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IPO में Shares का Allotment कैसे होता है | Initial Public Offering (IPO) Share Allotment Process Hindi

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क्या आप जानते है IPO में Shares Allotment कैसे होता है? IPO में बिड्स लगाने वाले इन्वेस्टर्स कौनसे केटेगरी के होते है? और आप IPO में Shares का  Allotment पाने का मौका कैसे बढ़ा सकते है?

Initial Public Offering (IPO) क्या है?

जब पहली बार एक कंपनी अपना शेयर पब्लिक के लिए लाती है, स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराती है तो उसे Initial Public Offering (IPO) कहा जाता है |

अगर कंपनी अच्छी होती है तो लिस्टिंग के दिन निवेशको को फायदा होता है इसलिए ज्यादातर इन्वेस्टर्स IPO में अप्लाई करते है |

IPO में अप्लाई करने वाले निवेशको को तीन केटेगरी में रखा गया है-
  • क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Qualified Institutional Investors)
  • नॉन इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Non-Institutional Investors)
  • रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors)

Qualified Institutional Investors

ये ऐसे ऑर्गेनाइजेशन या इंस्टिट्यूशन होते है जो पब्लिक के लिए, या इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए निवेश करते है |

इनके पास निवेश करने के लिए बहुत ज्यादा पैसे होते है | IPO में इनके लिए 50% रिज़र्व कोटा होता है |

Qualified Institutional Investors के उदाहारण म्यूच्यूअल फण्ड, इन्शुरन्स कंपनी आदि है|

Non-Institutional Investors

ये ऐसे इंडिविजुअल्स होते है जो IPO में 2 लाख से अधिक का बिड लगाते है | इन्हें हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स भी कहा जाता है |

 इनके लिए आईपीओ में रिज़र्व कोटा 15% होता है |

Retail Investors

ऐसे निवेशक जो IPO में 10 हजार से 2 लाख रूपये तक का बिड लगाते है वे रिटेल इन्वेस्टर्स की केटेगरी में आते है |

अगर आप 2 लाख से अधिक का बिड करते है तो आपको Non-Institutional Investors से अप्लाई करना होता है |

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए आईपीओ में 35% रिज़र्व कोटा होता है |



कंपनीज शेयर कैसे बाँटती है (How Companies allot shares)

अगर आपने आईपीओ में अप्लाई किया है तो आपको पता होगा कि हम लोग आईपीओ में 4, 10, 18 शेयर्स नही खरीद सकते है बल्कि हमे कम्पनियों के द्वारा निर्धारित किया गया शेयर्स खरीदने होते है |

 ये शेयर्स कंपनिया lot में रखती है जैसे 1 lot = 50 शेयर, 100, 300, 400 आदि | सेबी के रूल्स के अनुसार एक lot की कीमत 10 हजार से 15 हजार के बीच होती है |

IPO Undersubscription

अगर जितने lots है उनसे कम मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO अंडरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | IPO अंडरसब्सक्रिप्शन के कंडिशन में इन्वेस्टर्स को उनके बोली में फुल शेयर मिलते है |

IPO Oversubscription

अगर जितने lots है उनसे ज्यादा मात्रा में शेयर खरीदने की बोली आती है तो IPO ओवरसब्सक्राइब्ड माना जाता है | ओवरसब्सक्रिप्शन भी दो प्रकार से हो सकते है |

कम लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब कम लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड हो जाता है तो सभी अप्लाई करने वालो को 1 lot मिलते है |

उदाहरण- एक कम्पनी ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 18000 इन्वेस्टर्स ने IPO में अप्लाई किया तो ऐसे में 18000 निवेशको को 1 lot दिए जायेंगे |

अब 2000 lots को उन निवेशको के बीच बाँट दिया जायेगा जिन्होंने 1 lot से अधिक की बोली लगाई थी |

ज्यादा लोगो ने आईपीओ में अप्लाई किया - जब ज्यादा लोग IPO में अप्लाई करते है और IPO ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो इस कंडिशन में शेयर्स का बंटवारा lots का ड्रा करते है मलतब लाटरी होता है |

उदाहरण- कम्पनी  ने शेयर्स के 20000 lots ऑफर किये है लेकिन 1 लाख इन्वेस्टर्स ने शेयर्स के lot के लिए अप्लाई किया है तो ऐसे में केवल 20000 निवेशको को lots मिल पाएंगे |

अब ये 20000 इन्वेस्टर्स कौन होंगे ये कंप्यूटर आधारित लाटरी से निकाला जायेगा | कंप्यूटर आधारित लाटरी से सभी निवेशको को शेयर पाने का बराबर मौका मिलता है व lots किसको मिलेगा ये उनके भाग्य पर निर्भर करता है |

IPO में shares पाने का chance कैसे बढ़ायें?

आईपीओ में शेयर पाने के चान्स को बढ़ाने के लिए आपको केवल दो आसान काम करने है -

पहला - अपने एप्लीकेशन फॉर्म को कम्पलीट व सही तरीके से भरे |

दूसरा - हमेशा cut-off प्राइस पर अप्लाई करे | cut-off प्राइस , आईपीओ इशू प्राइस का हाई प्राइस होता है |

नोट: अगर आईपीओ ओवरसब्सक्राइब्ड होता है तो आपको एक भी lot मिलेगा इसकी कोई गारंटी नही होती है | आपको शेयर मिलेगा या नही ये आपके भाग्य पर निर्भर है |

सेबी क्या है - SEBI के प्रमुख काम क्या है | What is SEBI in Hindi

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क्या आप जानते है सेबी क्या है ? और SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया क्या काम करता है ? तो चलिए जानते है सेबी (SEBI) क्या है और सेबी के प्रमुख कार्य क्या है?
What is SEBI in Hindi

सेबी क्या है (What is SEBI)

SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया या भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड सब एक ही नाम है | सेबी की जिम्मेदारी भारतीय पूंजी बाजार को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करना, निवेशकों के इंटरेस्ट को बनाये रखना है |

सेबी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए कई रूल्स और रेगुलेशन बनाता है ताकि सभी मार्केट प्रतिभागी उन नियमो का पालन करे व धोखाधड़ी, स्कैम्स आदि को रोककर मार्केट को सुचारू रूप से चलाया जाये तथा कैपिटल मार्केट का डेवलपमेंट किया जाए |

सेबी का गठन 12 अप्रैल, 1992 को, सेबी एक्ट 1992 के तहत हुआ था, और इसका मुख्यालय (हेडक्वार्टर) मुंबई में है |

SEBI के प्रमुख काम क्या है?

सेबी मार्केट को रेगुलेट करता है और मार्केट के डेवलपमेंट के लिए, बेहतर बनाने के लिए SEBI हमेशा काम रहता है- सेबी के कुछ प्रमुख काम निम्न है -

  • कैपिटल मार्केट का विकास करना व निवेशको के इंटरेस्ट की रक्षा करना
  • स्टॉक एक्सचेंजों (NSE,BSE) आदि को रेगुलेट करना
  • अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस यानि अनुचित तरीकें से लेनदेन को रोकना
  • मार्केट से जुड़े लोगो की शिक्षा को बढ़ाने के लिए कदम उठाना
  • कॉर्पोरेट के अंडर होने वाले इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना

इन सारे कामों को करने के लिए सेबी को सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नही है क्योकिं सेबी एक ऐसी संस्था है इसे सेबी एक्ट 1992 के तहत अधिकार मिले है |


निवेश के लिए स्टॉक्स कैसे खोजें | How to Generate Stock Ideas

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एक अच्छा इन्वेस्टमेंट आपको सफल इन्वेस्टर व धनवान बना सकता है लेकिन इसके लिए आपको एक अच्छा स्टॉक खोजना बहुत जरुरी है क्योकिं एक अच्छी क्वालिटी वाला स्टॉक ही बेहतर आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है |
क्या निवेश के लिए अच्छे स्टॉक खोजे जा सकते है ? अगर हाँ तो निवेश के लिए स्टॉक कैसे खोजें |
How to Generate Stock Ideas

How to Generate Stock Ideas ?

