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Apr 3, 2019

मल्तीबैगर स्टॉक क्या है | ऐसे खोजें Multibagger Stocks

Multibagger Stocks: क्या आप जानतें है? Multibagger stocks क्या है ? व Multibagger कैसे पता करते है?

शेयर बाजार में इन्वेस्ट करके आप पैसा कमाना चाहते है लेकिन इसके लिए आपको एक ऐसे स्टॉक की जरूरत होगी जो आपको कई गुना तक का रिटर्न दे सके, पर ऐसे स्टॉक या शेयर की पहचान क्या है जो आपको multibagger रिटर्न दे |
multibagger

Multibagger stocks क्या है?

स्टॉक जो अपनें खरीदें गयें दाम से कई गुना ज्यादा रिटर्न देते है उन stocks को multibagger stocks कहा जाता है | multibagger stocks के फंडामेंटल काफ़ी स्ट्रोंग होते है इसलिए ऐसे स्टॉक में निवेश करना इन्वेस्टर्स के लिए फायदेमंद होता है |

उदाहरण: अगर आपनें कोई स्टॉक 200 के भाव पर ख़रीदा है जो 5 साल के अंदर 2000 हो जाता है तो उसे 10 बैगर कहते है |

Multibagger stocks कैसे पता करें?

मैं अब 5 सीक्रेट्स के बारे में बताने वाला हूँ जिसको ध्यान में रखकर multibagger stocks का पता लगा सकतें है-

बिज़नेस ग्रोथ: आप अगर मल्तीबैगर स्टॉक की तलाश कर रहें है तो आपको उस कंपनी कि तलाश करनी चाहिए जिसकी फ्यूचर बिजनेस में बहुत ज्यादा ग्रोथ होने वाली है|

जब भी आप किसी स्टॉक में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे है तो आपको सबसे उस स्टॉक के भविष्य के फ्यूचर बिजनेस को ध्यान में रखना चाहिए |

सेल्स & प्रोडक्ट्स: multibagger stocks को पहचानने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप कम्पनी के सेल्स व प्रोडक्ट्स को चेक करें क्योकिं जब तक कम्पनी का प्रोडक्ट सही नही है तब तक सेल्स नही बढ़ेगा और अगर सेल्स नही बढ़ेगा तो कम्पनी का profit भी नहीं बढ़ेगा |

अतः सेल्स बढ़ रहा है कि नही यह पता करना आवश्यक हो जाता है |

अंदरवैल्यूड स्टॉक ख़रीदे: ऐसे स्टॉक जिनके फंडामेंटल काफ़ी अच्छे होते है पर कुछ वजहों से अपने वास्तविक मूल्य से कम दाम में ट्रैड होते है उन्हें undervalued stocks कहतें है | अगर आप ऐसें स्टॉक को खरीदते है तो आपके multibagger रिटर्न मिलने के चांसेस बढ़ जाते है |

कंपनी पर उधार: कंपनी का उधार कम से कम हो क्योंकि जब कोई जब कोई कम्पनी उधार लेकर काम करती है तो उसे अपने प्रोफिट से सबसे पहले लोन व ब्याज चुकाने पढ़ते है |

अगर आपने कभी उधार लिया होतो आप इसे अच्छे से समझ सकते है |

रिटर्न ओन इक्विटी: अगर कम्पनी का रिटर्न ओन इक्विटी 25% या इससे ज्यादा है तो यह एक अच्छे स्टॉक की निशानी होती है |

इस पोस्ट को उन लोगों को भेजें जिन्हें आप multibagger stocks पहचानने में मदद करना पसंद करेंगें :)
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Mar 28, 2019

फंडामेंटल एनालिसिस क्या है | Fundamental analysis in Hindi

क्या आप जानते है? fundamental Analysis एक निवेशक के लिए महत्वपूर्ण क्यों है ?

Fundamental Analysis क्या है?

Fundamental analysis किसी बिज़नस के intrinsic value को परखने का एक कला है | जब कोई इन्वेस्टर लॉन्ग टर्म के लिए किसी बिज़नस में इन्वेस्ट करना चाहता है ऐसे में उस इन्वेस्टर को बिज़नस के अलग अलग पर्सपेक्टिव को समझना बहुत ही आवश्यक होता है |

Fundamental Analysis महत्वपूर्ण क्यों है ?

अगर कोई निवेशक Fundamentally strong कंपनी को पहचान लेता है तो वह कंपनी उस निवेशक को लॉन्ग टर्म में निश्चित ही अच्छा वेल्थ बना के देती है |

भारतीय Share Market में आपको fundamentally strong कंपनी के कई उदाहरण देखने को मिल जायेंगे | इन कंपनियों ने पिछलें 10 वर्षो में 20% से 30% का वार्षिक compounded रिटर्न दिया है | जैसेः आइचेर्स मोटर्स , पेज इंडस्ट्री आदि |

लेकिन आने वाले वर्षो में ये कंपनिया रिटर्न देगी या नही इसके लिए fundamental analysis जरुरी है |

अब कोई निवेशक जो अपनें निवेश किये गये राशि को 3.5 वर्ष में बढ़ाना चाहता है वह निश्चित ही इस प्रकार के fundamentally strong कंपनी में इन्वेस्टमेंट करना पसंद करेगा इसलिए fundamental analysis करना एक निवेशक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है |

