IPO में Shares का Allotment कैसे होता है | Initial Public Offering (IPO) Share Allotment Process Hindi

क्या आप जानते है IPO में Shares Allotment कैसे होता है? IPO में बिड्स लगाने वाले इन्वेस्टर्स कौनसे केटेगरी के होते है? और आप IPO में Shares का  Allotment पाने का मौका कैसे बढ़ा सकते है?

Initial Public Offering (IPO) क्या है?

जब पहली बार एक कंपनी अपना शेयर पब्लिक के लिए लाती है, स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराती है तो उसे Initial Public Offering (IPO) कहा जाता है |

अगर कंपनी अच्छी होती है तो लिस्टिंग के दिन निवेशको को फायदा होता है इसलिए ज्यादातर इन्वेस्टर्स IPO में अप्लाई करते है |

IPO में अप्लाई करने वाले निवेशको को तीन केटेगरी में रखा गया है-
  • क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Qualified Institutional Investors)
  • नॉन इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Non-Institutional Investors)
  • रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors)

Qualified Institutional Investors

ये ऐसे ऑर्गेनाइजेशन या इंस्टिट्यूशन होते है जो पब्लिक के लिए, या इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए निवेश करते है |

इनके पास निवेश करने के लिए बहुत ज्यादा पैसे होते है | IPO में इनके लिए 50% रिज़र्व कोटा होता है |

Qualified Institutional Investors के उदाहारण म्यूच्यूअल फण्ड, इन्शुरन्स कंपनी आदि है|

Non-Institutional Investors

ये ऐसे इंडिविजुअल्स होते है जो IPO में 2 लाख से अधिक का बिड लगाते है | इन्हें हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स भी कहा जाता है |

 इनके लिए आईपीओ में रिज़र्व कोटा 15% होता है |

Retail Investors

ऐसे निवेशक जो IPO में 10 हजार से 2 लाख रूपये तक का बिड लगाते है वे रिटेल इन्वेस्टर्स की केटेगरी में आते है |

अगर आप 2 लाख से अधिक का बिड करते है तो आपको Non-Institutional Investors से अप्लाई करना होता है |

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए आईपीओ में 35% रिज़र्व कोटा होता है |



कंपनीज शेयर कैसे बाँटती है (How Companies allot shares)

अगर आपने आईपीओ में अप्लाई किया है तो आपको पता होगा कि हम लोग आईपीओ में 4, 10, 18 शेयर्स नही खरीद सकते है बल्कि हमे कम्पनियों के द्वारा निर्धारित किया गया शेयर्स खरीदने होते है |

 ये शेयर्स कंपनिया lot में रखती है जैसे 1 lot = 50 शेयर, 100, 300, 400 आदि | सेबी के रूल्स के अनुसार एक lot की कीमत 10 हजार से 15 हजार के बीच होती है |

IPO Undersubscription

अगर जितने lots है उनसे कम मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO अंडरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | IPO अंडरसब्सक्रिप्शन के कंडिशन में इन्वेस्टर्स को उनके बोली में फुल शेयर मिलते है |

IPO Oversubscription

अगर जितने lots है उनसे ज्यादा मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO ओवरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | ओवरसब्सक्रिप्शन भी दो प्रकार से हो सकते है |

कम लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब कम लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड हो जाता है तो सभी अप्लाई करने वालो को 1 lot मिलते है |

उदाहरण- एक कम्पनी ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 18000 इन्वेस्टर्स ने IPO में अप्लाई किया तो ऐसे में 18000 निवेशको को 1 lot दिए जायेंगे |

अब 2000 lots को उन निवेशको के बीच बाँट दिया जायेगा जिन्होंने 1 lot से अधिक की बोली लगाई थी |

ज्यादा लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब ज्यादा लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो इस कंडिशन में शेयर्स का बंटवारा lots का ड्रा करते है मलतब लाटरी होता है |

उदाहरण- कम्पनी  ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 1 लाख इन्वेस्टर्स ने शेयर्स के lot के लिए अप्लाई किया है तो ऐसे में केवल 20000 निवेशको को lots मिल पाएंगे |

अब ये 20000 इन्वेस्टर्स कौन होंगे ये कंप्यूटर आधारित लाटरी से निकाला जायेगा | कंप्यूटर आधारित लाटरी से सभी निवेशको को शेयर पाने का बराबर मौका मिलता है व lots किसको मिलेगा ये उनके भाग्य पर निर्भर करता है |

IPO में shares पाने का chance कैसे बढ़ायें?

आईपीओ में शेयर पाने के चान्स को बढ़ाने के लिए आपको केवल दो आसान काम करने है -

पहला - अपने एप्लीकेशन फॉर्म को कम्पलीट व सही तरीके से भरे |

दूसरा - हमेशा cut-off प्राइस पर अप्लाई करे | cut-off प्राइस , आईपीओ इशू प्राइस का हाई प्राइस होता है |

नोट: अगर आईपीओ ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो आपको एक भी lot मिलेगा इसकी कोई गारंटी नही होती है | आपको शेयर मिलेगा या नही ये आपके भाग्य पर निर्भर है |

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