000 निवेशको को 1 lot दिए जायेंगे |

अब 2000 lots को उन निवेशको के बीच बाँट दिया जायेगा जिन्होंने 1 lot से अधिक की बोली लगाई थी |

ज्यादा लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब ज्यादा लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो इस कंडिशन में शेयर्स का बंटवारा lots का ड्रा करते है मलतब लाटरी होता है |

उदाहरण- कम्पनी  ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 1 लाख इन्वेस्टर्स ने शेयर्स के lot के लिए अप्लाई किया है तो ऐसे में केवल 20000 निवेशको को lots मिल पाएंगे |

अब ये 20000 इन्वेस्टर्स कौन होंगे ये कंप्यूटर आधारित लाटरी से निकाला जायेगा | कंप्यूटर आधारित लाटरी से सभी निवेशको को शेयर पाने का बराबर मौका मिलता है व lots किसको मिलेगा ये उनके भाग्य पर निर्भर करता है |

आईपीओ अलोटमेंट का चांस कैसे बढायें (IPO Allotment Ka Chance Kaise Badhaye)

आईपीओ में शेयर पाने के चान्स को बढ़ाने के लिए आपको केवल दो आसान काम करने है -

पहला - अपने एप्लीकेशन फॉर्म को कम्पलीट व सही तरीके से भरे |

दूसरा - हमेशा cut-off प्राइस पर अप्लाई करे | cut-off प्राइस , आईपीओ इशू प्राइस का हाई प्राइस होता है |

नोट: अगर आईपीओ ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो आपको एक भी lot मिलेगा इसकी कोई गारंटी नही होती है | आपको शेयर मिलेगा या नही ये आपके भाग्य पर निर्भर है |