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Mutual Fund in Hindi - म्युचुअल फण्ड क्या है और इसमें पैसे लगाने के क्या फ़ायदे है

फ़रवरी 06, 2022 Add Comment
Mutual Fund in Hindi - म्युचुअल फण्ड क्या है और इसमें पैसे लगाने के क्या फ़ायदे है
म्युचुअल फण्ड क्या है ? अगर यह सवाल आप मुझसे चार - पांच साल पहले पूछते तो मैं आपको यह नहीं बता पाता, लेकिन शुक्र है इंटरनेट और संयोग का, कि मुझे पर्सनल फाइनेंस से जुड़ा एक बहुत ही शानदार बुक मिला (रिच डैड पुअर डैड ), जिसमें यह बताया गया कि हम कैसे अपने पैसे से काम करा सकते है और उससे पैसे कमा सकते है और फिर मैंने उस दिन से फाइनेंसियल विषयों के बारे में सीखना शुरू किया, जिसमें म्युचुअल फण्ड भी एक है |

म्युचुअल फण्ड क्या है ( What is Mutual Fund in Hindi)


म्यूचुअल फंड, अपने पैसे को इन्वेस्ट करके रिटर्न कमाने का एक ऑप्शन है जिसमें बहुत सारे अलग अलग इन्वेस्टर्स से पैसा इकट्ठा करके, उस पैसे से सोना, ज़मीन, बांड या कंपनियों का शेयर खरीदा जाता है और फिर होने वाले फ़ायदे को उन्हीं इन्वेस्टर्स के बीच में बांटा जाता है जिन्होंने अपने पैसे लगाये है |

म्युचुअल फण्ड इन दिनों काफी पोपुलर हो रहा है क्योंकि यह अन्य ट्रेडिशनल निवेश जैसेः सोना, जमीन जायदाद, फिक्स्ड डिपोजिट आदि से ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखता है, और म्युचुअल फण्ड में लॉन्ग टर्म में औसतन 14% का रिटर्न कमाया जा सकता है |

म्युचुअल फण्ड में जब कोई  निवेश करता है तो उसे म्यूच्यूअल फण्ड का यूनिट दिया जाता है | यह म्युचुअल फण्ड यूनिट, इन्वेस्टर्स को उनके लगायें गए पैसों के आधार पर मिलता है, जो ज्यादा पैसा लगाता है उसे ज्यादा म्युचुअल फण्ड यूनिट मिलता है और जो कम पैसा लगाता है उसे कम  म्युचुअल फण्ड यूनिट मिलता है |

म्युचुअल फण्ड की एक खास बात यह भी है कि इसमें कोई भी इन्वेस्ट कर सकता है, और कम पैसों जैसे 500 - 1000 रुपयों से भी इन्वेस्ट कर सकता है  और अपने फाइनेंसियल लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है | 

म्युचुअल फण्ड में पैसा लगाने के क्या फायदें है

चक्रवृद्धि ब्याज़ - म्यूचुअल फंड में निवेश करके चक्रवृद्धि ब्याज (रिटर्न) कमा सकते हैं, एक अच्छा म्यूचुअल फंड, लॉन्ग टर्म में औसतन 14% का रिटर्न दे सकता है , जो फ़िक्स्ड डिपॉज़िट के ब्याज से ज्यादा है|

लचीलापन - म्यूचुअल फंड में लगे पैसों को, आप कभी भी, व कहीं से भी निकाल सकते है, पैसा 3 से 5 दिन के भीतर आपके अकाउंट में जमा हो जाता है |

पारदर्शी -.म्यूचुअल फंड में लगे आपके पैसों को, आप रोजाना, महीने, साल में कभी भी देख या चेक कर सकते है

प्रोफेशनल मेनेजर - हर म्यूचुअल फंड को मैनेज करने के लिए एक एक्सपर्ट फंड मैनेजर होता है जो अपने अनुभव से पैसे को सही जगह पर इन्वेस्ट करके इन्वेस्टर्स को रिटर्न दिलाता है |

कम पैसों से शुरुआत - कम पैसों से भी म्यूचुअल फंड में निवेश करके अपने फाइनेंशियल लक्ष्य को पाया जा सकता है, आप इसमें 500-1000 रुपए से शुरुआत कर सकते हैं |

डाइवर्सीफिकेशन - म्यूचुअल फंड का पैसा गोल्ड, ज़मीन, बॉन्ड, कंपनियों के शेयरों में लगता है जिससे रिस्क सभी में बंट जाता है | क्योंकि एक साथ जमीन, या सोना या शेयर का दाम नहीं गिर सकता है |

टैक्स लाभ - म्यूचुअल फंड में निवेश करके टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं, इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के माध्यम से 1.5 लाख तक म्यूचुअल फंड के ईएलएसएस (ELSS) फंड में निवेश करके टैक्स छूट ले सकते हैं |

सुरक्षित निगरानी - सभी म्यूचुअल फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) निगरानी करती है, जो इन्वेस्टर्स के पैसों के साथ धोखाधड़ी न हो इसका पूरा ध्यान रखती हैं, और यदि कोई धोखाधड़ी करता है तो उन पर कड़ी कानूनी कार्यवाही भी करती हैं |

तो म्युचुअल फण्ड क्या है, अब यह आपकों किसी से पूछने के जरूरत नहीं है, मेरे ख्याल से अब आप चार लोगों को बता सकते है कि म्युचुअल फण्ड क्या है और इसके क्या फायदे है |

Mutual Fund कितने प्रकार के होते है ? Mutual Fund Types in Hindi

अक्तूबर 13, 2021
एक बेहतर निवेशक बनने व लाभ लेने के लिए Mutual Fund के सभी प्रकार को समझना आवश्यक है | इस पोस्ट में चर्चा करेंगे कि Mutual Fund कितने प्रकार के होते है ?
Mutual Fund कितने प्रकार के होते है

Mutual Fund कितने प्रकार के होते है?

Mutual Fund बहुत सारे अलग अलग लोगों से एकत्रित किया हुआ बहुत सारा पैसा है जिसे इन्वेस्टमेंट के लिए लोगों से, लोगों के फायदे के लिए कलेक्ट किया जाता है |

लेकिन क्या कोई एक ही कम्पनी इन सारे फंड्स को कलेक्ट या मैनेज करने का काम करती है तो ऐसा नही है |

भारत में लगभग 50 से भी ज्यादा म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी काम कर रही है जो लोगों का पैसा इकठ्ठा करती है |

जिसकी वजह से हमारे पास बहुत सारे ऑप्शन्स ( Mutual Funds Scheme ) है जिसे अलग अलग कम्पनिया प्रोवाइड करती है |

Mutual Fund Types

म्युचुअल फंड्स में निवेश करने उद्देश्य अलग अलग हो सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए कोई भी म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी अपने स्कीम लाती है |

Based on Asset Class (एसेट क्लास पर आधारित )

इस प्रकार के फंड्स अलग अलग एसेट में इन्वेस्ट करते है जैसे: बांड्स, शेयर, आदि | 
  • Equity Funds
  • Debt Funds
  • Hybrid or Balanced Funds
  • Tax - Saving Funds
  • Sector Funds
  • Index Funds
  • Funds of Funds

Based on Structure (स्ट्रक्चर पर आधारित )

स्ट्रक्चर आधारित म्यूच्यूअल फंड्स वे होते है जो एक निश्चित समय में ख़रीदा एक बेचा जा सकता है -
  • Closed-Ended Funds
  • Open-Ended Funds

Based on Investment Objective(लक्ष्य पर आधारित )

इस प्रकार के म्यूच्यूअल फंड्स स्कीम आपके इन्वेस्टमेंट लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया जाता है -
  • Growth Funds
  • Income Funds
  • Liquid Funds

Monthly Income Plan क्या है और कैसे काम करता है | Monthly Income Plan in Hindi

दिसंबर 15, 2019 1 Comment
क्या आप जानते है Monthly Income Plan क्या है? और Monthly Income Plan से हर महीने आप कैसे इनकम कर सकते है? तो चलिए आज जानते है मंथली इनकम प्लान कैसे काम करता है और आप किस तरह से इसका फायदा उठा सकते है |
Monthly Income Plans hindi

Monthly Income Plan क्या है (Monthly Income Plan in Hindi)

इस प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड, हाइब्रिड फण्ड होते है, जिसमे निवेश किया गया पैसा, डेब्ट, इक्विटीज आदि में लगाया जाता है |

इस तरह के फण्ड में डेब्ट व इक्विटी रेश्यो 80:20 का होता है, जो इसे एक डेब्ट आधारित फण्ड बना देती है |