Fundamental Analysis के लिए शिक्षा

Fundamental analysis करने के लिए आपको एक चार्टेड एकाउंटेंट होने कि आवश्यकता नही है और न ही आपको एक कॉमर्स प्रोफेशनल होने की जरुरत है | अगर आपमें नीचें दी गई कौशल है तो आप भी आसानी से fundamental analysis कर सकते है -
  • बेसिक finanacial स्टेटमेंट के समझते हों
  • बेसिक मैथ जैसेः जोड़ , घटाना , गुणा, भाग आदि समझते हों
  • बिज़नस व् इंडस्ट्री के कामकाज को समझते हों
अगर आप थोड़ा सा समय प्रतिदिन देते है तो इन fundamental analysis के कौशल को सीखना बहुत ही आसान है|
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बोनस शेयर क्या है | Bonus Share in Hindi

क्या आप जानते है? बोनस शेयर क्या है? (What is Bonus Share? ) कोई कंपनी बोनस शेयर क्यों और कब देती है?

Bonus Share क्या है?

Bonus Share कम्पनी के द्वारा issue किया जाने वाला शेयर है जिसे कम्पनी अपने शेयर होल्डर्स को रिवॉर्ड या इनाम के रूप में देती है | Bonus share को कंपनी के शेयरहोल्डर फंड्स से issue किया जाता है |

Bonus Share Issue कैसे होता है?

ये शेयर कंपनी के शेयर होल्डर्स को free में दिया जाता है इसलिए इसका अलोटमेंट फिक्स्ड रेश्यो में किया जाता है जैसेः 1:1, 2:1, 3:1, 5:1 आदि | आप को कितना बोनस शेयर मिलेगा यह आपके द्वारा होल्ड किये गयें शेयर के आधार पर तय किया जाता है |
बोनस इशूबोनस से पहले शेयर बोनस से पहले शेयर मूल्यइन्वेस्टमेंट राशिबोनस के बाद शेयरबोनस के बाद शेयर मूल्यइन्वेस्टमेंट राशि
1:1100757,50020037.57500
3:13055016,500120137.516,500
5:120001530,00012,0002.530,000


उपर उदाहरण में आप देख सकते है कि अगर issue रेश्यो 1:1 है तो आपको एक शेयर के साथ में केवल एक शेयर मिलेगा मतलब अगर आपने 100 शेयर होल्ड करके रखे है तो आपके पास 200 शेयर हो जायेंगे, पर आपका इन्वेस्ट किया गया राशि या अमाउंट उतना ही रहेगा|

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Bonus Share कब दिया जाता है?

जब कंपनी के शेयर का मूल्य बहुत ज्यादा हो जाता है तो कंपनी के शेयर को खरीदना एक नये इन्वेस्टर के लिए मुश्किल हो जाता है ऐसें में कंपनी रिटेल पार्टिसिपेशन को बढ़ाने के लिए Bonus Share issue करती है|

बोनस शेयर इशू करने से कंपनी के शेयर की संख्या बढ़ जाता है और उसके प्राइस या मूल्य में भी कमी आती है जिससे ज्यादा इन्वेस्टर कंपनी के शेयर को कम कीमत में खरीद सके|

इस पोस्ट को उन लोगों को भेजों जिन्हे आप Bonus share के बारे में बताना चाहतें है :)
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Feb 7, 2019

डिविडेंड क्या है | Dividend in Hindi

क्या आपको कभी Dividend मिला है ? कोई कंपनी डिविडेंड कब देती है?  इन्तरिम और फाइनल डिविडेंड क्या होता है ?

Dividend क्या है ?

Dividend in hindi

डिविडेंड या लाभांश का मतलब है – कंपनी में लाभ का अंश !

कोई भी कंपनी डिविडेंड या लाभांश कंपनी के द्वारा प्रोफिट्स किये जाने पर कंपनी के शेयर होल्डर्स को देती है |

कोई भी कंपनी प्रति वर्ष Dividend देगी या नही इसे कोई नही जानता है, क्योंकि यह निश्चित नही है कि कंपनी हर साल ग्रोथ करती रहेगी, लेकिन कई ऐसी भी कंपनिया होती है जो लगातार हर वर्ष डिविडेंड देती है इसलिए ऐसी कंपनिया इन्वेस्टर्स को ज्यादा लुभाती है |

Dividend प्रति शेयर के हिसाब से किसी कम्पनी के शेयर होल्डर्स को दिया जाता है |

उदहारण - मान लीजिये अगर आपके पास ABC कम्पनी के 500 शेयर है और कम्पनी ने 1 रुपयें प्रति शेयर डिविडेंड देने की है तो आपको 500 x 1 = 500 रूपये डिविडेंड के रूप में मिलेंगे |

Dividend की घोषणा (Dividend Announcement)

कंपनी के द्वारा डिविडेंड की घोषणा कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के द्वारा Annual General Meetings (AGM) में किया जाता है मतलब डिविडेंड देना है या नही पूरी तरह से कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स पर निर्भर करता है |

क्योंकि कई बार कम्पनी अपने मुनाफे को डिविडेंड न दे करके कम्पनी के नये ब्रांच खोलने या अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए खर्च करती है |

Dividend के प्रकार (Types of Dividend)

कोई भी कंपनी डिविडेंड फाइनेंसियल इयर के अंदर किसी भी समय दे सकती है इसलिए इसके दो प्रकार है -