हमारे आसपास इतने सारे क्वालिटी वाले स्टॉक होने के बावजूद भी हम सब एक अच्छे स्टॉक को सेलेक्ट नही कर पाते है और जिसकी वजह से हम धन क्रिएट(बनाने) करने का एक अच्छा अवसर खो देते है |

तो चलिए जानते है कि ऐसे कौन से तरीके है जिससे निवेश के लिए एक अच्छा स्टॉक खोज सकते है |

रोजाना चीजों को देखना

हमारे आसपास ऐसे बहुत से क्वालिटी स्टॉक होते है और कंपनी का प्रोडक्ट भी बहुत ही जबरदस्त होता है जिसे हम अक्सर प्रयोग भी करते है लेकिन एक निवेशक की नज़र से हम कभी भी इन प्रोडक्ट्स / सामान को नही देखते है |

अब से जब भी आप किसी प्रोडक्ट/सामान का प्रयोग करते है तो एक बार अपने आप से सवाल पूछना है कि क्या यह सामान बनाने वाली कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है ? अगर कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है तो आपको उसके रेवेन्यू व प्रॉफिट और बिज़नस के अन्य चीजों को जरुर चेक करना चाहिए |


क्षमता का दायरा

अगर आप किसी कम्पनी में काम कर रहे है तो उस कंपनी के बारे में, उस कंपनी के इंडस्ट्री के बारे में अच्छी जानकारी होती है |

मान लीजिये आप आईटी कंपनी में जॉब करते है तो आपको IT कंपनी के काम काज के बारे में अच्छे से मालूम होगा और आप आईटी कंपनी को अच्छे से एनालिसिस कर सकते है |

एक नये निवेशक के लिए अपने क्षमता के दायरे में स्टॉक चुनना अच्छा होता है | आपके क्षमता का दायरा किसी भी इंडस्ट्री का हो सकता है | जैसेः बैंकिंग और फाइनेंस, एग्रीकल्चर, आईटी आदि |

न्यूज़पेपर, मैगज़ीन, टीवी

टीवी, मैगज़ीन, न्यूज़ पेपर भी एक क्वालिटी वाले स्टॉक को चुनने में आपकी मदद कर सकते है जैसे अगर एक कम्पनी के सीईओ, चेयरमैन टीवी में या न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू देते है तो आपको उस कंपनी के बारे में बहुत कुछ पता चलता है |

फिर भी एक निवेशक के रूप में आपको टीवी पर आने वाले इंटरव्यू के माध्यम से ही किसी स्टॉक को नहीं चुनना चाहिये बल्कि इसे एक स्टॉक आईडिया के रूप में देखना चाहिए और जिस कंपनी के मैनेजमेंट ने इंटरव्यू दिया है उस कंपनी का अच्छे से एनालिसिस करना चाहिए |

एक निवेशक के तौर पर यह जिम्मेदारी आपकी है कि आप अपने पैसे को सावधानी से, व समझदारी से निवेश करें |

अपने आँख और कान हमेशा खुले रखें क्योकिं निवेश करने के लिए एक स्टॉक आईडिया आपको कही से भी मिल सकता है | कोई प्रोडक्ट, कोई समाचार, कोई इंटरव्यू, या फिर आपका कोई दोस्त व फैमिली मेम्बर भी स्टॉक आईडिया दे सकते है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है | Debt To Equity Ratio

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क्या आप जानते है डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है? और निवेशकों को यह रेश्यो क्यों चेक करना चाहिए ? कोई भी कंपनी जब ज्यादा मात्रा में डेब्ट लेकर बिज़नस के लिए अपना ऑपरेशन करती है तो यह बहुत रिस्की हो सकता है क्योकि इकोनॉमिक डाउनटर्न में रेवेन्यू व प्रॉफिट कम हो जाती है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से यह आसानी से पता किया जा सकता है कि कोई बिज़नस में कितना डेब्ट/ उधार लिया गया है जिससे बिज़नस का ऑपरेशन परफॉर्म किया जा रहा है |
Debt To Equity Ratio

Debt To Equity Ratio क्या है?

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो एक लिवरेज रेश्यो (Leverage ratio) है | लिवरेज रेश्यो का प्रयोग कंपनी के द्वारा उपयोग में लाये गये उधार को एनालिसिस करने के लिए किया जाता है |

किसी बिज़नस को बहुत अधिक लोन/उधार लेकर चलाने से बिज़नस के परफॉर्मेंस कम होने पर, उधार देने वाले को पैसा न दे पाने पर कंपनी दिवालिया हो जाता है |

अगर बिज़नस को केवल ज्यादा उधार लेकर चलाया जाता है या उधार के पैसे से मशीन, प्लांट्स आदि बनाये जाते है तो यह बहुत रिस्की हो जाता है अगर कम्पनी अपने मशीन व प्लांट्स से प्रॉफिट नही ला पाती है क्योकिं ऐसे में उधार का ब्याज (फाइनेंसियल चार्ज ) देने ही पढ़ते है |

इसलिए इन्वेस्टर को ऐसे बिज़नस में इन्वेस्ट करने को लेकर सतर्क रहना चाहिए | इन्वेस्टर को एक बिज़नस में इन्वेस्ट या निवेश करना चाहिए या नही इसें डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से पता करना चाहिए |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो = लॉन्ग टर्म डेब्ट / नेट वर्थ

उदाहरण 1:

= 500 करोड़ / 100 करोड़

= 5x

यहाँ पर कंपनी 500 करोड़ उधार व 100 करोड़ खुद के पैसे से बिज़नस कर रही है और इसलिए यह बहुत ही रिस्की हो सकता है क्योकिं डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 5x है | और इस तरह की कंपनियों से आपको बचकर रहना चाहिए |

उदाहरण 2:

= 100 करोड़ / 100 करोड़

= 1x

अगर कंपनी खुद के 100 करोड़ व उधार के 100 करोड़ से काम करती है तो डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 है | डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 या 1 से कम हो तो अच्छा है, पर यह भी निर्भर करता है कि कंपनी का ट्रैक रिकार्ड, कैपिटल की जरुरत कैसा/कितना है |


शेयर बाजार कैसे काम करता है | ऊपर-नीचें क्यों होता है स्टॉक प्राइस | How Share Market Works in Hindi

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क्या आप जानते है शेयर बाजार कैसे काम करता है? (How Share Market Works) स्टॉक मार्केट में प्राइस कैसे बदलता रहता है ? कौन सी वजह के कारण स्टॉक प्राइस ऊपर जाता है और कौन से फैक्टर के स्टॉक प्राइस नीचें जाता है ? तो चलिए जानते है आखिर कौन Stock market को चलाता है |
How Share Market Works in Hindi

शेयर बाजार कैसे काम करता है? (How Share Market Works)

जब स्टॉक प्राइस घटता या बढ़ता है तो इससे ट्रेडर/इन्वेस्टर को घाटा व फायदा होता है इसलिए ट्रेडर/इन्वेस्टर कंपनियों के शेयर को खरीदते व बेचते है |

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जो सायकल बनाने का बिज़नस करती है और जिसका तिमाही रिजल्ट आज आने वाली है | तो अब आप ABC के शेयर खरीदेंगे या बेचेंगे ?

मुझे यकीन है आप रिजल्ट के आने का इंतजार कर सकते है और अन्य मार्केट प्रतिभागी भी क्योकिं स्टॉक मार्केट में ऐसे होने वाले इवेंट्स ही शेयर के दाम को घटाने व बढ़ाने का समाचार देते है |

चलिए देखतें है आज आने वाला तिमाही रिजल्ट के आधार पर शेयर का दाम कैसे घटेगा या बढ़ेगा|

कंडीशन 1:

कंपनी ABC का रिजल्ट ख़राब आया, कंपनी ने प्रॉफिट न करके नुकसान उठाया | अब ऐसे में यह नेगेटिव खबर पूरे जगह फैलती है और सभी निवेशक/ट्रेडर अगले दिन इस कम्पनी के स्टॉक को बेचने लगते है क्योकिं कम्पनी को घाटा हुआ है |

अब नियम कहता है कि जब ज्यादा लोग बेचने वाले हो जाते है तो किसी भी वस्तु की कीमत कम हो जाती है | कंपनी ABC के शेयर के दाम भी कम हुए क्योकिं सभी इसके शेयर बेच रहे थे |

कंडीशन 2:

ABC कम्पनी का रिजल्ट अच्छा आता है, कम्पनी का मुनाफा बढ़ जाता है | यह एक पॉजिटिव खबर है और जब यह खबर निवेशकों/ट्रेडर्स को पता चलता है तो वे ABC के शेयर खरीदनें लगते है |

अब नियम कहता है कि ज्यादा लोग जब किसी वस्तु को खरीदने की मांग करते है तो उस वस्तु की कीमत बढ़ जाती है | कंपनी ABC के शेयर के दाम भी बढ़ गये क्योकिं सभी इसके शेयर खरीद रहे थे |

इस प्रकार से जब स्टॉक मार्केट से किसी शेयर को ख़रीदा या बेचा जाता है जिससे स्टॉक मार्केट ऊपर नीचें होता है | इसी तरह से किसी भी देश का स्टॉक मार्केट काम करता है |


पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग क्या है | दुनिया का आठवां अजूबा क्यों कहतें है | Power Of Compounding in Hindi

पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) जिसे दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाता है | आज सब कोई ये नही जानते है कि हम पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके कैसे अपने जीवन में सफलता की ओर आगे बढ़ सकते है?