मंथली इनकम प्लान का ज्यादा पैसा (80%) डेब्ट सिक्योरिटीज में लगाये जाने के कारण यह फण्ड कम रिस्क व कम रिटर्न वाले हो जाते है, जबकि (20%)इक्विटी में लगाये गये पैसे थोड़े बेहतर रिटर्न देते है |

मंथली इनकम प्लान में जो इनकम एक निवेशक हर महीने उम्मीद करता है वह इनकम पूरी तरह से अतिरिक्त (सरप्लस) मनी होने पर ही निवेशकों में बांटा जाता है|

जिस प्रकार स्टॉक में निवेश करने से शेयर होल्डर्स को प्रॉफिट का कुछ हिस्सा (ज्यादा प्रॉफिट होने पर) समय-समय में डिविडेंड के रूप में दिया जाता है, ठीक उसी प्रकार हाइब्रिड फण्ड मतलब Monthly Income Plan में भी दिया जाता है |

"मंथली इनकम प्लान" सुनने से लगता है कि इस प्रकार के फण्ड में हर महीने निवेशकों को इनकम दिया जाता होगा लेकिन अगर सरप्लस मनी (अतिरिक्त प्रॉफिट) नही है तो निवेशकों को इनकम नही मिलती है |

म्यूच्यूअल फण्ड में बाजार आधारित रिस्क होते है इसलिए Monthly Income Plan के रिटर्न या इनकम भी बाजार के रिस्क पर डिपेंड होते है |

Monthly Income Plan में निवेश करने से पहले ध्यान रखें

  • इस फण्ड में हर महीने इनकम की कोई गारंटी नही है क्योकिं यह बाजार रिस्क पर आधारित है |
  • इस फण्ड का पैसा 80% डेब्ट सिक्योरिटीज व 20% इक्विटी में लगाया जाता है|
  • मंथली इनकम प्लान में डेब्ट व इक्विटी निवेश होने के कारण रिस्क व रिटर्न बैलेंस्ड होता है |

Liquid Fund क्या है और कैसे काम करता है | Liquid Fund in Hindi

दिसंबर 14, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है Liquid Fund क्या होता है ? और आपको Liquid Fund में कितने समय के लिए पैसे लगाने सही है? व Liquid fund के क्या-क्या फायदे है ? तो आइये देखते है Liquid Fund से जुड़ी सारी जानकारी को |

Liquid Fund in Hindi

Liquid Fund क्या है? (Liquid Fund in Hindi)

Liquid Fund एक प्रकार का डेब्ट फण्ड है, डेब्ट फण्ड जिसमे लगाया गया पैसा लॉन्ग टर्म के लिए डेब्ट सिक्योरिटीज व मनी मार्केट सिक्योरिटीज जैसे गवर्मेंट बांड, कमर्शियल पेपर, आदि में निवेश किया जाता है, जिनका मैच्योरिटी 91 दिन का होता है |

Liquid Fund उन निवेशक के लिए एक बेहतर आप्शन हो सकता है जो शोर्ट टर्म के लिए अपने आइडियल पड़े हुए पैसे को कम रिस्क के साथ, कम समय के लिए निवेश करना चाहते है | इस फण्ड से आपको सेविंग अकाउंट से बेहतर रिटर्न मिल सकता है |

Liquid Fund के लाभ

हाई लिक्विडिटी- लिक्विड फण्ड अपने लिक्विडिटी के लिए ही पोपुलर है | इन्वेस्टर जब चाहे तब अपना फण्ड निकाल (रिडीम) सकते है और 1-2 दिन के अंदर आपका पैसा आपके दिए गये बैंक अकाउंट में आ जाता है |

हाई रिटर्न- लिक्विड फण्ड लॉन्ग टर्म (3 वर्ष से अधिक) में आपको 7% का रिटर्न दे सकता है, और यह रिटर्न एक सेविंग बैंक अकाउंट में दिए गये रिटर्न से बेहतर है |

कम रिस्क - लिक्विड फण्ड का पैसा कम समय में मैच्योर होने वाले सिक्योरिटीज व हाई क्रेडिट रेटिंग सिक्योरिटीज में लगाया जाता है इसलिए इस फण्ड में कम रिस्क होता है |

करोड़पति कैसे बनें | Crorepati Kaise Bane

दिसंबर 10, 2019 Add Comment
करोड़पति, crorepati, karodpati क्या शब्द है न, और इसी शब्द को हर कोई अपने नाम के साथ लगाने के लिए कड़ी मेहनत करते है | लेकिन करोड़पति कैसे बनें? crorepati बनने के लिए क्या करें ? तो चलिए आज जानते है करोड़पति बनने का अचूक उपाय, यहाँ पर मैंने "अचूक" इसलिए लिखा है क्योकिं यह उपाय जो मैं बता रहा हूँ, उस रास्तें पर कई करोड़पति बनकर निकल चुके है | बस आपको भी उसे रास्तें पर चलना है |

Crorepati Kaise Bane

करोड़पति कैसे बनें ( Crorepati Kaise Bane )

अगर आपके पास एक करोड़ आ जाते है तो आपको अमीर की उपाधि तो मिल ही जाती है, लेकिन क्या आप जानते है? अमीर या करोड़पति बनने के लिए क्या करना पड़ता है? कैसे एक आम इन्सान करोड़पति बन सकता है? 

अगर आपका लक्ष्य करोड़पति बनना है तो आपको यह निर्धारित करना होता है कि आप कितने वर्ष (10 साल, 15 साल) में करोड़पति बनना चाहते है? मतलब अगर आप 20 या 25 साल के है तो शायद आप 40 वर्ष या 45 वर्ष में करोड़पति बनना चाहते होंगे  या फिर हो सकता है कि आप और भी जल्दी करोड़पति बनना चाहते है |

How to Become Crorepati with Mutual Funds

करोड़पति बनने के लिए जो उपाय मैं बताने जा रहा हूँ उसका नाम है "म्यूच्यूअल फण्ड" जी हाँ, म्यूच्यूअल फण्ड एक ऐसा रास्ता है, जो आपको करोड़पति बनाने में मदद कर सकता है | अभी आपके मन में यह प्रश्न आ सकता है कि यह म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?

म्यूच्यूअल फण्ड, निवेश का एक बेहतर विकल्प होता है | म्यूच्यूअल फण्ड से औसतन 15% तक का रिटर्न कमाया जा सकता है |

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करके करोड़पति बनने के लिए, म्यूच्यूअल फण्ड का रिटर्न व आपके द्वारा निवेश किया गया पैसा ही बताता है कि आप कितनी जल्दी करोड़पति बन सकते है|

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में 5000 रूपये, हर महीनें SIP के जरिये निवेश करते है व आपको 12% का रिटर्न मिलता है तो आपको करोड़पति बनने में 26 साल लगेंगे | यदि आप 10000 हज़ार रूपये, हर महीने निवेश करते है व 12% का औसत रिटर्न मिलता है तो आप 21 साल में करोड़पति बनेगें |

इसी प्रकार 17 साल में करोड़पति बनने के लिए आपको 15000 रूपये हर महीनें SIP निवेश करनी है व यदि 12% का औसत रिटर्न मिलते है |

तेज़ी से करोड़पति कैसे बनें?

यदि आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करके तेजी से करोड़पति बनना चाहते है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होता है-

ज्यादा पैसे निवेश करना- आपने देखा जैसे-जैसे हमने निवेश के अमाउंट को 5000 से 15000 किया, करोड़पति बनने का समय 26 साल से घटकर 17 साल हो गया | मतलब आप ज्यादा पैसो का निवेश करके जल्दी करोड़पति बन सकते है |

म्यूच्यूअल फण्ड स्कीमों का विकल्प- म्यूच्यूअल फण्ड में कई विकल्प होते है, जैसे डेब्ट व इक्विटी | अगर आप डेब्ट फण्ड में निवेश करते है तो इक्विटी फण्ड से कम रिटर्न मिलते है क्योकिं डेब्ट फण्ड का पैसा सुरक्षित सिक्योरिटीज में लगाये जाते है व इनमे कम रिस्क होता है | जैसे सरकारी बांड, अच्छे रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बांड आदि|

अगर आप इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते है तो आपको डेब्ट फण्ड से ज्यादा रिटर्न मिलता है व इसमें रिस्क भी ज्यादा होता है क्योकि इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा कंपनियों के शेयर में लगाये जाते है |

अगर आप इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करके जल्दी करोड़पति बनना चाहते है तो आपको इससे जुड़ें हुए सारे रिस्क को अवश्य जाने |

नोट: यह पोस्ट केवल शिक्षा/ज्ञान को बांटने के लिए है | किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड, शेयर बाजार आदि में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जुरूर करें|