Intrim Dividend : जब कोई कम्पनी फाइनेंसियल इयर के भीतर डिविडेंड देने की घोषणा करती है तो उसे Intrim Dividend कहते है |

Final Dividend : जब कम्पनी फाइनेंसियल इयर के अंत में डिविडेंड देने की घोषणा करती है तो उसे Final Dividend कहते है |

इसके साथ ही कई मौकों पर कम्पनी Special Dividend (स्पेशल डिविडेंड ) भी दे सकती है |

Dividend Calculations

डिविडेंड को फेस वैल्यू के परसेंटेज के रूप में भी व्यक्त किया जाता है - मान लीजिये कम्पनी ABC ने 5 रुपयें डिविडेंड की घोषणा की है और कंपनी का फेस वैल्यू 1 रूपये है तो paid किया गया डिविडेंड है -

5/1 = 500%

इस तरह कंपनी ने फेस वैल्यू का 500% डिविडेंड दिया है |

Dividend Dates

डिविडेंड की घोषणा कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स Annual General Meetings (AGM) में करती है लेकिन घोषणा के तुरंत बाद ही डिविडेंड नही दिया जाता है क्योकिं शेयर्स सालभर ट्रेड होते है इसलिए किसे डिविडेंड दिया जाये, यह पता करना कठिन होता है |

आप इसे डिविडेंड साइकिल (चक्र ) से समझ सकते है -

Dividend Declaration Date: इस दिन कंपनी अपने शेयर होल्डर को डिविडेंड देने की घोषणा करती है |

Record Date: इस दिन कंपनी अपने शेयर होल्डर्स रजिस्टर की समीक्षा करती है कि किन किन लोगो के पास शेयर्स है, जो डिविडेंड पाने के हक़दार है | आमतौर पर डिविडेंड डिक्लेरेशन्स डेट व रिकॉर्ड डेट के बीच का समय 30 दिन होता है |

Ex Date/Ex Dividend date: यह Last date होता है, अगर इस Date के बाद  किसी ने स्टॉक या शेयर ख़रीदा है, तो उसे डिविडेंड नहीं मिलेगा

Dividend Payout Date: इसी दिन कंपनी अपने हक़दार शेयर होल्डर्स को डिविडेंड देती है |

आप इसे सात लोंगो को भेजें ताकि उनको dividend के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकें :)
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Jan 30, 2019

Penny Stocks क्या होता है | Penny Stocks in Hindi

Penny Stocks in Hindi: क्या आप जानते है? पेनी स्टॉक्स (Penny Stocks ) क्या है?

Penny Stocks image

Penny Stocks क्या है?

Penny Stocks को जानने से पहले हम जान लेते है पेनी क्या होता है , आपने डायलॉग तो सुना ही होगा "मेरे पास एक रुपया नही है "  जिसका अंग्रेजी अर्थ " I Dont Have Any Penny" है |

आपने गौर किया मैंने रूपया और Penny दोनों शब्द का उपयोग किया है क्योंकी अंग्रेजी में सिक्के को Penny कहा जाता है |

अब आपको धीरे - धीरे समझ में आने लगा होगा कि Penny Stocks क्या हो सकते है | अगर आप सोच रहें है कि पेनी स्टॉक एक- दो रूपये में मिलते है तो आपका अनुमान एकदम सही है |

पेनी स्टॉक्स दरअसल वे स्टॉक्स होते है जिनकी दाम बहुत कम होता है इसलिए इन्हें Low Priced Stocks भी कहा जाता है |

लेकिन ध्यान रहें हर कम कीमत वाली स्टॉक्स पेनी स्टॉक्स नही होती है क्योंकि Share Market में उतार चढ़ाव आते रहते है इसलिए स्टॉक्स कई बार कम में मिलने लगते है इसलिए आपको एक पेनी स्टॉक्स को पहचान करना आना चाहिए |

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार
पेनी स्टॉक वे हैं जो बहुत कम कीमत पर व्यापार करते हैं, बहुत कम बाजार पूंजीकरण होता है, ज्यादातर अनूठे होते हैं, और आमतौर पर छोटे विनिमय पर सूचीबद्ध होते हैं। भारतीय शेयर बाजार में पेनी शेयरों की कीमत 10 रुपये से कम हो सकती है। ये स्टॉक प्रकृति में बहुत सट्टा हैं और तरलता की कमी, शेयरधारकों की कम संख्या, बड़ी बोली-पूछ फैलता है और जानकारी के सीमित प्रकटीकरण के कारण अत्यधिक जोखिम वाले माने जाते हैं। 

Penny Stocks का पता कैसे लगाये

भारतीय स्टॉक मार्केट में बहुत सारे पेनी स्टॉक्स है लेकिन पेनी स्टॉक्स को पहचान करने का बेहतर तरीका कौन सा है |
  • 1 रुपयें से लेकर 25-30 रूपये तक के स्टॉक्स को पेनी स्टॉक्स कहा जाता है |
  • इनकी मार्केट कैपिटलाइजेशन भी 100 करोड़ के आस पास होती है |

Penny Stocks में निवेश सही या गलत

अगर हम एक निवेशक की नजर से देखे तो हमें पेनी स्टॉक्स में निवेश सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि एक लॉन्ग टर्म निवेशक प्राइस को देख कर इन्वेस्ट नही करता है | एक अच्छा इन्वेस्टर वह होता है जो कम्पनी के मैनेजमेंट व फंडामेंटल को अच्छे से समझ कर निवेश करता है |