Power Of Compounding in Hindi


Power Of Compounding

पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) के बारे में दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने कहा: "Compound interest या चक्रवृधी व्याज दुनिया का आठवां अजूबा है, क्योकिं जो इसे समझता है, वो कमाता (Earn) है, और जो इसे नहीं समझता वह भरता (Pay) है"

कोई भी इन्सान चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न हो पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके सफल हो सकता है | आप भी इसे अपने जीवन में अप्लाई (प्रयोग ) करके निश्चित ही सफल हो सकते है |

उदहारण से समझे -

राम, श्याम और मोहन तीन दोस्त थे, तीनो ने एक साथ एक ही कम्पनी में काम की शुरुवात की थी | सभी 9 बजे ऑफिस काम पर जाते थे ?

राम को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग के बारे में जानकारी थी इसलिए वह रोज सुबह जल्दी उठ कर योग व सेल्फ इम्प्रोविंग किताबें पढ़ता था, और ऑफिस में थोड़ी सी ज्यादा काम करता थे इसलिए कभी कभी उसे लेट भी हो जाता था |

श्याम वक्त का पाबंद था, वह रोज सुबह 7 बजे उठता था फिर तैयार होकर ऑफिस निकल जाता था | ऑफिस का काम 5 बजे समाप्त करके वह घर आ जाता था |

जबकि मोहन रोज सुबह 8 बजे उठता था और फिर जल्दी जल्दी तैयार होकर काम पर निकल जाता है लेकिन ऑफिस में भी उसका मन काम पर नही लगता और वह काम समाप्त होने से पहले ही ऑफिस से निकल जाता था |

एक साल बाद जब तीनों के काम को जांचा परखा गया तो निरीक्षक ने पाया की राम ने अपने ऑफिस में सबसे अच्छा काम किया है, उसे प्रमोट करके मैनेजर बना दिया और उसकी तनख्वाह भी बढ़ा दी गयी |

जबकि श्याम वक्त का पाबंद था इसलिए उसका काम भी ठीक था उसकीं तनख्वाह में थोड़ी सी वृद्धि हुई |

लेकिन जब मोहन के कामों की जांच परख की गई तो पाया की उसने सालभर में बहुत काम किया है और ऑफिस में सबसे कम काम करने वाले के लिस्ट में उसका नाम पहले स्थान पर है इसलिए उसे कंपनी से निकाल दिया गया |

इस तरह एक ही कंपनी में एक साथ काम करने वाले तीन दोस्तों को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग का अलग अलग परिणाम मिला |

जिसने पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग को समझा उसने कमाया , जिसने इसे नही समझा उसने खोया |

आप भी अपने जीवन में पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग सही तरीके से करे और राम की तरह बने |

क्योंकि "बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है "  चाहे वह सफलता का हो या फिर असफलता का |

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?
म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें?

म्यूच्यूअल फण्ड एनएवी क्या है | नेट एसेट वैल्यू काम कैसे करता है | Mutual Fund NAV in Hindi
क्या है म्यूच्यूअल फण्ड एनएफओ | न्यू फण्ड ऑफर के सारे राज | Mutual Funds NFO in Hindi

SIP या Lumpsum बेहतर रिटर्न किसमे मिलता है?

शेयर बाजार क्या है?
शेयर बाजार में निवेश कैसे करें?

शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में अंतर | Stock Market Vs Mutual Funds in Hindi

शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में बेहतर कौन है ? क्या Stock Market में इनवेस्ट करने से Mutual Funds से ज्यादा रिटर्न मिलता है ? अगर आपके मन में भी यह सवाल आता है तो आज मैं आपको इन सारे सवालों के जवाब दे रहा हूँ |

Stock Market Vs Mutual Funds in Hindi


चाहे आप stocks में इन्वेस्ट करना चाहते हो या mutual funds में, इसके लिए आपको तीन फैक्टर्स को समझना होगा |

पहला, आप कितना रिटर्न चाहते है ? क्या आप हाई रिटर्न के लिए हाई रिस्क लेने के लिए तैयार है?

दूसरा, आप फाइनेंसियल रिसर्च और स्टडी करना कितना पसंद करते है और इसके लिए आप कितना समय दे सकते हैं ?

तीसरा, आप कितना फीस, टैक्स आदि देने को तैयार है ?

Stock Market Vs Mutual Funds

जब आप share खरीदते है, इसका मतलब आप एक कंपनी का कुछ पार्ट खरीदते है, जिससे आपको दो तरह से लाभ होता है |

पहला, जब कम्पनी प्रॉफिट करती है तो वह आपको प्रॉफिट का कुछ भाग shareholders में बाँट देती है |


दूसरा, जब आप किसी कम्पनी को कम दाम में खरीदते है और जब कम्पनी के शेयर का दाम बढ़ता हैं और जब आप उसे बेच देते है तो उससे भी आपको लाभ होता है |


mutual funds डाइवर्सिफाइड होता है, डाइवर्सिफाइड का मतलब है, जब आप अपना पैसा लगाते है तो यह स्टॉक्स, बांड, फिक्स्ड डिपाजिट, गोल्ड आदि एसेट में लगता है |


इन एसेट में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के फंड मैनेजर रिसर्च करके आपके दिए गये पैसे को लगाता है, लेकिन रिसर्च करने में फंड मैनेजर को भी समय व एनर्जी दोनों लगता हैं | 


जब आप mutual funds में इन्वेस्ट करते है तो आपको mutual fund unit मिलता है जिसके दाम (NAV) नेट एसेट वैल्यू घटते बढ़ते है |


जब आप शेयर खरीदते है तो यह स्टॉक मार्केट में डायरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट होता है इसलिए इससें ज्यादा रिटर्न मिलने के सम्भावना होती है |

शेयर से आप 18% से 25% मिनिमम रिटर्न की उम्मीद कर सकते है, लेकिन इसके लिए आपको खुद से रिसर्च व स्टडी करनी पड़ती है, और आपका काफ़ी एनर्जी व समय लगता है |


स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने का इनडायरेक्ट तरीका mutual funds है अर्थात कि अगर आप स्टॉक में इन्वेस्ट करना चाहते है, लेकिन अपना टाइम व एफर्ट नही लगाना चाहते है, तो mutual funds आपको एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है, और इससे आप 15% से 18% का रिटर्न कमा सकतें है |


जब आप स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहते हो, तो आपको डीमैट अकाउंट ओपन पड़ता है, इस अकाउंट को ओपन करने व मेन्टेनेन्स के लिए आपको ओपनिंग चार्ज और एनुअल मेन्टेनेन्स चार्ज भी देना होता है |


जबकि mutual funds में invest करने के लिए डीमैट अकाउंट open करना जरुरी नही है, आप बैंक में या म्यूच्यूअल फंड डिस्ट्रिब्युटर के पास जाकर mutual funds की KYC करा सकते है |


स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने से पहले आपको कंपनियों के बिज़नेस मॉडल, प्रॉफिट, भविष्य में कंपनी के कारोबार आदि का एनालिसिस या विशलेषण करना होता है ताकि आपको लाभ हो, नुकसान न हो |


जिस प्रकार स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए हमें एक अच्छे शेयर को खरीदना होता है उसी प्रकार mutual funds में इन्वेस्ट करने के लिए आपको बेस्ट mutual funds, सक्षम फण्ड मैनेजर, एसेट मैनेजमेंट कंपनी का ट्रैक रिकार्ड आदि देखना होता है ?