Income Fund क्या हैऔर कैसे काम करता है - Income Fund in Hindi

दिसंबर 07, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है Income Fund क्या होता है ? और आपको Income Fund में कितने समय के लिए पैसे लगाने सही है? व Income fund के क्या-क्या फायदे है ? तो आइये देखते है इनकम फण्ड से जुड़ी सारी जानकारी को |

Income Fund in Hindi

Income Fund क्या है (Income Fund in Hindi)

इनकम फण्ड एक प्रकार का डेब्ट फण्ड है, डेब्ट फण्ड जिसमे लगाया गया पैसा लॉन्ग टर्म के लिए डेब्ट सिक्योरिटीज जैसे गवर्मेंट बांड, डिबेंचर, कॉर्पोरेट बांड आदि में निवेश किया जाता है |

Income Fund उन निवेशकों के लिए बेहतर आप्शन होता है जो 4 साल के लिए व मीडियम रिस्क के साथ अपना पैसा निवेश करना चाहते है | सेबी के अनुसार इनकम फण्ड दो केटेगरी के हो सकते है

मीडियम से लॉन्ग टाइम - इस तरह के फण्ड में आप कभी भी पैसा लगा सकते है, यह फण्ड ओपन एंडेड डेब्ट फण्ड होता है | इस तरह के फण्ड का पैसा 4-7 वर्ष के लिए मनी मार्केट व बांड जैसे सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है |

लॉन्ग टाइम - इस प्रकार के फण्ड में आप 7 से अधिक वर्ष के लिए अपना पैसा निवेश कर सकते है |

Income Fund के लाभ

टैक्स लाभ- अगर आप इनकम फण्ड को लॉन्ग टर्म (3 वर्ष बाद ) के लिए होल्ड करके रखते है तो आपको इससे टैक्स लाभ मिलता है | इसमें आपको जनरल टैक्स स्लैब के बजाय लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है | लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में आप महंगाई को भी एडजस्ट कर सकते है |

बेहतर रिटर्न - इनकम फण्ड में निवेश करने से आपको फिक्स्ड डिपाजिट से बेहतर रिटर्न मिलता है | बस फर्क सिर्फ इतना है कि इनकम फण्ड में इंटरेस्ट रेट रिस्क होता है, जबकि फिक्स्ड डिपाजिट में नही होता है |

लिक्विडिटी- इनकम फण्ड में फिक्स्ड डिपाजिट की तरह कोई फिक्स लॉक इन पीरियड नही होता है | एक निवेशक कभी भी एग्जिट लोड चार्ज को ध्यान में रखकर पैसे इनकम फण्ड से निकाल सकता है |

AMFI क्या है और क्या काम करता है | AMFI in Hindi

दिसंबर 07, 2019 Add Comment
AMFI क्या है? और AMFI क्या काम करता है ? एम्फी का म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री में क्या रोल है? तो चलिए आज AMFI के बारे जानते है, इसका म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री में क्या रोल है |

AMFI in Hindi

AMFI क्या है (AMFI in Hindi)

AMFI भारत की एक ऐसी संस्था है, जो म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री से जुड़े हुए मामलों को समाधान निकालती है | AMFI, इन्वेस्टर्स के म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश पैसो को कोई नुकसान न हो, इसके लिए SEBI (कैपिटल मार्केट रेगुलेटर ) के साथ मिलकर काम करती है |

इस प्रकार SEBI व AMFI, म्यूच्यूअल फण्ड निवेश को सुरक्षित बनाने व निवेशकों को भरोसा दिलाने में  एक अहम भूमिका निभाती है|

अगर कोई कंपनी, व्यक्ति, संस्था आदि म्यूच्यूअल फण्ड डोमेन में काम करना चाहती है तो इन सबको अपना डिटेल्स AMFI के पास रजिस्टर कराना होता है |  इसके साथ ही एम्फी के द्वारा बनाये गये नियमों व अनुशासनों का कड़ाई से पालन करना होता है |

AMFI के कार्य

AMFI के प्रमुख कार्य नीचें दिए गये है -
  • म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री का विकास करना
  • म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों को SEBI को बताना
  • म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री में प्रोफेशनल व इथिकल स्टैंडर्ड को बनाना व मेन्टेनेन्स करना
  • निवेशको के इंटरेस्ट को बनाये रखना
  • म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में प्रचार-प्रसार करना व निवेशको/लोगों को म्यूच्यूअल फण्ड के लाभ आदि से अवगत करना
  • म्यूच्यूअल फण्ड हाउस को बिज़नस को प्रभावी रूप से चलाने व कोड ऑफ़ कंडक्ट को अनुसरण करने के लिए बताना

सिस्टेमेटिक विड्रावल प्लान (SWP) क्या है - Systematic Withdrawal Plan Hindi

दिसंबर 06, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है सिस्टेमेटिक विड्रावल प्लान (SWP) क्या है? और म्यूच्यूअल फण्ड Systematic Withdrawal Plan (SWP) कैसे काम करता है? तो चलिए आज जानते है Systematic Withdrawal Plan क्या है व इसके क्या-क्या फायदे है?
Systematic Withdrawal Plan hindi

सिस्टेमेटिक विड्रावल प्लान क्या है Systematic Withdrawal Plan(SWP)

Systematic Withdrawal Plan एक तरीका है जिससे एक निश्चित समय (मासिक, त्रैमासिक, छमाही, या वार्षिक) पर आप अपने म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा आपकी जरुरत के हिसाब से जब चाहे तब निकाल सकते है|

मतलब Systematic Withdrawal Plan(SWP), म्यूच्यूअल फण्ड की एक सुविधा है जो आपको एक निश्चित अमाउंट, एक निश्चित समय पर निकालने की अनुमति देती है|

जब आप म्यूच्यूअल फण्ड से Systematic Withdrawal Plan के द्वारा पैसा निकालते है तो आपके द्वारा म्यूच्यूअल फण्ड में  इन्वेस्टमेंट किया गया पैसा, हर Withdrawal रिक्वेस्ट के साथ कम होता है |

उदाहरण: अगर आपने 1 लाख रूपये जुलाई 2017 में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया था जो बढ़कर दिसंबर 2018 तक 120000 हो गई तो जब आप Systematic Withdrawal Plan के द्वारा 2019 के जनवरी, फरवरी, मार्च में हर महीने 10 हजार निकालते है तो आपका 90 हजार रूपये म्यूच्यूअल फण्ड में बचे रहेंगे |

सिस्टेमेटिक विड्रावल प्लान (SWP) के फायदे

SWP से आप समय-समय में एक फिक्स्ड इनकम प्राप्त कर सकते है, जिस पैसे का उपयोग आप रिटायरमेंट के बाद की जरूरत या बच्चो के शिक्षा सम्बन्धी खर्च के लिए कर सकते है|

SWP से निकालें गये म्यूच्यूअल फण्ड के पैसे से टैक्स लाभ भी लिया जा सकता है क्योकि सरकार द्वारा टैक्स इनकम पर लिया जाता है, लेकिन जब आप SWP के जरिये अपने पैसे म्यूच्यूअल फण्ड से निकालते है तो यह आपका पैसा व इनकम दोनों मिक्स माना जाता है|

जैसे अगर आपने 1 लाख निवेश किया था जो बढ़कर 1 लाख 10 हजार हो गया मतलब आपको 10% का इनकम हुआ | अब जब आप 10 हजार रूपये SWP के जरिये निकालते है तो पूरा पैसा इनकम नही कहलायेगा बल्कि 1 हजार ही इनकम होगा और 9 हजार आपका मूलधन |

म्यूच्यूअल फण्ड KYC कैसे करें | How to Complete Your Mutual Funds KYC in Hindi

दिसंबर 05, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है म्यूच्यूअल फण्ड KYC क्या है और KYC कैसे करते है? तो चलिए जानते है क्यों म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के लिए KYC कराना जरुरी होता है |

Mutual Funds KYC in Hindi

अगर आप किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश/ इन्वेस्ट करना चाहते है तो आपको KYC कराना पड़ता है | KYC (Know your Customer ) कस्टमर मतलब आपके बारे में (नाम, पता, व्यवसाय आदि ) को जानने का वन टाइम प्रोसेस होता है अर्थात KYC कम से कम एक बार करना जरुरी है |

सेबी ( जो कैपिटल मार्केट को कण्ट्रोल करता है ) ने म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्टमेंट करने वालों के लिए KYC प्रक्रिया पूरा करना अनिवार्य कर रखा है ताकि धोखाधड़ी गतिविधियों को रोका जा सके |

म्यूच्यूअल फण्ड KYC कैसे करें

Mutual Fund की KYC आप नीचे दिए किसी भी सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियारीज के पास पूरा कर सकते है -

  • KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) जैसेः डिपाजिटरी (CSDL, NDSL), CAMS आदि
  • एसेट मैनेजमेंट एजेंसी