आप भी पेनी स्टॉक्स में इसलिए निवेश न करे क्योंकि वह 10 रूपये में मिल रहा है और 20 रूपये होने में ज्यादा समय नही लगेगा |

किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले क्वालिटी की जांच अवश्य करें ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे | Penny Stocks में नुकसान होने के सम्भावना बहुत ज्यादा होती है |

इसे उन लोगों को भेजें जिन्हें आप penny stocks से होने वाले loss को बताना चाहते है :)
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Jan 28, 2019

ट्रेडिंग अकाउंट क्या है | Trading Account in Hindi

ट्रेडिंग अकाउंट क्या है ?(Trading Account ) व स्टॉक मार्केट में  ट्रेडिंग अकाउंट की जरुरत क्यों होती है ?Trading Account किसके पास खुलवाते है? Trading Account और stock broker में क्या सम्बन्ध है?

Trading Account in hindi

Trading Account क्या है?

Trading Account वह अकाउंट है जिसकी मदद से हम स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदने व बेचने का आर्डर देते है |

अगर आप Share Market में शेयर खरीदना व बेचना चाहते है तो आप ट्रेडिंग अकाउंट के माध्यम से अपना आर्डर दे सकते है | 

इसका मतलब है कि हमें ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता स्टॉक मार्केट से  केवल शेयर खरीदने व बेचने के लिए ही  होती है |

Trading Account व Stock Broker

Trading Account और स्टॉक ब्रोकर में क्या सम्बन्ध है इसका सीधा सा जवाब है अगर ट्रेडिंग अकाउंट रथ है तो स्टॉक ब्रोकर सारथी है |

आप जब भी trading account की मदद से शेयर खरीदने या बेचने का आर्डर देते है तो वह आर्डर सबसे पहले स्टॉक ब्रोकर के पास पहुँचता है उसके बाद स्टॉक ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज में आपके आर्डर को कम्पलीट कराता है |

अगर आप शेयर खरीदना (Buy ) व बेचना (Sell ) करना चाहते है तो आपको एक Trading Account व डीमैट अकाउंट खोलना होता है जिसे आप स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से खुलवा सकते है |

मैं पहले ही डीमैट अकाउंट से संबंधीत पोस्ट लिख चूका हूँ जहाँ मैंने अकाउंट खुलवाने के लिए कौन कौन सी डॉक्यूमेंट की जरुरत होंगी बताया है जिसे आप ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ सकते  है |

Trading Account प्लेटफार्म

स्टॉक ब्रोकर आपके सुविधा के लिए कई तरह के trading platform प्रोवाइड करता है-
जैसेः
  • फ़ोन से ट्रेड करने की सुविधा |
  • स्टॉक ब्रोकर के ऑफिस में जाकर ट्रेड करना |
  • स्मार्टफोन एप्लीकेशन के जरिये |
  • स्टॉक ब्रोकर की वेबसाइट से |
आप इन सभी माध्यम से ट्रेड कर सकते है पर ध्यान रखे स्टॉक ब्रोकर की सर्विसेस व उनकें चार्ज इन सेवाओं पर ही लिए जाते है | क्यों की भारत में फुल सर्विस ब्रोकर व डिस्काउंट सर्विस ब्रोकर दोनों है |

  • शेयर बाजार में  ट्रेडिंग के लिए  ट्रेडिंग अकाउंट की जरुरत होती है।
  • ट्रेडिंग अकाउंट के जरिये ही शेयरों की खरीद - ब्रिकी की जाती है।
  • ट्रेडिंग अकाउंट ब्रोकर के पास खुलवाना होता है। 
  • यह बैंक अकाउंट की तरह होता है।
  • इसे बैंक और डीमैट अकांउट से लिंक किया जा सकता है |
Source: MoneyControl

ये पोस्ट उन सात लोगों भेजें जिन्हें आप Trading Account के बारे में बताना चाहतें है :)
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Jan 24, 2019

ब्लू चिप कंपनी क्या है | Blue Chip Companies in Hindi

Blue Chip Companies in Hindi: स्टॉक मार्केट में निवेश करने वाला हर व्यक्ति कभी न कभी पेनी स्टॉक्स व ब्लू चिप कम्पनी (Blue Chip Companies) के बारे में जरुर सुनता है तो आइये जानते है ये ब्लू चिप शेयर क्या है इससे पहले हमने पेनी स्टॉक्स के बारे में चर्चा कर चुके है |

Blue Chip Companies in Hindi

ब्लू चिप शेयर्स को जानने से पहले हमें ब्लू चिप व ब्लू चिप कंपनी को समझना जरुरी है |

ब्लू चिप कंपनी(Blue Chip Companies)

Blue Chip: अमेरिका के एक खेल पोकर में ब्लू चिप (कॉइन या सिक्का ) शब्द का प्रयोग किया जाता था जिसमे ब्लू चिप सबसे कीमती होता था |

Blue Chip CompaniesShareMarket में ब्लू चिप कम्पनी उन कम्पनी को कहा जाता है जो मिड कैप या लार्ज कैप के अंदर आते  है जिन पर निवेशक का बहुत ज्यादा भरोसा करते है |

ऐसी कम्पनी के शेयर खरीदना निवेशक को रेगुलर लाभ देता है क्योंकि ये कम्पनियां अपने इंडस्ट्री की सबसे टॉप कम्पनियों में से एक होती है |