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कंपाउंड इन्टरेस्ट क्या है | Compound Interest in Hindi

चक्रवृधि ब्याज (Compound Interest) एक अजूबा है , ये मैंने नही कह रहा दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने कहा है |  आइये देखे कंपाउंड इन्टरेस्ट फार्मूला (Compound Interest formula) का प्रयोग कंपाउंड इन्टरेस्ट कैलकुलेट करने के लिए कैसे करते है |

Compound Interest Formula

What is Interest (ब्याज क्या है)

Interest: जो हमें पैसे जमा करने पर बैंक या साहूकार हमारे पैसे के उपर में देता है उसे ब्याज कहते है |

ब्याज दो प्रकार के होते है

Simple Interest ( साधारण ब्याज) : जब कोई व्यक्ति लोन लेता या देता है तो उस लोन पर एक निश्चित समय(Time) में मिलने वाला ब्याज (Interest ) और पैसा (Amount ) फिक्स्ड रहता है तो उसे साधारण ब्याज कहा जाता है |

आप इस फार्मूला का प्रयोग करके साधारण ब्याज कैलकुलेट कर सकते है |

साधारण ब्याज = (मूलधन x समय x दर) / 100

जैसेः 

Ram ने 5% की दर से 5000 रूपयें का लोन दिया |

5000 रूपयें मूलधन है जिसमे 5% की दर से ब्याज को जोड़ा जायेगा |

पहला साधारण ब्याज:  250 रूपयें
दूसरा साधारण ब्याज:  250 रूपयें
तीसरा साधारण ब्याज:  250 रूपयें

कुल(Total) : 5750 रूपये (तीन महीने बाद)

Compound Interest(चक्रवृधि ब्याज ) : चक्रवृधि ब्याज,  साधारण ब्याज से पूरी तरह अलग है,
Compound Interest(चक्रवृधि ब्याज ) में जब कोई व्यक्ति लोन लेता या देता है तो मूलधन(principal Amount)  समय के साथ बदलते रहता है क्योंकि इसमें पुराने मूलधन में उसके ब्याज को जोड़ दिया जाता है |
और ये लगातार चलते रहता है जबतक लोन चुकाया न जाये |

एक बात ध्यान रखे आपको सेविंग बैंक, फिक्स्ड डिपाजिट, आदि में साधारण ब्याज मिलता है, आपको कंपाउंड इन्टरेस्ट नही मिलता है और इसलिए आपका पैसा तेजी से नही बढ़ता है |

Compound Interest Formula

आप इस फार्मूला का प्रयोग कर सकते हैं -

कुल रकम = मूलधन (1+दर) x समय

मूलधन = (दिया या लिया गया लोन )
ब्याज दर = ( निर्धारित ब्याज का दर उदाहरण 5%)

समय = समय अवधि 

जैसेः 

श्याम ने 5% की दर से 5000 रूपयें का लोन कंपाउंड इंटरेस्ट पर दिया |

5000 रूपयें यहाँ पर मूलधन है जिसमे 5% की दर से ब्याज को जोड़ा जायेगा |

पहला चक्रवृधि ब्याज:  250 रूपयें
दूसरा चक्रवृधि ब्याज:  262.5 रूपयें (5000 + 250 = 5250 का ब्याज )
तीसरा चक्रवृधि ब्याज:  275.63 रूपयें (5250 + 262.5 = 5512.5 का ब्याज )

कुल(Total) : 5788.13 रूपये (तीन महीने बाद)

आपने देखा की कैसे चक्रवृधि ब्याज , साधारण ब्याज से अलग है, और किस तरह से आपको ज्यादा ब्याज मिला है | mutual funds और शेयर बाजार में इन्वेस्ट करने से आपको कंपाउंड इन्टरेस्ट मिलता है,  इसलिए आप शेयर बाजार और mutual funds के बारे में सीखना शुरु करे ताकि आप भी अपनी पैसा तेज़ी से बढ़ा सकें | 

मल्तीबैगर स्टॉक क्या है | ऐसे खोजें Multibagger Stocks

Multibagger Stocks: क्या आप जानतें है? Multibagger stocks क्या है ? व Multibagger कैसे पता करते है?

शेयर बाजार में इन्वेस्ट करके आप पैसा कमाना चाहते है लेकिन इसके लिए आपको एक ऐसे स्टॉक की जरूरत होगी जो आपको कई गुना तक का रिटर्न दे सके, पर ऐसे स्टॉक या शेयर की पहचान क्या है जो आपको multibagger रिटर्न दे |
multibagger

Multibagger stocks क्या है?

स्टॉक जो अपनें खरीदें गयें दाम से कई गुना ज्यादा रिटर्न देते है उन stocks को multibagger stocks कहा जाता है | multibagger stocks के फंडामेंटल काफ़ी स्ट्रोंग होते है इसलिए ऐसे स्टॉक में निवेश करना इन्वेस्टर्स के लिए फायदेमंद होता है |

उदाहरण: अगर आपनें कोई स्टॉक 200 के भाव पर ख़रीदा है जो 5 साल के अंदर 2000 हो जाता है तो उसे 10 बैगर कहते है |

Multibagger stocks कैसे पता करें?

मैं अब 5 सीक्रेट्स के बारे में बताने वाला हूँ जिसको ध्यान में रखकर multibagger stocks का पता लगा सकतें है-

बिज़नेस ग्रोथ: आप अगर मल्तीबैगर स्टॉक की तलाश कर रहें है तो आपको उस कंपनी कि तलाश करनी चाहिए जिसकी फ्यूचर बिजनेस में बहुत ज्यादा ग्रोथ होने वाली है|

जब भी आप किसी स्टॉक में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे है तो आपको सबसे उस स्टॉक के भविष्य के फ्यूचर बिजनेस को ध्यान में रखना चाहिए |

सेल्स & प्रोडक्ट्स: multibagger stocks को पहचानने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप कम्पनी के सेल्स व प्रोडक्ट्स को चेक करें क्योकिं जब तक कम्पनी का प्रोडक्ट सही नही है तब तक सेल्स नही बढ़ेगा और अगर सेल्स नही बढ़ेगा तो कम्पनी का profit भी नहीं बढ़ेगा |

अतः सेल्स बढ़ रहा है कि नही यह पता करना आवश्यक हो जाता है |

अंदरवैल्यूड स्टॉक ख़रीदे: ऐसे स्टॉक जिनके फंडामेंटल काफ़ी अच्छे होते है पर कुछ वजहों से अपने वास्तविक मूल्य से कम दाम में ट्रैड होते है उन्हें undervalued stocks कहतें है | अगर आप ऐसें स्टॉक को खरीदते है तो आपके multibagger रिटर्न मिलने के चांसेस बढ़ जाते है |

कंपनी पर उधार: कंपनी का उधार कम से कम हो क्योंकि जब कोई जब कोई कम्पनी उधार लेकर काम करती है तो उसे अपने प्रोफिट से सबसे पहले लोन व ब्याज चुकाने पढ़ते है |

अगर आपने कभी उधार लिया होतो आप इसे अच्छे से समझ सकते है |

रिटर्न ओन इक्विटी: अगर कम्पनी का रिटर्न ओन इक्विटी 25% या इससे ज्यादा है तो यह एक अच्छे स्टॉक की निशानी होती है |

इस पोस्ट को उन लोगों को भेजें जिन्हें आप multibagger stocks पहचानने में मदद करना पसंद करेंगें :)

शेयर क्या होता है | शेयर के सारे राज व लाभ | Share in Hindi

Share in Hindi: क्या आप जानते है ? शेयर क्या है ?( What is Share ?) और शेयर क्या काम आता है ? कोई कम्पनी Share Market में  शेयर क्यों बेचती है ?

share in hindi

Share क्या है ?

सरल भाषा में बिज़नस -जब भी कोई कंपनी कुछ समान या सर्विसेस बनाती है और उसे बेचती है तो उसे बिज़नस कहते है |

Share व बिज़नस का क्या कनेक्शन है ?

शेयर बिज़नस का एक हिस्सा होता है अर्थात किसी बिज़नेस का छोटा सा टुकड़ा है, लेकिन कोई कम्पनी शेयर को शेयर मार्केट में क्यों बेचती है, क्या ऐसा एक कम्पनी अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए करती है ?

जब किसी कम्पनी को अपने नये ब्रांच व व्यापार को बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा पैसे की जरुरत होती है तो ऐसे में कम्पनी आम जनता से पैसे लेकर अपना व्यापार करती है |

जिसके लिए Share market एक बाज़ार का काम करता है| जहाँ पर उन कंपनियों के शेयर उपलब्ध रहते है जो कम्पनी अपना शेयर लिस्ट कराती है ताकि आम पब्लिक कम्पनी के शेयर को खरीद सके|

जैसेः आइचर्स मोटर्स, पेज इंडस्ट्री आदि|

Share क्यों खरीदा जाता है

कोई व्यक्ति किसी कम्पनी का Share इसलिए खरीदता है ताकि उसे मुनाफा हो मतलब कि जब आप एक कम्पनी के Share खरीदते है तो आप उस कम्पनी के हिस्सेदार हो जाते है और जब कम्पनी ग्रोथ ( व्यापार बढ़ना ) करती है तो उसका लाभ शेयर धारक के बीच में बांटा जाता है |

जब भी आप Share खरीदते है तो आपको कम्पनी में हिस्सेदारी का डॉक्यूमेंट दिया जाता है जो आज कल डिजिटल रूप में आता है | जिस आपके डीमैट अकाउंट में रखा जाता है|

अगर आपने ने किसी कम्पनी का शेयर 500 रूपये के भाव में ख़रीदा है तो इसका मतलब है कि आपने उस कम्पनी का थोड़ा सा हिस्सा ख़रीदा है और जब कंपनी ग्रोथ करती है तो उसके साथ Share का भाव भी बढ़ता है (जैसेः 600, 750 , 900, 1000 आदि )

ऐसे में आपने कम्पनी के 50 शेयर 500 रूपये के दाम पर 25000 रूपये में खरीदा था जिसका भाव बढ़कर 900 हो गया है मतलब आपको प्रति शेयर 400 रूपये का मुनाफा होगा |

50 शेयर X 900 रूपये = 45000 रूपये 
45000 - 25000 = 20000 रूपये (लाभ हुआ ) 

यहाँ आप देख सकते है कि किस प्रकार 25000 रूपये का शेयर 45000 रूपये का हो जाता है जिसमे आपको 20000 रूपये का शुद्ध लाभ होता है |

इसे आप उन लोगों को भेजें जिन्हें आप share के बारे में सिखाना चाहते है :)

डिविडेंड क्या है | डिविडेंड कब मिलता है | Dividend in Hindi

क्या आपको कभी Dividend मिला है ? कोई कंपनी डिविडेंड कब देती है?  इन्तरिम और फाइनल डिविडेंड क्या होता है ?