इन सब सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियारीज से म्यूच्यूअल फण्ड KYC आप ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते है |

Mutual Funds KYC कैसे करें -Offline

  • फण्ड हाउस (एसेट मैनेजमेंट कंपनी) के ऑफिस या KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी के ऑफिस जाये
  • KYC फॉर्म भरकर अपना एड्रेस व पहचान का प्रमाण दे |
  • आधार कार्ड व पैन कार्ड

Mutual Funds KYC कैसे करें - Online

  • फण्ड हाउस या KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी के वेबसाइट पर जायें व अपना एक इन्वेस्टर अकाउंट बनाये
  • अपने आधार लिंक मोबाइल number से अपने अकाउंट को वेरीफाई करें
  • अपने आधार कार्ड व पैन कार्ड की स्कैन कॉपी अपलोड करें


म्यूच्यूअल फण्ड कट ऑफ टाइम क्या है - Mutual Fund Cut-off Timings Hindi

दिसंबर 03, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है म्यूच्यूअल फण्ड कट ऑफ टाइम क्या है, और Mutual Fund Cut-off Timings का आपके निवेश पर क्या प्रभाव पड़ता है? तो चलिए म्यूच्यूअल फण्ड कट ऑफ़ टाइम को समझते है और जानते है कट ऑफ़ टाइम क्यों जानना आवश्यक है|

Mutual Fund Cut-off Timings

म्यूच्यूअल फण्ड कट ऑफ टाइम क्या है (Mutual Fund Cut-off Timings)

Mutual Fund Cut-off Timings यह बताता है कि अगर हम म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स खरीदते या बेचते है तो उस समय में म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स का दाम क्या होगा मतलब म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स का NAV (net asset value) क्या होगा |

Mutual Fund Cut-off Timings लिक्विड फण्ड, इक्विटी फण्ड व डेब्ट फण्ड में अलग अलग होती है | जैसे इक्विटी फण्ड के लिए कट ऑफ़ टाइम दोपहर 3 बजे का होता है | चलिए इन्हें और डिटेल में समझते है|

इक्विटी फण्ड- इस फण्ड का कट ऑफ़ टाइम 3 बजे का होता है मतलब अगर आप 3 बजे से पहले इक्विटी फण्ड के लिए एप्लीकेशन देते है तो आपको उसी दिन के NAV के हिसाब से म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स मिलते/देते  है |

अगर आप 3 बजे के बाद एप्लीकेशन देते है तो आपको अगले दिन के NAV के हिसाब से म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स मिलते/देते  है |

डेब्ट फण्ड- इस फण्ड का कट ऑफ़ टाइम भी इक्विटी फण्ड की तरह 3 बजे होता है और इसमें प्रोसेस इक्विटी फण्ड की तरह ही है |

लिक्विड फण्ड - इस फण्ड का कट ऑफ़ टाइम 2 बजे होता है मतलब अगर आप 2 बजे से पहले म्यूच्यूअल फण्ड के लिए रिक्वेस्ट करते है तो आपको पिछले दिन के NAV के हिसाब से म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट मिलते/देते है|

यदि आप 2 बजे के बाद म्यूच्यूअल फण्ड के लिए रिक्वेस्ट करते है तो आपको उसी दिन के NAV हिसाब से म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स मिलते/देते है |

म्यूच्यूअल फण्ड कट ऑफ़ टाइम जानना क्यों आवश्यक है?

यदि आप लम्बे समय के लिए एक बड़ी रकम निवेश करना चाहते है तो Mutual Fund Cut-off Timings को न जानना आपके इन्वेस्टमेंट व रिटर्न में एक बड़ा अंतर दिखा सकता है इसलिए अपने अनुसार NAV के हिसाब से म्यूच्यूअल फण्ड की यूनिट्स खरीदने व बेचने के लिए आपको म्यूच्यूअल फण्ड की कट ऑफ़ टाइम को आवश्यक रूप से जानना चाहिए|

म्यूच्यूअल फण्ड के चार्जर्स क्या है | Mutual Fund Charges in Hindi

दिसंबर 01, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के क्या-क्या चार्जर्स (Mutual Fund Charges) लगते है? म्यूच्यूअल फण्ड का कास्ट कम होता है या ज्यादा | तो चलिए जानते है म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने से आपको कौन-कौन से चार्ज देने पड़ते है?

Mutual Fund Charges in Hindi


भारत में म्यूच्यूअल फण्ड बहुत ही तेजी से पॉपुलर हुआ है क्योकिं म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक बेहतर आप्शन है और इसमें रिटर्न भी काफी अच्छे मिल रहे है और यही कारण है कि ज्यादातर लोग म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर रहे है |

म्यूच्यूअल फण्ड के चार्जर्स (Mutual Fund Charges)

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना चाहते है तो आपको म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने से पहले mutual fund charges के बारे में अवश्य जानना चाहिए | तो चलिए म्यूच्यूअल फण्ड से जुड़े कुछ चार्ज को देखते है जो आपको निवेश करने से पहले ध्यान में रखना चाहिए |

Entry Load

जब पहली बार एक निवेशक किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश करता है तो उसे entry load के रूप में चार्ज देना होता है लेकिन सन 2009 में, SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) ने entry load के चार्ज को सभी प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड स्कीमों से हटा दिया था |

अब भारत में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने पर entry load चार्ज नही देना पड़ता है, अन्यथा पहले भारत में entry load चार्ज लगभग 2.25% हुआ करता था |

फण्ड हाउस के द्वारा entry load चार्ज लेने का उद्देश्य म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम को प्रमोट करने के लिए लगने वाले खर्चे को मैनेज करने के लिए लिया जाता था |

Exit Load

जब एक निवेशक म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स को रिडीम करता है तो उसे exit load चार्ज देना पड़ता है | exit load चार्ज किसी भी स्कीम का एक मुख्य खर्च होता है जिसे इन्वेस्टर को म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स को रिडीम करते वक्त देना होता है |

exit load का चार्ज लेना अनिवार्य नही है लेकिन exit load चार्ज होने के कारण इन्वेस्टर एक स्कीम से दूसरें स्कीम में स्विच करने से रोकती है, हालाकिं भारत में फण्ड हाउस exit load चार्ज 1% रखती है ताकि निवेशकों को आकर्षित कर सकें |

exit load चार्ज अलग-अलग स्कीमों में अलग-अलग हो सकती है | सेबी के गाइडलाइन्स के अनुसार, exit load का चार्ज रिडेम्पशन अमाउंट का 7% मैक्सिमम हो सकता है |

Expense Ratio

म्यूच्यूअल फण्ड में लगने वाले चार्ज में एक्सपेंस रेश्यो सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे आपको पता होना चाहिए | एक्सपेंस रेश्यो, फण्ड हाउस के द्वारा म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम को मैनेज करने के लिए वार्षिक शुल्क के रूप में  लिया जाता है, आमतौर पर एक्सपेंस रेश्यो को % के रूप में दर्शाया जाता है |

एक्सपेंस रेश्यो, म्यूच्यूअल फण्ड निवेशकों से स्कीम के प्रमोशन, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, मैनेजमेंट व एडमिनिस्ट्रेशन के लिए लिया जाता है | जब टोटल एक्सपेंस को एक म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट ) से डिवाइड किया जाता है तो एक्सपेंस रेश्यो मिलता है |

Mutual Funds रिडीम कैसे करें | Mutual Funds का पैसा कैसे निकाले | Mutual Funds Redemption Hindi

नवंबर 28, 2019 Add Comment
Mutual Funds रिडीम कैसे करें मतलब म्यूच्यूअल फण्ड में जमा किया गया पैसा कैसे निकाले ? क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करने के तरीके जानते है | चलिए जानते है म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कैसे करें जिससे म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा निकल जाये |

हम सब म्यूच्यूअल फण्ड में पैसे लम्बे समय के लिए निवेश करते है लेकिन कई बार हम अपनी जरुरत के लिए या फिर किसी दुसरे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड से पैसा निकलना चाहते है तो चलिए जानते है म्यूच्यूअल फण्ड से पैसा निकालने का प्रोसेस क्या है |
Mutual Funds Redemption Hindi

Mutual Funds Redeem कैसे करें ?

