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SEBI क्या है और SEBI के प्रमुख काम क्या है | SEBI in Hindi

नवंबर 30, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है SEBI क्या है ? और SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया क्या काम करता है ? तो चलिए जानते है SEBI क्या है और सेबी के प्रमुख कार्य क्या है?
What is SEBI in Hindi

SEBI क्या है (SEBI in Hindi)

SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया या भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड सब एक ही नाम है | सेबी की जिम्मेदारी भारतीय पूंजी बाजार को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करना, निवेशकों के इंटरेस्ट को बनाये रखना है |

सेबी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए कई रूल्स और रेगुलेशन बनाता है ताकि सभी मार्केट प्रतिभागी उन नियमो का पालन करे व धोखाधड़ी, स्कैम्स आदि को रोककर मार्केट को सुचारू रूप से चलाया जाये तथा कैपिटल मार्केट का डेवलपमेंट किया जाए |

सेबी का गठन 12 अप्रैल, 1992 को, सेबी एक्ट 1992 के तहत हुआ था, और इसका मुख्यालय (हेडक्वार्टर) मुंबई में है |

SEBI के प्रमुख काम क्या है?

सेबी मार्केट को रेगुलेट करता है और मार्केट के डेवलपमेंट के लिए, बेहतर बनाने के लिए SEBI हमेशा काम रहता है- सेबी के कुछ प्रमुख काम निम्न है -

  • कैपिटल मार्केट का विकास करना व निवेशको के इंटरेस्ट की रक्षा करना
  • स्टॉक एक्सचेंजों (NSE,BSE) आदि को रेगुलेट करना
  • अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस यानि अनुचित तरीकें से लेनदेन को रोकना
  • मार्केट से जुड़े लोगो की शिक्षा को बढ़ाने के लिए कदम उठाना
  • कॉर्पोरेट के अंडर होने वाले इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना

इन सारे कामों को करने के लिए सेबी को सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नही है क्योकिं सेबी एक ऐसी संस्था है इसे सेबी एक्ट 1992 के तहत अधिकार मिले है |


निवेश के लिए स्टॉक्स कैसे खोजें | How to Generate Stock Ideas

नवंबर 27, 2019 Add Comment
एक अच्छा इन्वेस्टमेंट आपको सफल इन्वेस्टर व धनवान बना सकता है लेकिन इसके लिए आपको एक अच्छा स्टॉक खोजना बहुत जरुरी है क्योकिं एक अच्छी क्वालिटी वाला स्टॉक ही बेहतर आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है |
क्या निवेश के लिए अच्छे स्टॉक खोजे जा सकते है ? अगर हाँ तो निवेश के लिए स्टॉक कैसे खोजें |
How to Generate Stock Ideas

How to Generate Stock Ideas ?

हमारे आसपास इतने सारे क्वालिटी वाले स्टॉक होने के बावजूद भी हम सब एक अच्छे स्टॉक को सेलेक्ट नही कर पाते है और जिसकी वजह से हम धन क्रिएट(बनाने) करने का एक अच्छा अवसर खो देते है |

तो चलिए जानते है कि ऐसे कौन से तरीके है जिससे निवेश के लिए एक अच्छा स्टॉक खोज सकते है |

रोजाना चीजों को देखना

हमारे आसपास ऐसे बहुत से क्वालिटी स्टॉक होते है और कंपनी का प्रोडक्ट भी बहुत ही जबरदस्त होता है जिसे हम अक्सर प्रयोग भी करते है लेकिन एक निवेशक की नज़र से हम कभी भी इन प्रोडक्ट्स / सामान को नही देखते है |

अब से जब भी आप किसी प्रोडक्ट/सामान का प्रयोग करते है तो एक बार अपने आप से सवाल पूछना है कि क्या यह सामान बनाने वाली कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है ? अगर कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है तो आपको उसके रेवेन्यू व प्रॉफिट और बिज़नस के अन्य चीजों को जरुर चेक करना चाहिए |


क्षमता का दायरा

अगर आप किसी कम्पनी में काम कर रहे है तो उस कंपनी के बारे में, उस कंपनी के इंडस्ट्री के बारे में अच्छी जानकारी होती है |

मान लीजिये आप आईटी कंपनी में जॉब करते है तो आपको IT कंपनी के काम काज के बारे में अच्छे से मालूम होगा और आप आईटी कंपनी को अच्छे से एनालिसिस कर सकते है |