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव आते रहते है तो आज जो कम्पनी Blue chip है वह फ्यूचर में Blue Chip Companies ही हो ऐसा जरुरी नही है |


ब्लू चिप स्टॉक वित्तीय प्रदर्शन के लंबे इतिहास के साथ बहुत बड़ी और अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त कंपनियों के शेयर हैं। इन शेयरों को बाजार की कठिन परिस्थितियों को सहन करने और अच्छे बाजार की स्थिति में उच्च रिटर्न देने की क्षमता के लिए जाना जाता है।ब्लू चिप स्टॉक में आम तौर पर उच्च लागत होती है, क्योंकि उनकी अच्छी प्रतिष्ठा होती है और वे अक्सर अपने उद्योगों में बाजार के नेता होते हैं। बाजार पूंजीकरण के अनुसार, आज भारत की प्रमुख ब्लू चिप कंपनियां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), कोल इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ONGC, ITC, सन फार्मा, गेल (भारत) हैं। , इंफोसिस, और आईसीआईसीआई बैंक।

Blue Chip Stocks क्या है?

ब्लू चिप कम्पनी व ब्लू चिप शेयर्स एक दुसरे से सम्बंधित है अर्थात शेयर बाज़ार में Blue Chip Companies के शेयर्स को ही ब्लू चिप स्टॉक बोला जाता है |

ब्लू चिप शेयर्स में आपको कुछ विशेषताएं देखने को मिलती है |
जैसेः
  • अपनी इंडस्ट्री का सबसे बढ़ा कम्पनी हो सकती है |
  • मार्केट कैप के आधार पर मिड कैप व लार्ज कैप के अंदर आती है |
  • इन कम्पनियों का मैनेजमेंट और साख अच्छा होता है |
  • ब्लू चिप कम्पनी नियमित तौर पर डिविडेंड की घोषणा करती है |

Blue Chip Stocks से निवेशक को भरोसा

ब्लू चिप कम्पनी पर निवेशक का भरोसा ज्यादा होने कि एक वजह इन कम्पनियों से नियमित तौर पर लाभ पाना है |
ब्लू चिप कम्पनियां में लगातार डिविडेंड दिया जाता है जिससे निवेशक इन कम्पनियों की ओर आकर्षित होते है |

इसमें Liquidity ज्यादा होती है क्योंकि म्यूच्यूअल फंड्स कम्पनियां और Foreign Investor Institutions (FIIs) का ज्यादातर निवेश होता है |

आशा करता हूँ आप सभी को Blue Chip Companies आसानी से समझ आ गया होगा |
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Jan 20, 2019

Bull Market और Bear Market क्या है ? Bull Market vs Bear market

आपने कई बार समाचार चैनल्स में Bull Market और Bear market के बारे में जरुर सुना होगा लेकिन आखिर ये Bull and Bear market होता क्या है | Bear market में लोग डरते क्यों है वही Bull market में लोग बहुत ज्यादा खुश होते है |

Bull Market vs Bear market

Stock Market में उतार चढ़ाव

Bull Market और Bear market के बारे में जानने से पहले आपको शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव को समझ लेना चाहिए |
शेयर बाजार में हर दिन स्टॉक मार्केट खुलने के बाद Bull व Bear के बीच लड़ाई होती है | जिनकी संख्या ज्यादा होती है उस दिन वे जीत जाते है | इन्ही के कारण शेयर बाज़ार में उतार चढ़ाव आते है |

शेयर बाज़ार में स्टॉक के प्राइस कम या ज्यादा होते रहते है कोई शेयर के दाम कभी कभी बहुत तेजी से बढ़ जाते है तो वही कही स्टॉक्स के दाम बहुत तेजी से कम होते है |

बैल व भालू (Bull and Bear)

जैसा की आप जानते है हिन्दी में Bull का अर्थ है – बैल, वही Bear का अर्थ – भालू होता है |

लेकिन बैल और भालू का शेयर मार्केट में क्या काम है, आइये समझने का प्रयास करे बुल व बियर का स्टॉक मार्केट में क्या अर्थ होता है |

Bull का अर्थ है – तेजी, वही Bear का अर्थ – मंदी

अब आइये जानते है एक Bull व Bear स्टॉक मार्केट में कैसे आते है और बुल मार्केट व बियर मार्केट का क्या मतलब होता है -

Bear Market क्या है 

स्टॉक बाज़ार में दो तरह के निवेशक होते है 

पहले वाले आनुमान लगाते है कि आज बाज़ार उपर जायेगा |

दुसरे वाले अनुमान लगाते है कि बाज़ार नीचें जायेगा |

लेकिन जीत उसकी होती है जिसकी मार्केट में संख्या ज्यादा होती है | 

Bear Market की स्थिति तब आती है जब बहुत से लोग शेयर को खरीदने के बजाय बेचने लगते है |

ऐसा किसी खराब खबर के आने पर होता है 

जैसेः

  • कच्चे तेल व डॉलर की कीमत एक साथ बढ़ना |
  • विश्व में आर्थिक मंदी के संकेत |
  • देश विदेश की आंतरिक व बाहरी घटनाएँ आदि |

जब बड़ा Bear Market आता है तो 10 में से लगभग 9 स्टॉक का दाम गिर जाता है या कम्पनी के शेयर के दाम 25% तक या उससे ज्यादा गिर जाता है |