जब हम म्यूच्यूअल फण्ड खरीदते है या निवेश करते है तो हमें म्यूच्यूअल फण्ड की यूनिट दी जाती है जिसकी प्राइस घटते-बढते रहती है जिसके कारण हमें फायदा या नुकसान होता है |

अब जब हम म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को सेल करना चाहते है या अपना पैसा निकलना चाहते है तो हमें कुछ प्रोसेस करनी पड़ती है जिसे म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कहते है |

Mutual Funds Redeem करने के दो तरीके है - ऑनलाइन व ऑफलाइन

Online Mutual Funds Redeem

आप घर बैठे मोबाइल व इन्टरनेट की मदद से ऑनलाइन म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कर सकते है | ज्यादातर म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी ऑनलाइन म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम का आप्शन देती है |

घर बैठे म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करने के लिए आपको म्यूच्यूअल फण्ड हाउस के वेबसाइट में जाकर आपको अपनी यूजर ID, PAN नंबर या फोलियो नंबर आदि से लॉग इन करना है |

अब आपको एक एप्लीकेशन फॉर्म या Mutual Funds Redeem फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है | फॉर्म सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद आपको रजिस्टर्ड ईमेल व फ़ोन नंबर पर एक कन्फर्मेशन मेसेज आयेगा

और फिर एप्लीकेशन फॉर्म अप्रूव होने के बाद आपका पैसा आपके बैंक खाते 3 से 4 दिन में आ जायेगा, अगर आपने अपनी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम खरीदते वक्त बैंक डिटेल्स दी है |

Offline Mutual Funds Redeem

mutual fund ऑफलाइन रिडीम  करने के लिए आपको म्यूच्यूअल फण्ड ऑफिस या म्यूच्यूअल फण्ड एजेंट के पास जाना है |

म्यूच्यूअल फण्ड ऑफिस में आपको एक एप्लीकेशन फॉर्म या रिडेम्पशन फॉर्म भरना है जिसमें आवश्यक डिटेल भरने है जैसे - अपना नाम, फोलियो नंबर, पैन नंबर, म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का नाम और आप कितना यूनिट्स या पैसा रिडीम करना/निकलना चाहते है |

रिडेम्पशन फॉर्म भरने के बाद ऑफिस में जमा कर देना है और उसके बाद जब म्यूच्यूअल फण्ड हाउस/कंपनी एप्लीकेशन फॉर्म अप्रूव कर लेती है तो आपका पैसा आपके बैंक अकाउंट में 3 से 4 दिन में आ जाता है | अगर आपने अपनी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम खरीदते वक्त बैंक डिटेल्स दी है |

Mutual Funds Redeem करते समय ध्यान रखें?

म्यूच्यूअल फण्ड एक साल से कम समय में रिडीम करते है तो 1% एग्जिट लोड देना पड़ता है | म्यूच्यूअल फण्ड के एग्जिट लोड चार्ज व समय म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के अनुसार अलग अलग होते है |

म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स बेचते समय वर्तमान NAV मतलब एक म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट का दाम आवश्यक चेक करें क्योकिं इसी के आधार पर आपको पैसा मिलता है |

म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करते समय लगने वाले टैक्स का भी ध्यान रखे |

कई म्यूच्यूअल फण्ड का एक फिक्स समय (लॉक in पीरियड) होता है तो समय से पहले आप म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम नही कर सकते है | जैसे: ELSS में 3 साल 

क्या म्यूच्यूअल फण्ड सुरक्षित है | Are Mutual Funds Safe?

नवंबर 22, 2019 1 Comment
भारत में म्यूच्यूअल फण्ड का निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन कई बार निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित है ? कोई म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अपना बिज़नस बंद करके भाग जाएगी तो क्या होगा ?  तो चलिए जानते है |
Are Mutual Funds Safe?


म्यूच्यूअल फण्ड में मार्केट से जुड़े रिस्क होते है क्योकिं म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा शेयर बाजार, बांड, गोल्ड आदि सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है लेकिन इन रिस्क को आप अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर कम या ज्यादा कर सकते हो |

आप म्यूच्यूअल फण्ड के कोई भी प्रकार - इक्विटी फण्ड, डेट फण्ड, हाइब्रिड फण्ड चुन सकते है| अब मान लीजिये कि आप ने एक बेहतर म्यूच्यूअल फण्ड चुन लिया और आपको अच्छे रिटर्न की भी उम्मीद है लेकिन क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित है ? क्या हम म्यूच्यूअल फण्ड हाउस पर इतना भरोसा कर सकते है कि वे हमारे पैसे लेकर भाग नही सकती है ?

क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश सुरक्षित है?

सिक्म्यूयोरिटीज एंड एक्च्यूसचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) एक ऐसी संस्था है जो शेयर बाजार , म्यूच्यूअल फण्ड जैसे सिक्योरिटीज को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करती है |

SEBI का काम ही यह है कि कोई भी निवेशकों के पैसे को हानि न पंहुचा सके और यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करते भी पाया जाता है तो उसपर तुरंत कड़ी कार्यवाही की जाती है |

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित होता है इसमें इन्वेस्ट करने से आपको बिल्कुल भी नहीं डरना चाहिए क्योकिं भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) आपके पैसे की सेफ्टी के लिए जरुरी कदम उठाता है जो नीचें दिए गये है -


  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी या एसेट मैनेजमेंट कंपनी को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करता है 
  • कोई भी स्कीम या प्रोडक्ट को SEBI के द्वारा ही अनुमति दी जाती है 
  • सेबी के नियम अनुसार कोई म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी बिज़नस बंद करके भाग नही सकती है 
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी बिज़नस बंद करना चाहती है तो सेबी के नियमों का पालन करना होता है 
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी दिवालिया (बैंकरप्ट) होने पर भी स्कीम का पैसा सुरक्षित होता है क्योकिं यह एक ट्रस्ट में  होता है और म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी पैसे को हाथ नही लगा सकती है
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों का रेगुलर ऑडिट SEBI करता है 

Best Mutual Fund कैसे चुनें | Best Mutual Fund in Hindi

नवंबर 21, 2019
क्या अक्सर निवेश करने से पहले आपके मन में ख्याल आता है कि एक best mutual fund कैसे चुने ? यह एक आम बात है मेरे मन में भी ऐसा ख्याल आता है- कौन सा mutual fund बेस्ट है? किस mutual fund से ज्यादा रिटर्न मिलता है?

तो चलिए आज जानते है कि best mutual fund कैसे चुनते है, जिससे आप रिस्क कम करके बेहतर रिटर्न कमा सके |
Best Mutual Fund in Hindi

Best Mutual Fund कैसे चुनें (Best Mutual Fund in Hindi )

अगर म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगाना ही है तो क्यों न एक best mutual funds को चुना जाए जिससे की लॉन्ग टर्म में हमें बेहतर रिटर्न मिले व हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें |

एक बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड को चुनने के लिए आपको कुछ फैक्टर्स को ध्यान रखना होता है तो चलिए इन फैक्टर्स को एक-एक करके देखते है -

फण्ड का उम्र और प्रदर्शन

किसी भी फण्ड में इन्वेस्ट करने से पहले आपको फण्ड की उम्र कितना है, क्या फण्ड अभी-अभी लायी गयी है या फण्ड 4-5 साल या उसके भी अधिक पुरानी है |

इसके अतिरिक्त फण्ड ने पिछलें 3-5 वर्ष में कैसा प्रदर्शन किया है, क्या फण्ड ने लगातार अच्छा रिटर्न दिया है और क्या आगे आने वर्षों में भी बेहतर प्रदर्शन करने वाली है | इन सब को जरुर पता करें |

फण्ड ने 1 साल में व 3 साल में निवेशकों को कितना रिटर्न दिया है अर्थात् छोटी व लम्बी अवधि में कैसा रिटर्न दिया है |

इसके साथ ही फण्ड ने बाजार में कमजोरी के वक्त कैसा प्रदर्शन किया है, अगर बाजार में गिरावट (Bear मार्केट) के समय भी फण्ड में ज्यादा गिरावट नही आई है तो यह एक बेहतर फण्ड का संकेत होता है |

फण्ड का खर्च

एक फण्ड आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है, लेकिन क्या वह फण्ड खर्च भी ज्यादा लेता है | अगर ऐसा है तो आप फण्ड के कास्ट को सावधानीपूर्वक कैलकुलेट करें |

क्योकिं आप लम्बें समय तक फण्ड में निवेश करने वालें है तो 1% - 2% का अतिरिक्त खर्च भी लॉन्ग टर्म में बहुत ज्यादा होता है | इसलिए किसी फण्ड में इन्वेस्ट करने से पहले फण्ड का खर्च जरुर चेक करें |

निवेशित रहने का समय (Time Horizon)

एक बेहतर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम चुनने के लिए time horizon भी महत्वपूर्ण होता है |

यह जानने के बाद कि आप किसी फण्ड में कितने समय तक निवेशित रहना चाहते है तो म्यूच्यूअल फण्ड की बहुत से विकल्प में से एक अच्छा आप्शन चुनना आपके लिए आसान हो जाता है |

फण्ड हाउस (AMC)