Dividend क्या है ?

Dividend in hindi

डिविडेंड या लाभांश का मतलब है – कंपनी में लाभ का अंश !

कोई भी कंपनी डिविडेंड या लाभांश कंपनी के द्वारा प्रोफिट्स किये जाने पर कंपनी के शेयर होल्डर्स को देती है |

कोई भी कंपनी प्रति वर्ष Dividend देगी या नही इसे कोई नही जानता है, क्योंकि यह निश्चित नही है कि कंपनी हर साल ग्रोथ करती रहेगी, लेकिन कई ऐसी भी कंपनिया होती है जो लगातार हर वर्ष डिविडेंड देती है इसलिए ऐसी कंपनिया इन्वेस्टर्स को ज्यादा लुभाती है |

Dividend प्रति शेयर के हिसाब से किसी कम्पनी के शेयर होल्डर्स को दिया जाता है |

उदहारण - मान लीजिये अगर आपके पास ABC कम्पनी के 500 शेयर है और कम्पनी ने 1 रुपयें प्रति शेयर डिविडेंड देने की है तो आपको 500 x 1 = 500 रूपये डिविडेंड के रूप में मिलेंगे |

Dividend की घोषणा (Dividend Announcement)

कंपनी के द्वारा डिविडेंड की घोषणा कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के द्वारा Annual General Meetings (AGM) में किया जाता है मतलब डिविडेंड देना है या नही पूरी तरह से कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स पर निर्भर करता है |

क्योंकि कई बार कम्पनी अपने मुनाफे को डिविडेंड न दे करके कम्पनी के नये ब्रांच खोलने या अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए खर्च करती है |

Dividend के प्रकार (Types of Dividend)

कोई भी कंपनी डिविडेंड फाइनेंसियल इयर के अंदर किसी भी समय दे सकती है इसलिए इसके दो प्रकार है -

Intrim Dividend : जब कोई कम्पनी फाइनेंसियल इयर के भीतर डिविडेंड देने की घोषणा करती है तो उसे Intrim Dividend कहते है |

Final Dividend : जब कम्पनी फाइनेंसियल इयर के अंत में डिविडेंड देने की घोषणा करती है तो उसे Final Dividend कहते है |

इसके साथ ही कई मौकों पर कम्पनी Special Dividend (स्पेशल डिविडेंड ) भी दे सकती है |

Dividend Calculations

डिविडेंड को फेस वैल्यू के परसेंटेज के रूप में भी व्यक्त किया जाता है - मान लीजिये कम्पनी ABC ने 5 रुपयें डिविडेंड की घोषणा की है और कंपनी का फेस वैल्यू 1 रूपये है तो paid किया गया डिविडेंड है -

5/1 = 500%

इस तरह कंपनी ने फेस वैल्यू का 500% डिविडेंड दिया है |

Dividend Dates

डिविडेंड की घोषणा कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स Annual General Meetings (AGM) में करती है लेकिन घोषणा के तुरंत बाद ही डिविडेंड नही दिया जाता है क्योकिं शेयर्स सालभर ट्रेड होते है इसलिए किसे डिविडेंड दिया जाये, यह पता करना कठिन होता है |

आप इसे डिविडेंड साइकिल (चक्र ) से समझ सकते है -

Dividend Declaration Date: इस दिन कंपनी अपने शेयर होल्डर को डिविडेंड देने की घोषणा करती है |

Record Date: इस दिन कंपनी अपने शेयर होल्डर्स रजिस्टर की समीक्षा करती है कि किन किन लोगो के पास शेयर्स है, जो डिविडेंड पाने के हक़दार है | आमतौर पर डिविडेंड डिक्लेरेशन्स डेट व रिकॉर्ड डेट के बीच का समय 30 दिन होता है |

Ex Date/Ex Dividend date: यह Last date होता है, अगर इस Date के बाद  किसी ने स्टॉक या शेयर ख़रीदा है, तो उसे डिविडेंड नहीं मिलेगा

Dividend Payout Date: इसी दिन कंपनी अपने हक़दार शेयर होल्डर्स को डिविडेंड देती है |

आप इसे सात लोंगो को भेजें ताकि उनको dividend के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकें :)

पेनी स्टॉक्स क्या होता है | पेनी स्टॉक्स में निवेश सही या गलत | Penny Stocks in Hindi

Penny Stocks in Hindi: क्या आप जानते है? पेनी स्टॉक्स (Penny Stocks ) क्या है?

Penny Stocks image

Penny Stocks क्या है?

Penny Stocks को जानने से पहले हम जान लेते है पेनी क्या होता है , आपने डायलॉग तो सुना ही होगा "मेरे पास एक रुपया नही है "  जिसका अंग्रेजी अर्थ " I Dont Have Any Penny" है |

आपने गौर किया मैंने रूपया और Penny दोनों शब्द का उपयोग किया है क्योंकी अंग्रेजी में सिक्के को Penny कहा जाता है |

अब आपको धीरे - धीरे समझ में आने लगा होगा कि Penny Stocks क्या हो सकते है | अगर आप सोच रहें है कि पेनी स्टॉक एक- दो रूपये में मिलते है तो आपका अनुमान एकदम सही है |

पेनी स्टॉक्स दरअसल वे स्टॉक्स होते है जिनकी दाम बहुत कम होता है इसलिए इन्हें Low Priced Stocks भी कहा जाता है |

लेकिन ध्यान रहें हर कम कीमत वाली स्टॉक्स पेनी स्टॉक्स नही होती है क्योंकि Share Market में उतार चढ़ाव आते रहते है इसलिए स्टॉक्स कई बार कम में मिलने लगते है इसलिए आपको एक पेनी स्टॉक्स को पहचान करना आना चाहिए |

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार
पेनी स्टॉक वे हैं जो बहुत कम कीमत पर व्यापार करते हैं, बहुत कम बाजार पूंजीकरण होता है, ज्यादातर अनूठे होते हैं, और आमतौर पर छोटे विनिमय पर सूचीबद्ध होते हैं। भारतीय शेयर बाजार में पेनी शेयरों की कीमत 10 रुपये से कम हो सकती है। ये स्टॉक प्रकृति में बहुत सट्टा हैं और तरलता की कमी, शेयरधारकों की कम संख्या, बड़ी बोली-पूछ फैलता है और जानकारी के सीमित प्रकटीकरण के कारण अत्यधिक जोखिम वाले माने जाते हैं। 

Penny Stocks का पता कैसे लगाये

भारतीय स्टॉक मार्केट में बहुत सारे पेनी स्टॉक्स है लेकिन पेनी स्टॉक्स को पहचान करने का बेहतर तरीका कौन सा है |
  • 1 रुपयें से लेकर 25-30 रूपये तक के स्टॉक्स को पेनी स्टॉक्स कहा जाता है |
  • इनकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी 100 करोड़ के आस पास होती है |

Penny Stocks में निवेश सही या गलत

अगर हम एक निवेशक की नजर से देखे तो हमें पेनी स्टॉक्स में निवेश सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि एक लॉन्ग टर्म निवेशक प्राइस को देख कर इन्वेस्ट नही करता है | एक अच्छा इन्वेस्टर वह होता है जो कम्पनी के मैनेजमेंट व फंडामेंटल को अच्छे से समझ कर निवेश करता है |

आप भी पेनी स्टॉक्स में इसलिए निवेश न करे क्योंकि वह 10 रूपये में मिल रहा है और 20 रूपये होने में ज्यादा समय नही लगेगा |

किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले क्वालिटी की जांच अवश्य करें ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे | Penny Stocks में नुकसान होने के सम्भावना बहुत ज्यादा होती है |

इसे उन लोगों को भेजें जिन्हें आप penny stocks से होने वाले loss को बताना चाहते है :)

ट्रेडिंग अकाउंट क्या है | Trading Account in Hindi


ट्रेडिंग अकाउंट क्या है ?(Trading Account ) व स्टॉक मार्केट में  ट्रेडिंग अकाउंट की जरुरत क्यों होती है ?Trading Account किसके पास खुलवाते है? Trading Account और stock broker में क्या सम्बन्ध है?