Bull Market क्या है

जैसा की आपने जाना किसी भी स्टॉक मार्केट में दो तरह के निवेशक होते है उनमे जीत उसी की होती है जिनकी संख्या ज्यादा होती है |

Bull Market की स्थिति तब आती है जब बहुत से लोग शेयर को खरीदने लगते है |

ऐसा किसी अच्छी खबर के आने पर होता है |

जैसेः
  • कम्पनियों का प्रॉफिट बढ़ना |
  • देश में चुनाव की अच्छे परिणाम |
  • कच्चे तेल व डॉलर की कीमत एक साथ कम होना |

जब बड़ा Bull Market आता है तो 10 में से लगभग 9 स्टॉक का दाम बढ़ने लगता है या कम्पनी के शेयर के दाम 25% तक या उससे भी ज्यादा बढ़ जाता है |

उम्मीद करता हूँ कि आपको स्टॉक मार्केट में Bull Market vs Bear market का मतलब समझ आ गया होगा |
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Jan 19, 2019

स्टॉक स्पिलिट क्या होता है | Stock Split in Hindi

क्या आपका Stock कभी स्प्लिट हुआ है? Stock Split कब, और क्यों होता है?

Stock Split क्या है?

Split या स्प्लिट का अर्थ = विभाजन (Partition), या टुकड़े करना |

स्टॉक का अर्थ = शेयर या कम्पनी का हिस्सा 

इस प्रकार स्टॉक स्प्लिट का अर्थ शेयर के टुकड़े करना है लेकिन ये स्टॉक स्प्लिट कब ,क्यों और कैसे किया जाता है इसके पीछे किसी कम्पनी का क्या उद्देश्य होता है ?

हर शेयर मे स्पिलिट हो, ऐसा जरुरी नही है लेकिन स्टॉक मार्केट में किसी न किसी कम्पनी का स्टॉक स्पिलिट होता रहता है |

Stock Split कब, क्यों होता है?

स्टॉक स्पिलिट एक कॉर्पोरेट एक्शन होता है और इसका महत्वपूर्ण प्रभाव स्टॉक मार्केट व निवेशक पर पड़ता है |

लेकिन स्टॉक स्पिलिट का सबसे ज्यादा फायदा कम्पनी को होता है | कोई भी कंपनी अपने स्टॉक या शेयर को स्पिलिट इसलिए करती है ताकि कम्पनी शेयर के मूल्य व फेस वैल्यू को कम कर सके |

जिससे नये निवेशक कंपनी के शेयर को आसानी से कम दाम में खरीद सके और कम्पनी को लाभ हो |

Stock Split कैसे होता है?

जब भी कोई कम्पनी स्टॉक स्पिलिट करती है तो उस कम्पनी के शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि उस कम्पनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization ) नही बढ़ता है और न  ही शेयर धारकों की इन्वेस्मेंट वैल्यू बढती है

शेयर धारकों के शेयर कि संख्या बढ़ जाती है,  यह एक प्रकार से बोनस शेयर जारी करने की तरह होता है |

स्टॉक स्पिलिट, फेस वैल्यू को ध्यान में रख कर व निश्चित अनुपात में किया जाता है-

जैसे 1:2 या 1:5

आपके पास Xyz कम्पनी का एक शेयर है जिसका फेस वैल्यू 10 है और स्टॉक स्पिलिट 1:2 अनुपात में होता है 
जिससे उसका फेस वैल्यू बदलकर 5 हो जाता है

आपके पास जो पहले एक शेयर था तो इस प्रकार एक शेयर बढकर दो शेयर हो जायेगा |
स्पिलिट रेश्यो पुराना फेस वैल्यू आपके शेयर स्पिलिट से पहले शेयर के दाम स्प्लिट से पहले निवेशित पूंजी स्पिलिट से पहले नया फेस वैल्यूआपके शेयर स्पिलिट से बादशेयर के दाम स्प्लिट से बाद निवेशित पूंजी स्पिलिट से बाद
1:21010090090,000520045090,000
1:51010090090,000250018090,000
स्टॉक स्प्लिट होने के बाद फेस वैल्यू व शेयर की संख्या बदल गयी है लेकिन शेयर होल्डर्स के द्वारा इन्वेस्ट किया गया पूंजी या राशि में कोई वृद्धि नही हुई है|

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उम्मीद करता हूँ आपको स्टॉक स्प्लिट (Stock Split )  क्या होता है समझ में आया होगा |
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Jan 6, 2019

फेस वैल्यू क्या है | Face value in Hindi

Face Value in Hindi: Face Value का कारपोरेशन एक्शन में क्या महत्त्व है? शेयर Split का फेस वैल्यू पर क्या असर होता है ?

Face Value in hindi

Face Value क्या है ?