फण्ड हाउस या एसेट मैनेजमेंट कंपनी पर लोग कितना विश्वास करते है | एक अच्छा फण्ड हाउस वह होता है जो निवेशकों के अच्छे इन्वेस्टमेंट के लिए कई स्कीम्स की विकल्प रखता है |

एक निवेशक को फण्ड हाउस के उम्र, हाउस के मैनेजमेंट का पिछला रिकार्ड, इन्वेस्टमेंट का प्रोसेस, व फण्ड हाउस ने कितना फण्ड (AUM) मैनेज किया है | एक फण्ड हाउस या AMC को चुनने से पहले इन सब बातों को जरुर ध्यान दे |

इसके अलावा यह जरुर पता करे कि फण्ड हाउस के टॉप परफॉर्मेंस वाली कितनी स्कीम्स है |

फण्ड का पोर्टफोलियो

किसी भी फण्ड में निवेश से पहले उस फण्ड के पोर्टफोलियो को अवश्य देखें | क्या फण्ड अच्छी तरह से डाइवर्सिफाई किया गया है मतलब अलग-अलग एसेट क्लास व सेक्टर्स में पैसे लगाया जाता है या नही |

क्या फण्ड में इक्विटी, बांड आदि सिक्योरिटीज़ शामिल है ? क्या निवेशकों के लक्ष्य, रिस्क क्षमता आदि के आधार पर निवेश किया जाता है या फिर फण्ड मैनेजर अपनीं मन से कुछ भी पोर्टफोलियो तो नही बना रहा है |


फण्ड मैनेजर का प्रदर्शन

म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टमेंट का एक बेस्ट ऑप्शन माना जाता है क्योकिं इसे प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर मैनेज करता है और निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए अच्छे विकल्पों का चुनाव करता है इसलिए एक बेहतर फण्ड मैनेजर को चुनना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है |

किसी फण्ड में पैसा लगाने से पहले आपको फण्ड मैनेजर के पिछलें रिकार्ड, रिटर्न, अनुभव, कितने स्कीम्स का मैनेजमेंट, इन्वेस्टमेंट स्टाइल आदि का अवश्य पता होना चाहियें |



नोट 1: एक फण्ड का पिछला रिकार्ड बेहतर है इसका मतलब फण्ड मैनेजर ने उस फण्ड को अच्छा मैनेज किया है लेकिन क्या वह फण्ड मैनेजर अभी भी फण्ड मैनेज कर रहा है या नहीं |

क्या उस फण्ड मैनेजर के जगह पर कोई नया फण्ड मैनेजर तो फण्ड को मैनेज नही कर रहा है और क्या नया फण्ड मैनेजर अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम है या नही | इन बातों को किसी भी फण्ड में निवेश करने से पहले अवश्य ध्यान रखें |



नोट 2: एक निवेशक के नजरिये से आपको किसी भी mutual funds में इन्वेस्ट करने से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेशित रहने का समय, निवेश का उद्देश्य, रिटर्न की उम्मीद आदि जानना बहुत आवश्यक होता है क्योकिं इससे ही आपको एक best mutual fund सेलेक्ट करने में मदद मिलती है |

MultiCap Funds क्या है | क्या आपको निवेश करना चाहिए | Multi Cap Funds in Hindi

अक्तूबर 03, 2019 1 Comment
क्या मल्टी कैप फण्ड , लार्ज कैप फण्ड से बेहतर वेल्थ बनाने वाले फण्ड होते है ? क्या आपको multi cap funds में इन्वेस्ट करना चाहिए ? मल्टी कैप फण्ड में आपको कितने समय के लिए इन्वेस्ट करना चाहिए ?

Multi Cap Funds in Hindi

MultiCap Funds क्या है (MultiCap Funds in Hindi)

Multi Cap Funds एक डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूच्यूअल होता है मतलब Multi Cap Funds का पैसा मार्केट कैप के आधार पर लार्ज कैप, मिडकैप व स्मालकैप कंपनियों में लगाया जाता है |  

मल्टी कैप फण्ड का पोर्टफोलियों बहुत ज्यादा डायवर्सिफाइड होता है क्योकि यह अलग-अलग सेक्टर के लार्ज, मीडियम व स्माल कैप स्टॉक्स से मिलकर बनती है | इसमें SEBI ( Securities and Exchange Board of India) के नियम के तहत 65% पैसा इक्विटी व इक्विटी से रिलेटेड अन्य इंस्ट्रूमेंट में लगाना अनिवार्य है |

Multi Cap Funds एक इक्विटी फण्ड है और इन स्कीम्स में डायनामिक इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी को अपनाया जाता है इसलिए निवेशकों को किसी भी इक्विटी से जुड़े स्कीम्स में निवेश करने का लक्ष्य 5-10 वर्ष का रखना चाहिए |

MultiCap Funds के फायदे

Multi Cap Funds, फण्ड मैनेजर को अपने होल्डिंग्स को लार्ग कैप, मिड कैप व स्माल कैप कंपनियों में शेयर बाजार के आउटलुक के आधार पर बदलने का लचीलापन देती है  अर्थात जब मिडकैप व स्मालकैप कंपनियों का वैल्यूएशन महंगा होने लगता है तब फण्ड मैनेजर लार्ज कैप स्टॉक्स में जा सकते है |

इसके विपरीत जब लार्ज कैप स्टॉक्स का वैल्यूएशन महंगा होने लगता है तो फण्ड मैनेजर मिडकैप व स्मालकैप स्टॉक्स में निवेश कर सकते है |

इस तरह से प्योर स्मालकैप व मिडकैप फण्ड की तुलना में Multi Cap Funds लम्बे समय में कम रिस्क वाला हो जाता है और निवेशकों को प्योर लार्ज कैप फण्ड से बेहतर रिटर्न देता है |

Multi Cap Funds ऐसे निवेशकों के लिए बेहतर है जो मीडियम रिस्क या बैलेंस्ड रिस्क लेने के साथ बाजार के उतार चढ़ाव को सहन कर सकते है और लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहते है |

Large Cap Funds क्या है | निवेशकों के लिए फायदेमंद क्यों है | Large Cap Funds in Hindi

सितंबर 27, 2019 Add Comment
क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर औसत रिटर्न चाहते है लेकिन ज्यादा रिस्क नही लेना चाहते है ? तो चलिए आज लार्ज कैप म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानते है जो आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है |

Large Cap Mutual Funds in Hindi

Large Cap Funds क्या है (Large Cap Funds in Hindi)

लार्ज कैप फण्ड, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड का एक प्रकार है | इसमें निवेश किया गया पैसा मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर बड़ी कंपनियों के शेयर्स में लगाये जाते है |

Large Cap Mutual Funds लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न दे सकते है और यह म्यूच्यूअल फण्ड में पहली बार निवेश करने लोगों के लिए अच्छा माना जाता है क्योकि लॉन्ग टर्म फण्ड ज्यादा अस्थिर नही होते है और लगातार निवेशकों को एक औसत रिटर्न देते रहते है |

लार्ज कैप फण्ड का 75% से 80% पैसा स्टॉक मार्केट के बड़ी कंपनियों  (मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर ) में लगाया जता है | और शेष 20% से 25% पैसा स्मालकैप व मिडकैप कंपनियों में लगाया जाता है ताकि इन्वेस्टर का रिस्क कम करने के बाद बेहतर रिटर्न भी दिया जा सकें |

Large Cap Funds फायदेमंद क्यों है

Large Cap Mutual Funds में ज्यादा रिस्क नही होता है क्योकि इसका पैसा लार्ज कैप कंपनीज में निवेश होता है | लार्ज कैप कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत, अच्छे ब्रांड, व ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देती है इसलिए इसमें भरोसा भी किया जाता है |

लार्ग कैप कंपनिया लम्बे समय से व्यापार कर रही होता है इसलिए ऐसी कंपनियां कई तेजी व मंदी के समय को देखी रहती है और उन हालातो को अच्छे से हैंडल भी कर सकती है | इसके साथ ही लार्ज कैप कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस भी अच्छे से लागू होता है जिसका फायदा लार्ज कैप फण्ड में देखने को मिलता है |

Large Cap Mutual Funds लॉन्ग टर्म में सम्पत्ति बनाने में मदद करती है लेकिन इसके साथ ही शोर्ट टर्म में यह रेगुलर डिविडेंड भी देती है व इसमें रिस्क कम होने से Large Cap Mutual Funds सोने पर सुहागा हो जाता है |

Large Cap Mutual Funds शुरुआत में ज्यादा बेहतर रिटर्न नही दिखाती है लेकिन समय के साथ इसका रिटर्न भी धीरे-धीरे बढ़ते जाता है |

Small Cap Funds क्या है | निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान | Small Cap Funds in Hindi

सितंबर 27, 2019 Add Comment
क्या Small Cap Mutual Funds में ज्यादा रिटर्न मिलता है ? क्या आप जानना चाहते है कि स्माल कैप फण्ड में क्या खास है ? तो चलिए जानते है कि स्माल कैप फण्ड आखिर क्या है और क्या है खास?