Trading Account in hindi

Trading Account क्या है?

Trading Account वह अकाउंट है जिसकी मदद से हम स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदने व बेचने का आर्डर देते है |

अगर आप Share Market में शेयर खरीदना व बेचना चाहते है तो आप ट्रेडिंग अकाउंट के माध्यम से अपना आर्डर दे सकते है | 

इसका मतलब है कि हमें ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता स्टॉक मार्केट से  केवल शेयर खरीदने व बेचने के लिए ही  होती है |

Trading Account व Stock Broker

Trading Account और स्टॉक ब्रोकर में क्या सम्बन्ध है इसका सीधा सा जवाब है अगर ट्रेडिंग अकाउंट रथ है तो स्टॉक ब्रोकर सारथी है |

आप जब भी trading account की मदद से शेयर खरीदने या बेचने का आर्डर देते है तो वह आर्डर सबसे पहले स्टॉक ब्रोकर के पास पहुँचता है उसके बाद स्टॉक ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज में आपके आर्डर को कम्पलीट कराता है |

अगर आप शेयर खरीदना (Buy ) व बेचना (Sell ) करना चाहते है तो आपको एक Trading Account व डीमैट अकाउंट खोलना होता है जिसे आप स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से खुलवा सकते है |

मैं पहले ही डीमैट अकाउंट से संबंधीत पोस्ट लिख चूका हूँ जहाँ मैंने अकाउंट खुलवाने के लिए कौन कौन सी डॉक्यूमेंट की जरुरत होंगी बताया है जिसे आप ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ सकते  है |

Trading Account प्लेटफार्म

स्टॉक ब्रोकर आपके सुविधा के लिए कई तरह के trading platform प्रोवाइड करता है-
जैसेः
  • फ़ोन से ट्रेड करने की सुविधा |
  • स्टॉक ब्रोकर के ऑफिस में जाकर ट्रेड करना |
  • स्मार्टफोन एप्लीकेशन के जरिये |
  • स्टॉक ब्रोकर की वेबसाइट से |
आप इन सभी माध्यम से ट्रेड कर सकते है पर ध्यान रखे स्टॉक ब्रोकर की सर्विसेस व उनकें चार्ज इन सेवाओं पर ही लिए जाते है | क्यों की भारत में फुल सर्विस ब्रोकर व डिस्काउंट सर्विस ब्रोकर दोनों है |

  • शेयर बाजार में  ट्रेडिंग के लिए  ट्रेडिंग अकाउंट की जरुरत होती है।
  • ट्रेडिंग अकाउंट के जरिये ही शेयरों की खरीद - ब्रिकी की जाती है।
  • ट्रेडिंग अकाउंट ब्रोकर के पास खुलवाना होता है। 
  • यह बैंक अकाउंट की तरह होता है।
  • इसे बैंक और डीमैट अकांउट से लिंक किया जा सकता है |
Source: MoneyControl


ब्लू चिप कंपनी क्या है | ब्लू चिप कंपनीयो की विशेषता | Blue Chip Companies in Hindi

क्या आप जानते है ब्लू चिप कंपनी (Blue Chip Companies) क्या है? और ब्लू चिप कंपनियों में निवेशको का ज्यादा भरोसा क्यों होता है? तो चलिए जानते है ब्लू चिप कम्पनियों की सारी अनसुनी बातों को|

Blue Chip Companies in Hindi

Blue Chip

ब्लू चिप का इतिहास बहुत पुराना है, ब्लू चिप नाम, पोकर नाम के एक खेल से लिया गया है | पोकर खेल में ब्लू चिप सबसे मूल्यवान होता था |

Blue Chip Companies in Hindi

स्टॉक मार्केट में बड़ी कम्पनियों को, जो बड़ी हो गयी है और अपना बिज़नस आसानी से कर रही है| उन कंपनियो को ब्लू चिप कंपनी कहा जाता है |

Blue Chip Companies का मार्केट कैपिटलाइजेशन ज्यादा होता है और इन कंपनियों  के शेयर प्राइस में उतार-चढ़ाव कम होता है| इसके अतिरिक्त Blue Chip shares या companies की अर्निंग स्थिर व नियमित होती है|

ब्लू चिप स्टॉक का मार्केट वैल्यूएशन भी बहुत अधिक होता है, इसके साथ बाजार में गिरावट (बुलिश मार्केट ) के दौरान भी ब्लू चिप कंपनियों का रिटर्न, स्माल कैप व मिड कैप वाले कंपनियों से बेहतर होता है और इन्ही सब वजह से ब्लू चिप कंपनियों में निवेशकों का ज्यादा भरोसा होता है क्योकिं ये कंपनिया कई दशकों से बिज़नस कर रही होती है|

ब्लू चिप कंपनियों प्रॉफिट होने पर डिविडेंड देने के लिए भी बहुत फेमस होती है | और इसलिए ये कंपनिया निवेशको के लिए बहुत ही आकर्षक हो जाती है |

भारत में ब्लू चिप कम्पनी (Indian Blue Chip Companies)

भारत में कई Blue Chip Companies है, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन अधिक है एवं लगातार अच्छा बिज़नस कर रहे है | आइये कुछ कंपनियों को देखते है|

  • Tata Consultancy Services (TCS)
  • Infosys
  • Indian Tobacco Company (ITC)
  • State Bank of India (SBI)


म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | What is Mutual Funds in Hindi

म्यूच्यूअल फण्ड एनएवी क्या है | नेट एसेट वैल्यू काम कैसे करता है | Mutual Fund NAV in Hindi

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Bull Market और Bear Market क्या है ? Bull Market vs Bear market in Hindi

आपने कई बार समाचार चैनल्स में Bull Market और Bear market के बारे में जरुर सुना होगा लेकिन आखिर ये Bull and Bear market होता क्या है | Bear market में लोग डरते क्यों है वही Bull market में लोग बहुत ज्यादा खुश होते है |

Bull Market vs Bear market

Stock Market में उतार चढ़ाव

Bull Market और Bear market के बारे में जानने से पहले आपको शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव को समझ लेना चाहिए |
शेयर बाजार में हर दिन स्टॉक मार्केट खुलने के बाद Bull व Bear के बीच लड़ाई होती है | जिनकी संख्या ज्यादा होती है उस दिन वे जीत जाते है | इन्ही के कारण शेयर बाज़ार में उतार चढ़ाव आते है |

शेयर बाज़ार में स्टॉक के प्राइस कम या ज्यादा होते रहते है कोई शेयर के दाम कभी कभी बहुत तेजी से बढ़ जाते है तो वही कही स्टॉक्स के दाम बहुत तेजी से कम होते है |

बैल व भालू (Bull and Bear)

जैसा की आप जानते है हिन्दी में Bull का अर्थ है – बैल, वही Bear का अर्थ – भालू होता है |

लेकिन बैल और भालू का शेयर मार्केट में क्या काम है, आइये समझने का प्रयास करे बुल व बियर का स्टॉक मार्केट में क्या अर्थ होता है |

Bull का अर्थ है – तेजी, वही Bear का अर्थ – मंदी

अब आइये जानते है एक Bull व Bear स्टॉक मार्केट में कैसे आते है और बुल मार्केट व बियर मार्केट का क्या मतलब होता है -

Bear Market क्या है 

स्टॉक बाज़ार में दो तरह के निवेशक होते है 

पहले वाले आनुमान लगाते है कि आज बाज़ार उपर जायेगा |

दुसरे वाले अनुमान लगाते है कि बाज़ार नीचें जायेगा |

लेकिन जीत उसकी होती है जिसकी मार्केट में संख्या ज्यादा होती है | 

Bear Market की स्थिति तब आती है जब बहुत से लोग शेयर को खरीदने के बजाय बेचने लगते है |

ऐसा किसी खराब खबर के आने पर होता है 

जैसेः

  • कच्चे तेल व डॉलर की कीमत एक साथ बढ़ना |
  • विश्व में आर्थिक मंदी के संकेत |
  • देश विदेश की आंतरिक व बाहरी घटनाएँ आदि |

