डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है | Debt To Equity Ratio

क्या आप जानते है डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है? और निवेशकों को यह रेश्यो क्यों चेक करना चाहिए ? कोई भी कंपनी जब ज्यादा मात्रा में डेब्ट लेकर बिज़नस के लिए अपना ऑपरेशन करती है तो यह बहुत रिस्की हो सकता है क्योकि इकोनॉमिक डाउनटर्न में रेवेन्यू व प्रॉफिट कम हो जाती है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से यह आसानी से पता किया जा सकता है कि कोई बिज़नस में कितना डेब्ट/ उधार लिया गया है जिससे बिज़नस का ऑपरेशन परफॉर्म किया जा रहा है |
Debt To Equity Ratio

Debt To Equity Ratio क्या है?

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो एक लिवरेज रेश्यो (Leverage ratio) है | लिवरेज रेश्यो का प्रयोग कंपनी के द्वारा उपयोग में लाये गये उधार को एनालिसिस करने के लिए किया जाता है |

किसी बिज़नस को बहुत अधिक लोन/उधार लेकर चलाने से बिज़नस के परफॉर्मेंस कम होने पर, उधार देने वाले को पैसा न दे पाने पर कंपनी दिवालिया हो जाता है |

अगर बिज़नस को केवल ज्यादा उधार लेकर चलाया जाता है या उधार के पैसे से मशीन, प्लांट्स आदि बनाये जाते है तो यह बहुत रिस्की हो जाता है अगर कम्पनी अपने मशीन व प्लांट्स से प्रॉफिट नही ला पाती है क्योकिं ऐसे में उधार का ब्याज (फाइनेंसियल चार्ज ) देने ही पढ़ते है |

इसलिए इन्वेस्टर को ऐसे बिज़नस में इन्वेस्ट करने को लेकर सतर्क रहना चाहिए | इन्वेस्टर को एक बिज़नस में इन्वेस्ट या निवेश करना चाहिए या नही इसें डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से पता करना चाहिए |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो = लॉन्ग टर्म डेब्ट / नेट वर्थ

उदाहरण 1:

= 500 करोड़ / 100 करोड़

= 5x

यहाँ पर कंपनी 500 करोड़ उधार व 100 करोड़ खुद के पैसे से बिज़नस कर रही है और इसलिए यह बहुत ही रिस्की हो सकता है क्योकिं डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 5x है | और इस तरह की कंपनियों से आपको बचकर रहना चाहिए |

उदाहरण 2:

= 100 करोड़ / 100 करोड़

= 1x

अगर कंपनी खुद के 100 करोड़ व उधार के 100 करोड़ से काम करती है तो डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 है | डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 या 1 से कम हो तो अच्छा है, पर यह भी निर्भर करता है कि कंपनी का ट्रैक रिकार्ड, कैपिटल की जरुरत कैसा/कितना है |


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