स्टॉक का Face value या अंकित मूल्य दिखाता है कि शेयर का वास्तविक मूल्य शेयर प्रमाण पत्र में क्या है | कॉर्पोरेट एक्शन जैसे डिविडेंड और शेयर स्पिलिट, फेस वैल्यू के आधार पर ही लिया जाता है |

उदाहरण: यदि कम्पनी ABC फाइनेंसियल इयर 2012-13 में फाइनल डिविडेंड 60 रूपये देती है वही कंपनी का फेस वैल्यू 5 रूपये है तो कम्पनी ने 60/5= 12 अर्थात कम्पनी ने फेस वैल्यू (5) का 1200%  डिविडेंड दिया |

Face Value व Share Split

जब भी कोई शेयर स्पिलिट होता है तो कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, कोई कंपनी शेयर स्पिलिट तब करती है जब उस कम्पनी के शेयर का भाव बहुत ज्यादा हो जाता है जिससे छोटे निवेशक भी कंपनी के शेयर कम दामों में खरीद सके |
शेयर स्पिलिट के साथ ही शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, आइये इसे उदहारण की मदद से समझने का प्रयास करे |

मान लीजिये आपने कम्पनी ABC का 50 शेयर 200 रूपये के भाव में खरीद रखे है जिसका फेस वैल्यू 10 रूपये  है लेकिन जब शेयर स्पिलिट किया जायेगा तो आपके पास 100 रूपये के 100 शेयर हो जायेंगे और इसका फेस वैल्यू 5 रूपये का हो जायेगा |

आशा करता हूँ आपको Face Value समझ आ गया होगा कि फेस वैल्यू महत्त्वपूर्ण क्यों है |
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बुक वैल्यू क्या है | Book Value in Hindi

BookValue per share की मदद से किसी भी कंपनी के कुल कीमत का कैसे पता लगाया जाता है ? किसी कंपनी का बुक वैल्यू ज्यादा या कम हो तो इसका कंपनी के सेहत से क्या लेना देना है ?
Book Value in hindi

BookValue क्या है?

बुक वैल्यू को जानने से पहले आप से एक सवाल हैं -

जब किसी कंपनी को एक निश्चित समय पर बेचा जायेगा तो आप उस कंपनी के कुल कीमत का पता कैसे लगायेंगे ?

इसका जवाब है बुक वैल्यू (Book Value per Share) , आपने एकदम सही पढ़ा |

Book Value (बुक वैल्यू) किसी भी कंपनी या वस्तु की वह कीमत होती है, जो एक निश्चित समय पर उसे बेचने पर प्राप्त होती है | 

आइये इसे एक उदहारण की मदद से समझने की कोशिश करते है -

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जो बंद होने के कगार पर है अब ऐसे समय में जब कंपनी के एसेट्स (Assets) जैसे जमीन , प्लांट , मशीन आदि को बेचा गया(100 करोड़ ) जिसे रिज़र्व में जोड़ा तो 3500 करोड़ का हुआ |

कंपनी का शेयर कैपिटल 25 करोड़ है मतलब शेयर कैपिटल और रिज़र्व 3525 करोड़ के है |

कम्पनी ने अपने उपर की सारे कर्ज (debts) को चुकाया जो लगभग 1025 करोड़ था |

तो कम्पनी ABC का कुल कीमत 3525 - 1025 = 2500 करोड़ हुआ, लेकिन इस 2500 करोड़ को कंपनी के टोटल शेयर होल्डर के बीच में बांटने पर जो वैल्यू आएगी वही इस कंपनी का बुक वैल्यू होगा |

Book Value Formula

बुक वैल्यू कैलकुलेशन करना बहुत ही आसन है -

Share Capital + Reserves / Total Number of shares = Book Value
शेयर कैपिटल + रिज़र्व / कंपनी के कुल शेयर = बुक वैल्यू

शेयर कैपिटल + रिज़र्व = 2500 करोड़
कुल शेयर की संख्या = 25 करोड़ 

2500 करोड़ / 25 करोड़ = 100 रुपये (बुक वैल्यू )

तो अब आप भी आसानी से इस फार्मूला की मदद से किसी कम्पनी की बुक वैल्यू कैलकुलेट कर के देख सकते हो |

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नेट वर्थ क्या है
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Jan 5, 2019

पीई रेश्यो क्या है | Price Earnings (PE) Ratio in Hindi

 PE Ratio क्या है ? Price Earnings Ratio को कैसे कैलकुलेट किया जाता है? इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " क्यों कहते है |
PE Ratio in Hindi

अगर आप दो शेयरों, दो उद्योगों, दो देशों के बाजारों की तुलना करना चाहते है तो Price Earnings Ratio बहुत ही काम का है।

आप इसकी सहायता से बहुत आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि शेयर का भाव बढ़ने की कितनी संभावना है |

PE Ratio क्या है ?

PE रेश्यो यानि कि Price Earnings Ratio सबसे पोपुलर रेश्यो है और सब कोई इसे जानना पसंद करते है |
इसकी पॉपुलैरिटी के कारण इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " भी कहते है | हम EPS की मदद से PE रेश्यो कैलकुलेट करते है |

ईपीएस क्या है | EPS Full Form in Hindi

इसका फार्मूला है -
Market Price / EPS = PE Ratio 
शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय = PE रेश्यो

आप किसी भी कम्पनी का PE रेश्यो तबतक नहीं जान सकते है जबतक आप उसकी EPS नही जान लेते है |

आइये इसे उदहारण की सहायता से समझने की कोशिश करे , एक कंपनी JKL है जिसके 10 लाख शेयर से कंपनी को  20 लाख Earnings (शुद्ध लाभ ) हुआ और इस कम्पनी के शेयर का मार्केट प्राइस (शेयर की बाजार में कीमत) 40 रूपयें है |


तो इसका EPS 20 लाख / 10 लाख = 2 रूपये होगा |

जबकि इसका PE ratio होगा-

40 / 2 = 20 रुपयें 

इसका एक मतलब ये भी होता है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स प्रति यूनिट प्रॉफिट पाने के लिए 20 गुना ज्यादा पैसे देने को तैयार है |

PE Ratio कैसे प्रयोग करे?