Small Cap Mutual Funds in Hindi

Small Cap Funds क्या है (Small Cap Funds in Hindi)

वे फण्ड जो मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर छोटे कंपनियों में निवेश करते है, स्मालकैप Mutual Fund कहते है | स्माल कैप वह छोटे कम्पनियां होते है जो अपने डेवलपमेंट के चरण में होते है |

स्मालकैप फण्ड में रिस्क लार्ज कैप फण्ड की तुलना में अधिक होता है क्योकिं स्मालकैप फण्ड का पैसा स्टार्टअप या शुरुआत में कम कमाई करने वाले बिज़नस में लगाया जाता है |

स्मालकैप कंपनियां अपने डेवलपमेंट फेज में होती है इसलिए ऐसे कंपनियों में पैसा लगाने से स्मालकैप फण्ड के निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है | लेकिन स्मालकैप कंपनियां स्थायी नही होती है और न ही लार्ज कैप कंपनियों की तरह सफल होती है इसलिए इसमें (स्मालकैप फण्ड ) निवेश करने से रिस्क भी बहुत ज्यादा होता है |

स्मालकैप फण्ड उन निवेशकों के लिए बेहतर हो सकती है जो ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता रखने के साथ-साथ लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करना चाहते है क्योकि लम्बें समय में स्मालकैप Mutual Fund, मिड कैप व लार्ज कैप से ज्यादा रिटर्न दे सकता है |

स्मालकैप फण्ड शोर्ट टर्म में अच्छा रिटर्न नही देते है क्योकिं स्मालकैप कम्पनीयों में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और यह केवल निवेशकों के रिस्क को बढ़ाता है |

इसके अतिरिक्त बुल मार्केट के समय में स्मालकैप फण्ड का रिटर्न, मिड कैप व लार्ज कैप फण्ड से भी ज्यादा हो सकता है | जबकि बेयर मार्केट के समय में स्मालकैप फण्ड से निवेशकों को घाटा भी मिड कैप व लार्ज कैप से भी ज्यादा हो सकता है |

Small Cap Mutual Funds में निवेश से पहले क्या याद रखें ?

Small Cap Mutual Funds में निवेश करने से निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है लेकिन इसमें रिस्क भी बहुत ज्यादा होता है इसलिए निवेश से पहले स्मालकैप फण्ड का अच्छे से एनालिसिस करें और अगर आप रिस्क ले सकते है तब ही स्मालकैप फण्ड में निवेश करें अन्यथा न करें |
  • Small Cap Mutual Funds के रिस्क को कम करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को डाईवर्सिफाई करे व फण्ड का रिसर्च करने में ज्यादा समय दे |
  • लम्बें समय के लिए निवेश करें ताकि बाजार के अस्थिरता से बच सकें |
  • बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए फण्ड में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये भी निवेश कर सकते है |
  • अस्थायी कारणों से व बाजार के शोर्ट टर्म लाभ या हानि के कारण ही फण्ड की खरीदी-बिक्री न करें | 
  • मार्केट को टाइम करने व अनुमान लगाने की भूल कभी न करें |
  • स्मालकैप Mutual funds शोर्ट टर्म में बहुत अस्थिर रिटर्न देते है इसलिए लम्बे समय ( 5 साल से अधिक) के लक्ष्य के साथ निवेश करें |
  • स्मालकैप फण्ड में निवेश करने से पहले फण्ड के खर्च (एक्सपेंस रेश्यो ) को अवश्य जाँच करें |

Hybrid Funds क्या है | हाइब्रिड फण्ड के प्रकार | Hybrid Funds in Hindi

सितंबर 25, 2019 Add Comment
जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है तो क्या आपके मन में भी सवाल आता है कि आपको इक्विटी फण्ड मे इन्वेस्ट करना चाहिए या फिर डेट फण्ड में | तो चलिए आज समस्या का भी समाधान करते है और जानते है हाइब्रिड फण्ड के बारे में |
Hybrid Mutual Funds in Hindi

Hybrid Funds क्या है ( Hybrid Funds in Hindi)

हाइब्रिड फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक विकल्प है जो आपको डेट, इक्विटी व अन्य एसेट क्लास में निवेश करने की सुविधा देता है | इसमें न तो रिस्क ज्यादा होता है और न ही रिटर्न ज्यादा होता है मतलब हाइब्रिड फण्ड मीडियम रिस्क के साथ मीडियम रिटर्न देता है |

अगर आप इक्विटी फण्ड में निवेश करते है तो इसमें सही ज्ञान न होने से पैसे डूबने का जोखिम होता है व इसके साथ ज्यादा रिटर्न भी मिल सकता है जबकि डेट फण्ड में कम रिस्क होने के कारण रिटर्न भी कम होता है

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड में इक्विटी व डेट दोनों एसेट में निवेश किया जाता है | इसका मतलब हाइब्रिड फण्ड डेट व इक्विटी एसेट का मिक्सचर होता है इसलिए hybrid mutual funds में इक्विटी फण्ड से कम रिस्क और डेट फण्ड से ज्यादा रिस्क होता है |

Hybrid Funds के प्रकार

इक्विटी या डेट में इन्वेस्ट करने के आधार पर हाइब्रिड फण्ड को कई केटेगरी में रखा गया है | ये केटेगरी म्यूच्यूअल फण्ड वर्गीकरण नॉर्म का अनुशरण करती है जो निम्नलिखित है |

Aggressive म्यूच्यूअल फण्ड - इसमें 15% से 35% फण्ड डेट इंस्ट्रूमेंट और शेष इक्विटी में निवेश किया जाता है इसलिए इस फण्ड में थोड़ा सा रिस्क होता है |

Balanced म्यूच्यूअल फण्ड - इस फण्ड में 40% से 60% के बीच का कॉम्बिनेशन रख कर लक्ष्य के आधार पर इक्विटी व डेट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है |

Conservative म्यूच्यूअल फण्ड - इसमें केवल 10% से 25% पैसा ही इक्विटी में निवेश किया जाता है और शेष फण्ड डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है ताकि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे क्योकि इसमें बहुत ही कम रिस्क लेने वाले व्यक्ति निवेश करते है |

Dynamic एसेट एलोकेशन फण्ड - यह फण्ड फ्लेक्सिबल होता है मतलब किसी भी सिक्योरिटीज डेट या इक्विटी में निवेश करने का कोई फिक्स्ड स्ट्रक्चर नही होता है |

Equity सेविंग फंड्स - इस फण्ड का 65% भाग इक्विटी में लगाया जाता है और कम से कम 10% भाग डेट सिक्योरिटीज में एलोकेट किया जाता है |

Multi-एसेट एलोकेशन फण्ड - इस फण्ड में डेट, इक्विटी व अन्य एसेट क्लास में निवेश किया जाता है | इसमें सभी एसेट क्लास में कम से कम 10% एलोकेशन किया जाता है |

Arbitrage फण्ड - आर्बिट्राज फंड एक हाइब्रिड फण्ड होता है | इस फण्ड का 65% हिस्सा इक्विटी (कंपनियों के शेयर) या इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है | इसा फण्ड का पैसा इक्विटी में लगाये जाने के कारण रिस्क अधिक होता है इसलिए इसमें बेहतर रिटर्न मिलने की सम्भावना होता है |


Equity Fund क्या है और इक्विटी फण्ड कितनें प्रकार के होते है | Equity Fund in Hindi

सितंबर 22, 2019 Add Comment
म्यूच्यूअल फण्ड स्टॉक में इन्वेस्ट करने का इनडायरेक्ट तरीका होता है | इक्विटी फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड का एक विकल्प है | तो चलिए जानते है Equity Fund क्या है और ये कितनें तरह के होते है ?

Equity Fund in Hindi

Equity Fund क्या है ?