जब बड़ा Bear Market आता है तो 10 में से लगभग 9 स्टॉक का दाम गिर जाता है या कम्पनी के शेयर के दाम 25% तक या उससे ज्यादा गिर जाता है |

Bull Market क्या है

जैसा की आपने जाना किसी भी स्टॉक मार्केट में दो तरह के निवेशक होते है उनमे जीत उसी की होती है जिनकी संख्या ज्यादा होती है |

Bull Market की स्थिति तब आती है जब बहुत से लोग शेयर को खरीदने लगते है |

ऐसा किसी अच्छी खबर के आने पर होता है |

जैसेः
  • कम्पनियों का प्रॉफिट बढ़ना |
  • देश में चुनाव की अच्छे परिणाम |
  • कच्चे तेल व डॉलर की कीमत एक साथ कम होना |

जब बड़ा Bull Market आता है तो 10 में से लगभग 9 स्टॉक का दाम बढ़ने लगता है या कम्पनी के शेयर के दाम 25% तक या उससे भी ज्यादा बढ़ जाता है |

उम्मीद करता हूँ कि आपको स्टॉक मार्केट में Bull Market vs Bear market का मतलब समझ आ गया होगा |

स्टॉक स्पिलिट क्या है | स्टॉक स्पिलिट का फायदा किसे मिलता है | Stock Split in Hindi

स्टॉक स्पिलिट क्या है | स्टॉक स्पिलिट का फायदा किसे मिलता है | Stock Split in Hindi
क्या आपका Stock कभी स्प्लिट हुआ है? Stock Split कब, और क्यों होता है?

Stock Split क्या है?

Split या स्प्लिट का अर्थ = विभाजन (Partition), या टुकड़े करना |

स्टॉक का अर्थ = शेयर या कम्पनी का हिस्सा 

इस प्रकार स्टॉक स्प्लिट का अर्थ शेयर के टुकड़े करना है लेकिन ये स्टॉक स्प्लिट कब ,क्यों और कैसे किया जाता है इसके पीछे किसी कम्पनी का क्या उद्देश्य होता है ?

हर शेयर मे स्पिलिट हो, ऐसा जरुरी नही है लेकिन स्टॉक मार्केट में किसी न किसी कम्पनी का स्टॉक स्पिलिट होता रहता है |

Stock Split कब, क्यों होता है?

स्टॉक स्पिलिट एक कॉर्पोरेट एक्शन होता है और इसका महत्वपूर्ण प्रभाव स्टॉक मार्केट व निवेशक पर पड़ता है |

लेकिन स्टॉक स्पिलिट का सबसे ज्यादा फायदा कम्पनी को होता है | कोई भी कंपनी अपने स्टॉक या शेयर को स्पिलिट इसलिए करती है ताकि कम्पनी शेयर के मूल्य व फेस वैल्यू को कम कर सके |

जिससे नये निवेशक कंपनी के शेयर को आसानी से कम दाम में खरीद सके और कम्पनी को लाभ हो |

Stock Split कैसे होता है?

जब भी कोई कम्पनी स्टॉक स्पिलिट करती है तो उस कम्पनी के शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि उस कम्पनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization ) नही बढ़ता है और न  ही शेयर धारकों की इन्वेस्मेंट वैल्यू बढती है

शेयर धारकों के शेयर कि संख्या बढ़ जाती है,  यह एक प्रकार से बोनस शेयर जारी करने की तरह होता है |

स्टॉक स्पिलिट, फेस वैल्यू को ध्यान में रख कर व निश्चित अनुपात में किया जाता है-

जैसे 1:2 या 1:5

आपके पास XYZ कम्पनी का एक शेयर है जिसका फेस वैल्यू 10 है और स्टॉक स्पिलिट 1:2 अनुपात में होता है 
जिससे उसका फेस वैल्यू बदलकर 5 हो जाता है

आपके पास जो पहले एक शेयर था तो इस प्रकार एक शेयर बढकर दो शेयर हो जायेगा |
स्पिलिट रेश्यो पुराना फेस वैल्यू आपके शेयर स्पिलिट से पहले शेयर के दाम स्प्लिट से पहले निवेशित पूंजी स्पिलिट से पहले नया फेस वैल्यूआपके शेयर स्पिलिट से बादशेयर के दाम स्प्लिट से बाद निवेशित पूंजी स्पिलिट से बाद
1:21010090090,000520045090,000
1:51010090090,000250018090,000
स्टॉक स्प्लिट होने के बाद फेस वैल्यू व शेयर की संख्या बदल गयी है लेकिन शेयर होल्डर्स के द्वारा इन्वेस्ट किया गया पूंजी या राशि में कोई वृद्धि नही हुई है|

ये भी पढ़े:

फेस वैल्यू क्या है | Face value in Hindi
बोनस शेयर क्या है | Bonus Share in Hindi

उम्मीद करता हूँ आपको स्टॉक स्प्लिट (Stock Split )  क्या होता है समझ में आया होगा |

Net Worth in Hindi-नेटवर्थ क्या होता है | Net worth कैलकुलेट करना जानिए

क्या आप जानते है? Net worth क्या है? आपकी कितनी NetWorth है? और इसे कैलकुलेट करने के लिए आप नीचें दिए Net worth Formula का use कैसे करेंगे |
what is Net Worth in hindi

What is Net Worth in Hindi

Net worth को समझने के लिए हम इसके दोनों शब्दों को अलग करेंगे -

Net = शुद्ध
Worth = सम्पति 

अर्थात इसका मतलब शुद्ध सम्पति है

इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार
नेट वर्थ किसी व्यक्ति या कंपनी की संपत्ति और दायित्व के बीच का अंतर है। 
इसका उपयोग तो कम्पनी, व्यक्ति , संस्था आदि के साथ किया जाता है जो उस कम्पनी , व्यक्ति या संस्था के आर्थिक स्थितियों को बताता है |


अब सवाल ये उठता है कि कम्पनी, व्यक्ति या संस्था की शुद्ध सम्पति क्या होती है |

कम्पनी, व्यक्ति या किसी संस्था का Net worth उनकी कुल सम्पति (Total Asset) में कुल दायित्व (Total Libelities) में घटाने से प्राप्त होता है |

आपने अक्सर तरह तरह के माध्यमों से चाहे वह टीवी , रेडियो, या फिर समाचार पत्रों में हो, किसी कम्पनी , फिल्म स्टार्स , स्पोर्ट्स पर्सन(खिलाडियों ) के Net worth के बारे में सुना होगा |

अगर आप किसी कम्पनी या सेलिब्रेटीज का आर्थिक स्थिति (Financial Position ) के बारे में जानना चाहते है तो आपको उस कम्पनी या सेलिब्रिटीज का Net worth कैलकुलेट करना होगा |

Networth की गणना

Net worth की गणना करना बहुत ही आसान है अगर आपको जोड़ना व घटाना आता है तो आप आसानी से Net worth कैलकुलेट कर सकते है |

नोट: यह फार्मूला स्टॉक मार्केट की किसी कंपनी के नेट वर्थ को जानने के लिए आप प्रयोग कर सकते है |


Net Worth = (Total Asset -Total Liabilities)
नेट वर्थ = कुल सम्पति – कुल दायित्व

यहाँ पर आपको net worth कैलकुलेट करने के लिए कुल सम्पति व कुल दायित्व को जानना आवश्यक है क्योंकि इनके बिना आप किसी व्यक्ति या कम्पनी का नेट वर्थ नही निकाल सकते है |


कुल सम्पति : सबसे पहले आपको सभी सम्पतियों का लिस्ट बनाना होगा अगर आपने अमिताभ बच्चन की डायलॉग सुनी हो "आज मेरे पास गाड़ी है , बंगला है , बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है? " तो आप आसानी से कुल सम्पतियो की लिस्ट बना सकते हो |


कुल सम्पति में  जमीन , प्लांट , बैंक बैलेंस, इन्वेस्टमेंट, स्टॉक, म्यूच्यूअल फंड्स , गाड़ी, बंगला सब को शामिल किया है |


कुल दायित्व : कुल दायित्व में किसी भी प्रकार का लोन (कार लोन , गोल्ड लोन , होम लोन आदि ) को शामिल किया जाता है |


उदहारण के लिए हमने माना कि एक कंपनी का कुल सम्पति 1000 करोड़ है व कुल दायित्व 700 करोड़ है 
तो उस कम्पनी का नेट वर्थ होगा -

300 करोड़ = 1000 करोड़  – 700 करोड़

इस प्रकार हम कह सकते है कि उस कम्पनी की नेट वर्थ 300 करोड़ है |

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?
म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें?

शेयर बाजार क्या है?
शेयर बाजार में निवेश कैसे करें?