Price Earnings Ratio का प्रयोग कर आप किसी कंपनी के ग्रोथ बढ़ने या घटने का अंदाजा भी लगा सकते है | इसके लिए कम्पनी के पिछलें कुछ सालों का रिकॉर्ड देखियें और पता करे कि मैक्सिमम PE कितना था उसके बाद पुरे इंडस्ट्री के औसत PE को पता करे और अंत में पुरे बाजार का औसत PE पता करके एक दुसरे से तुलना करे |

ध्यान रखने वाली बात (points to remember)

  • कभी भी केवल PE रेश्यो को ही देखकर निवेश न करे |
  • पूरी कंपनी व बिज़नेस की फंडामेंटल एनालिसिस करे |
  • PE दिखाता है कि कोई शेयर सस्ता या महंगा ट्रेड हो रहा है | 
  • ज्यादातर लोग 21 से ज्यादा PE वाले स्टॉक पर इन्वेस्ट नही करते |
" किसी कंपनी का पीई रेशियो निश्चित संख्या नहीं होता. यह हमेशा बदलता रहता है. मान लीजिए किसी कंपनी का पीई रेशियो आज 20 है. इसका मतलब यह नहीं है कि यह हमेशा 20 रहेगा. कंपनी के प्रदर्शन और शेयर बाजार में उसके शेयर की कीमत के अनुसार यह रेशियो घटता-बढ़ता रहता है. कंपनी के अच्छा मुनाफा कमाने पर उसके शेयरों की मांग बढ़ती है. इससे उसका पीई रेशियो बढ़ जाता है. इसी तरह अगर किसी कंपनी को नुकसान हुआ है तो इसके पीई रेशियो में गिरावट आ सकती है."
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EPS Full Form क्या है पूरी जानकारी | What is EPS in Hindi

EPS in Hindi: EPS क्या है ? एक नये निवेशक को EPS के बारे में क्यों जानना चाहिए ? आज हम EPS Formula के मदद से EPS Calculate करेंगे |
eps full form in hindi

EPS Full Form

EPS Full Form - इसका पूरा नाम Earnings Per Share है, किसी भी कंपनी के आर्थिक सेहत जानने के लिए आप उस कंपनी के EPS को पता करे इससे आपको कम्पनी के तिमाही, वार्षिक ग्रोथ का अंदाजा लग जायेगा |

EPS(Earnings Per Share) को समझने के लिए  हम इसके सारे शब्दों को अलग करेंगे |

अर्निंग्स (Earnings ) =  कितना कमाई हुआ

पर (Per) = प्रति /  प्रत्येक /हरेक /हरएक

शेयर (Share) = कम्पनी का शेयर 

अब आप इनके अर्थो को एक साथ मिला कर अर्निंग्स पर शेयर (Earnings Per Share) को आसानी से समझ सकते है 
EPS = कंपनी के प्रत्येक शेयर ने कितना कमाई किया |

अमर उजाला समाचार के अनुसार
" यह कंपनी के शुद्ध लाभ का वह भाग होता है जो जारी किये गए प्रत्येक शेयर (प्रतिभूति) पर दिखाया जाता है। यह कंपनी के लाभ को प्रति शेयर के अनुसार दर्शाता है। 
सामान्य शब्दों में समझें तो अर्निंग प्रति शेयर का संबंध प्रति शेयर होने वाली आमदनी से होता है। यह शेयरधारकों को होने वाले प्रति शेयर शुद्ध लाभ या हानि को व्यक्त करता है। कंपनी के शेयर मूल्य निर्धारण में इसका अहम रोल होता है।"

EPS Calculation

EPS Formula का प्रयोग करके आप आसानी से किसी भी कंपनी का EPS Calculation कर सकते है |

शुद्ध लाभ / कुल शेयरों की संख्या
Net Profit / Total Number of Shares

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जिसके मालिक ने 1 लाख शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट करा रखे है |

पहले वर्ष कम्पनी ने अपने व्यापर से 40 लाख रूपये का अर्निंग्स (Earnings)  या शुद्ध लाभ(Net profit) करती  है अर्थात इस वर्ष कंपनी का Earnings Per Share 40 रूपयें रहेगा |

40 लाख / 1 लाख = 40 रुपयें

ये भी पढ़े :

ईपीएस से PE रेश्यो कैसे निकालते है ?

शेयर बाजार और म्युचुअल फंड

Face value in Hindi | फेस वैल्यू क्या है

दुसरे वर्ष कंपनी को व्यापर में घाटा होता है जिससे कम्पनी केवल 20 लाख रूपये का अर्निंग्स (Earnings) ही करती इसलिए कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर घटकर 20 रूपयें हो जाता है  | 

20 लाख / 1 लाख = 20 रुपयें

तीसरे वर्ष कंपनी के मालिक सेल्स पर फोकस करते है जिससे कम्पनी की अर्निंग्स (Earnings) बढ़कर 60 लाख रूपये हो जाती है इसलिए कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर  भी बढ़कर 60 रूपयें हो जाता है | 
60 लाख / 1 लाख = 60 रुपयें

आपने देखा कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर कंपनी के शुद्ध लाभ(Net profit) में उतार चढ़ाव के साथ घटती बढती रहती है |

इसे उन सात लोगों को भेजें जिन्हें आप EPS के बारे में बताना चाहतें है :)
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