इक्विटी फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड का एक विकल्प है | इसमें इन्वेस्ट किया गया पैसा कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है इसलिए इसे इक्विटी फण्ड कहते है | जब एक फण्ड का 65% या उससे अधिक पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है तो उसे इक्विटी फण्ड कहा जाता है | इसके शेष 35% या कम राशि को डेट सिक्योरिटीज या इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है |

इक्विटी फण्ड लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न देता है लेकिन इसमें रिस्क भी होता है क्योकिं इस फण्ड का पैसा शेयर बाजार में ट्रैड होने वाले शेयरों में इन्वेस्ट किया जाता है | इक्विटी फण्ड आपको 14% - 15% का औसत रिटर्न दे सकती है |

Equity Fund कितनें प्रकार के होते है

म्यूच्यूअल फण्ड अलग-अलग प्रकार के होते है क्योकिं कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन कम या ज्यादा होता है | और ये कंपनियां विभिन्न सेक्टर या इंडस्ट्री की हो सकती है |

इसके साथ ही फण्ड हाउस या एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के स्टाइल के आधार पर भी म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के हो सकते है |

स्माल कैप, मिड कैप, लार्ज कैप या मल्टी कैप

यहाँ कैप का मतलब मार्केट कैपिटलाइजेशन है | शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर छोटी-बड़ी होती है |

इस प्रकार जो फण्ड ज्यादा मार्केट कैप वाले अच्छी कंपनियों में पैसा लगाती है उसे लार्ज कैप फण्ड कहते है | इसमें बाजार का उतार-चढाव थोड़ा कम होता है |

वहीं जो फण्ड मीडियम कैप व स्मालकैप वाले कंपनियों में पैसा लगाती है उसे क्रमशः मिड कैप व स्मालकैप फण्ड कहते है | इन फण्ड में बाज़ार के ऊपर-नीचें होने पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है |

सेक्टर फण्ड, डाइवर्सिफाइड फण्ड और थीमेटिक फण्ड

सेक्टर फण्ड का पैसा एक ही सेक्टर के कई कंपनियों में निवेश किया जाता है | जैसे आईटी, बैंकिंग, रिटेल, एग्रीकल्चर सेक्टर आदि | इसमें एक ही सेक्टर में इन्वेस्ट होने से निवेशक को जोखिम भी ज्यादा होता है |

जबकि डाइवर्सिफाइड फण्ड में लगाया पैसा अलग-अलग सेक्टर के कंपनियों में इन्वेस्ट किया जाता है इसलिए इसमें जोखिम सेक्टर फण्ड की तुलना में कम हो जाता है |

थीमेटिक फण्ड का पैसा एक थीम को फॉलो करके लगाया जाता है | जैसे स्टार्टअप आदि |

एक्टिव फण्ड और पैसिव फण्ड

ये फण्ड पूरी तरह से फण्ड हाउस व फण्ड मैनेजर के इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर निर्भर करता है | अगर फण्ड मैनेजर कंपनियों का एनालिसिस व रिसर्च करके उसे अपने पोर्टफोलियो में रखता है तो ऐसे फण्ड को एक्टिव फण्ड कहते है |

जबकि पैसिव फण्ड उसे कहते है जिसमे फण्ड मैनेजर इंडेक्स ( सेंसेक्स व निफ्टी आदि) के कंपनियों में निवेश करता है जिससे इसका रिटर्न भी इंडेक्स के समान ही आता है इसलिए इस फण्ड को इंडेक्स फण्ड भी कहते है|

डेट फण्ड क्या है | डेट फण्ड के प्रकार | What are Debt Mutual Funds in Hindi

सितंबर 21, 2019 Add Comment
क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करना चाहतें है लेकिन ज्यादा रिस्क लेने से डरते है ? अगर हाँ तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे है | आज के इस पोस्ट में आप डेट फण्ड के बारे में सीखने वाले है | तो चलिए जानतें है Debt Mutual funds क्या होता है |

Debt Mutual Funds in Hindi

Debt Mutual Funds क्या है ?

डेट फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड का एक विकल्प है | यह उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो कम रिस्क लेकर अपनें पैसे को निवेश करना चाहते है | डेट फण्ड में निवेशकों के लगायें पैसे को सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट बांड, ट्रेज़री बिल, व अन्य प्रकार के सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है अर्थात् उधार के रूप में संस्थाओ को दिया जाता है|

डेट फण्ड में इक्विटी फण्ड के तुलना में रिस्क कम होता है | इक्विटी फण्ड में पैसा कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है इसलिए इक्विटी फण्ड में रिस्क ज्यादा होता है |

डेब्ट फण्ड में लगाया गया पैसा एक निश्चित समय के लिए, निश्चित ब्याज़ दर पर लगाया जाता है | अतः निवेशकों को इस बात का खबर रहता है कि समयावधि समाप्त होने पर उन्हें एक "फिक्स इनकम" मिलने वाला है | डेट फण्ड को फिक्स इनकम मिलने के वजह से ही फिक्स इनकम सिक्यूरिटी कहा जाता है |

डेट फण्ड में लगाया पैसा कम या ज्यादा समय के लिए अलग-अलग क्रेडिट रेटिंग्स की सिक्योरिटीज़ में भी लगाया जाता है ताकि निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाया जा सकें, परंतु कई बार क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर इन सिक्योरिटीज़ में रिस्क भी होते है | जहां ज्यादा क्रेडिट रेटिंग वालें संस्थाओ अपना उधारी व ब्याज़ चुकाने में बेहतर मानी जाती है |

आप डेट फण्ड में कम समय (3 या 6 माह ) या लम्बे समय के (3 या 5 साल से अधिक ) के लिए इन्वेस्ट कर सकते है | समय ( मैच्योरिटी) के आधार पर डेट फण्ड भी अलग-अलग हो सकते है |

डेट फण्ड में 3 साल या उससे ज्यादा होने के बाद 20% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाता है जबकि शोर्ट-टर्म में निवेशक को डेट फण्ड से मिलने वाले कैपिटल गेन को टोटल इनकम में जोड़कर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स देना होता है |

Debt Mutual Funds कैसे करता है ?

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों के शेयर पर निर्भर होता है उसी प्रकार डेट म्यूच्यूअल फण्ड पूरी तरह से ब्याज़ दर पर निर्भर करता है |

ब्याज़ दर (रेपो रेट व रिवर्स रेपो ), जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) नियंत्रित करती है अर्थात RBI ही ब्याजदर को अर्थव्यवस्था के परिस्थितियों के आधार पर कम या ज्यादा करती है |

और इस ब्याजदर के उतार-चढाव के आधार पर ही कॉर्पोरेट बांड या डेट सिक्योरिटीज जारी करती है | इसका मतलब है कि डेट फण्ड का रिटर्न ब्याजदर पर निर्भर होता है |

अगर ब्याजदर कम होता है तो बांड की कीमत बढ़ जाती है और निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलता है जबकि ब्याजदर ज्यादा होता है तो बांड की कीमत घट जाती है | इसका मतलब डेट इंस्ट्रूमेंट का की कीमत ब्याजदर के विपरीत होता है |

Debt Mutual Fund के प्रकार

जिस तरह इक्विटी फण्ड, मार्केट कैप व इन्वेस्टिंग स्टाइल के आधार कई प्रकार के होते है उसी प्रकार डेट फण्ड मैच्योरिटी के समय के आधार पर कई प्रकार के होते है |

लिक्विड फण्ड - इस फण्ड का पैसा ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जाता है जिन की मैच्योरिटी 91 दिन से ज्यादा नही होती है | यह फण्ड बचत बैंक की तुलना में अच्छा विकल्प होता है क्योकिं इसमें बेहतर रिटर्न मिलता है और कम समय के लिए होता है |

लिक्विड फण्ड का पैसा कम समय में मैच्योर होने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट में लगया जाता है इसलिए इसमें रिस्क कम होता है व रिटर्न के नेगेटिव होने का चान्स बहुत ही कम होता है |

डायनामिक फण्ड - डायनामिक फण्ड में, निवेश में मिलने वाला ब्याज़ दर बदलता रहता है इसलिए निवेश के मैच्योर होने का समय भी बदलता रहता है अर्थात ब्याज दर से सीधा सम्बन्ध होने के कारण पैसे का निवेश भी जल्दी या देर से किया जाता है |

शोर्ट टर्म या अल्ट्रा शोर्ट टर्म डेट फण्ड - ये डेट फंड्स ऐसे इन्वेस्टर के लिए बहुत ही उपयुक्त है जो 3 साल के लिए निवेश करना चाहते है क्योकिं यह फण्ड 3 साल में मैच्योर हो जाते है | इसके साथ ही ब्याज़ दर में बदलाव का भी इन फंड्स में ज्यादा प्रभाव नही होता है |

इनकम फण्ड - इनकम फण्ड में मैच्योरिटी का समय कम से कम 5 औसतन होता है इसलिए इस फण्ड का पैसा ब्याज़ दर के आधार पर अलग-अलग सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है ताकि निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाया जा सकें |

गिल्ट फण्ड - इस फण्ड का पैसा केवल सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट किया जाता है | गिल्ट फण्ड उन निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है जो कम रिस्क के साथ एक अच्छे विकल्प की तलाश में है | गिल्ट फण्ड में क्रेडिट रिस्क कम होता है क्योकिं गिल्ट फण्ड का पैसा सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता है |

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