म्यूच्यूअल फण्ड एनएवी क्या है | नेट एसेट वैल्यू काम कैसे करता है | Mutual Fund NAV in Hindi
क्या है म्यूच्यूअल फण्ड एनएफओ | न्यू फण्ड ऑफर के सारे राज | Mutual Funds NFO in Hindi

SIP या Lumpsum बेहतर रिटर्न किसमे मिलता है?

फेस वैल्यू क्या है | फेस वैल्यू का कारपोरेशन एक्शन में महत्व | Face Value in Hindi |

Face Value in Hindi: Face Value का कारपोरेशन एक्शन में क्या महत्त्व है? शेयर Split का फेस वैल्यू पर क्या असर होता है ?
Face Value in hindi

Face Value in Hindi

स्टॉक का Face value दिखाता है कि शेयर का वास्तविक मूल्य शेयर प्रमाण पत्र में क्या है | कॉर्पोरेट एक्शन जैसे डिविडेंड और शेयर स्पिलिट, फेस वैल्यू के आधार पर ही लिया जाता है |

उदाहरण: यदि कम्पनी ABC फाइनेंसियल इयर 2012-13 में फाइनल डिविडेंड 60 रूपये देती है वही कंपनी का फेस वैल्यू 5 रूपये है तो कम्पनी ने 60/5= 12 अर्थात कम्पनी ने फेस वैल्यू (5) का 1200%  डिविडेंड दिया |

Face Value व Share Split

जब भी कोई शेयर स्पिलिट होता है तो कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, कोई कंपनी शेयर स्पिलिट तब करती है जब उस कम्पनी के शेयर का भाव बहुत ज्यादा हो जाता है जिससे छोटे निवेशक भी कंपनी के शेयर कम दामों में खरीद सके |

शेयर स्पिलिट के साथ ही शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, आइये इसे उदहारण की मदद से समझने का प्रयास करे |

मान लीजिये आपने कम्पनी ABC का 50 शेयर 200 रूपये के भाव में खरीद रखे है जिसका फेस वैल्यू 10 रूपये  है लेकिन जब शेयर स्पिलिट किया जायेगा तो आपके पास 100 रूपये के 100 शेयर हो जायेंगे और इसका फेस वैल्यू 5 रूपये का हो जायेगा |

बुक वैल्यू क्या है | बुक वैल्यू की सच्चाई | Book Value in Hindi

BookValue per share की मदद से किसी भी कंपनी के कुल कीमत का कैसे पता लगाया जाता है ? किसी कंपनी का बुक वैल्यू ज्यादा या कम हो तो इसका कंपनी के सेहत से क्या लेना देना है ?
Book Value in hindi

BookValue in Hindi

बुक वैल्यू को जानने से पहले आप से एक सवाल हैं -

जब किसी कंपनी को एक निश्चित समय पर बेचा जायेगा तो आप उस कंपनी के कुल कीमत का पता कैसे लगायेंगे ?

इसका जवाब है बुक वैल्यू (Book Value per Share) , आपने एकदम सही पढ़ा |

Book Value (बुक वैल्यू) किसी भी कंपनी या वस्तु की वह कीमत होती है, जो एक निश्चित समय पर उसे बेचने पर प्राप्त होती है | 

आइये इसे एक उदहारण की मदद से समझने की कोशिश करते है -

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जो बंद होने के कगार पर है अब ऐसे समय में जब कंपनी के एसेट्स (Assets) जैसे जमीन , प्लांट , मशीन आदि को बेचा गया(100 करोड़ ) जिसे रिज़र्व में जोड़ा तो 3500 करोड़ का हुआ |

कंपनी का शेयर कैपिटल 25 करोड़ है मतलब शेयर कैपिटल और रिज़र्व 3525 करोड़ के है |

कम्पनी ने अपने उपर की सारे कर्ज (debts) को चुकाया जो लगभग 1025 करोड़ था |

तो कम्पनी ABC का कुल कीमत 3525 - 1025 = 2500 करोड़ हुआ, लेकिन इस 2500 करोड़ को कंपनी के टोटल शेयर होल्डर के बीच में बांटने पर जो वैल्यू आएगी वही इस कंपनी का बुक वैल्यू होगा |

Book Value Formula

बुक वैल्यू कैलकुलेशन करना बहुत ही आसन है -

Share Capital + Reserves / Total Number of shares = Book Value
शेयर कैपिटल + रिज़र्व / कंपनी के कुल शेयर = बुक वैल्यू

शेयर कैपिटल + रिज़र्व = 2500 करोड़
कुल शेयर की संख्या = 25 करोड़ 

2500 करोड़ / 25 करोड़ = 100 रुपये (बुक वैल्यू )

तो अब आप भी आसानी से इस फार्मूला की मदद से किसी कम्पनी की बुक वैल्यू कैलकुलेट कर के देख सकते हो |

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पीई रेश्यो क्या है | पीई रेश्यो का उपयोग कैसे करते है | Price Earnings (PE) Ratio in Hindi

 शेयर बाजार की बात हो और PE Ratio का जिक्र न हो ऐसा हो नही सकता है लेकिन PE Ratio क्या है ? और शेयर बाजार में क्यों ज्यादा PE ratio यानि Price Earnings Ratio का प्रयोग किया जाता है? तो चलिए जानते है PE Ratio को और Price Earnings Ratio कैसे कैलकुलेट किया जाता है? तथा इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " क्यों कहते है |
PE Ratio in Hindi
अगर आप दो शेयरों, दो उद्योगों, दो देशों के बाजारों की तुलना करना चाहते है तो Price Earnings Ratio बहुत ही काम का है।

आप इसकी सहायता से बहुत आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि शेयर का भाव बढ़ने की कितनी संभावना है |

PE Ratio क्या है ?

PE रेश्यो यानि कि Price Earnings Ratio सबसे पोपुलर रेश्यो है और सब कोई इसे जानना पसंद करते है |
इसकी पॉपुलैरिटी के कारण इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " भी कहते है | हम EPS की मदद से PE रेश्यो कैलकुलेट करते है |



इसका फार्मूला है -
Market Price / EPS = PE Ratio 
शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय = PE रेश्यो

आप किसी भी कम्पनी का PE रेश्यो तबतक नहीं जान सकते है जबतक आप उसकी EPS नही जान लेते है |

आइये इसे उदहारण की सहायता से समझने की कोशिश करे , एक कंपनी JKL है जिसके 10 लाख शेयर से कंपनी को  20 लाख Earnings (शुद्ध लाभ ) हुआ और इस कम्पनी के शेयर का मार्केट प्राइस (शेयर की बाजार में कीमत) 40 रूपयें है |


तो इसका EPS 20 लाख / 10 लाख = 2 रूपये होगा |

जबकि इसका PE ratio होगा-

40 / 2 = 20 रुपयें 

इसका एक मतलब ये भी होता है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स प्रति यूनिट प्रॉफिट पाने के लिए 20 गुना ज्यादा पैसे देने को तैयार है |

PE (Price Earnings) Ratio कैसे प्रयोग करे?

Price Earnings Ratio का प्रयोग कर आप किसी कंपनी के ग्रोथ बढ़ने या घटने का अंदाजा भी लगा सकते है | इसके लिए कम्पनी के पिछलें कुछ सालों का रिकॉर्ड देखियें और पता करे कि मैक्सिमम PE कितना था उसके बाद पुरे इंडस्ट्री के औसत PE को पता करे और अंत में पुरे बाजार का औसत PE पता करके एक दुसरे से तुलना करे |

ध्यान रखने वाली बात (points to remember)

  • कभी भी केवल PE रेश्यो को ही देखकर निवेश न करे |
  • पूरी कंपनी व बिज़नेस की फंडामेंटल एनालिसिस करे |
  • PE दिखाता है कि कोई शेयर सस्ता या महंगा ट्रेड हो रहा है | 
  • ज्यादातर लोग 21 से ज्यादा PE वाले स्टॉक पर इन्वेस्ट नही करते |
" किसी कंपनी का पीई रेशियो निश्चित संख्या नहीं होता. यह हमेशा बदलता रहता है. मान लीजिए किसी कंपनी का पीई रेशियो आज 20 है. इसका मतलब यह नहीं है कि यह हमेशा 20 रहेगा. कंपनी के प्रदर्शन और शेयर बाजार में उसके शेयर की कीमत के अनुसार यह रेशियो घटता-बढ़ता रहता है. कंपनी के अच्छा मुनाफा कमाने पर उसके शेयरों की मांग बढ़ती है. इससे उसका पीई रेशियो बढ़ जाता है. इसी तरह अगर किसी कंपनी को नुकसान हुआ है तो इसके पीई रेशियो में गिरावट आ सकती है"

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