एक नये निवेशक के लिए अपने क्षमता के दायरे में स्टॉक चुनना अच्छा होता है | आपके क्षमता का दायरा किसी भी इंडस्ट्री का हो सकता है | जैसेः बैंकिंग और फाइनेंस, एग्रीकल्चर, आईटी आदि |

न्यूज़पेपर, मैगज़ीन, टीवी

टीवी, मैगज़ीन, न्यूज़ पेपर भी एक क्वालिटी वाले स्टॉक को चुनने में आपकी मदद कर सकते है जैसे अगर एक कम्पनी के सीईओ, चेयरमैन टीवी में या न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू देते है तो आपको उस कंपनी के बारे में बहुत कुछ पता चलता है |

फिर भी एक निवेशक के रूप में आपको टीवी पर आने वाले इंटरव्यू के माध्यम से ही किसी स्टॉक को नहीं चुनना चाहिये बल्कि इसे एक स्टॉक आईडिया के रूप में देखना चाहिए और जिस कंपनी के मैनेजमेंट ने इंटरव्यू दिया है उस कंपनी का अच्छे से एनालिसिस करना चाहिए |

एक निवेशक के तौर पर यह जिम्मेदारी आपकी है कि आप अपने पैसे को सावधानी से, व समझदारी से निवेश करें |

अपने आँख और कान हमेशा खुले रखें क्योकिं निवेश करने के लिए एक स्टॉक आईडिया आपको कही से भी मिल सकता है | कोई प्रोडक्ट, कोई समाचार, कोई इंटरव्यू, या फिर आपका कोई दोस्त व फैमिली मेम्बर भी स्टॉक आईडिया दे सकते है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है | Debt To Equity Ratio

नवंबर 27, 2019 Add Comment
क्या आप जानते है डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है? और निवेशकों को यह रेश्यो क्यों चेक करना चाहिए ? कोई भी कंपनी जब ज्यादा मात्रा में डेब्ट लेकर बिज़नस के लिए अपना ऑपरेशन करती है तो यह बहुत रिस्की हो सकता है क्योकि इकोनॉमिक डाउनटर्न में रेवेन्यू व प्रॉफिट कम हो जाती है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से यह आसानी से पता किया जा सकता है कि कोई बिज़नस में कितना डेब्ट/ उधार लिया गया है जिससे बिज़नस का ऑपरेशन परफॉर्म किया जा रहा है |
Debt To Equity Ratio

Debt To Equity Ratio क्या है?

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो एक लिवरेज रेश्यो (Leverage ratio) है | लिवरेज रेश्यो का प्रयोग कंपनी के द्वारा उपयोग में लाये गये उधार को एनालिसिस करने के लिए किया जाता है |

किसी बिज़नस को बहुत अधिक लोन/उधार लेकर चलाने से बिज़नस के परफॉर्मेंस कम होने पर, उधार देने वाले को पैसा न दे पाने पर कंपनी दिवालिया हो जाता है |

अगर बिज़नस को केवल ज्यादा उधार लेकर चलाया जाता है या उधार के पैसे से मशीन, प्लांट्स आदि बनाये जाते है तो यह बहुत रिस्की हो जाता है अगर कम्पनी अपने मशीन व प्लांट्स से प्रॉफिट नही ला पाती है क्योकिं ऐसे में उधार का ब्याज (फाइनेंसियल चार्ज ) देने ही पढ़ते है |

इसलिए इन्वेस्टर को ऐसे बिज़नस में इन्वेस्ट करने को लेकर सतर्क रहना चाहिए | इन्वेस्टर को एक बिज़नस में इन्वेस्ट या निवेश करना चाहिए या नही इसें डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से पता करना चाहिए |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो = लॉन्ग टर्म डेब्ट / नेट वर्थ

उदाहरण 1:

= 500 करोड़ / 100 करोड़

= 5x

यहाँ पर कंपनी 500 करोड़ उधार व 100 करोड़ खुद के पैसे से बिज़नस कर रही है और इसलिए यह बहुत ही रिस्की हो सकता है क्योकिं डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 5x है | और इस तरह की कंपनियों से आपको बचकर रहना चाहिए |

उदाहरण 2:

= 100 करोड़ / 100 करोड़

= 1x

अगर कंपनी खुद के 100 करोड़ व उधार के 100 करोड़ से काम करती है तो डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 है | डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 या 1 से कम हो तो अच्छा है, पर यह भी निर्भर करता है कि कंपनी का ट्रैक रिकार्ड, कैपिटल की जरुरत कैसा/कितना है |


Free Demat Account Online - Open Your Free Demat Account in 5 Mins

नवंबर 17, 2019 Add Comment

5Paisa India's Discount Broker

5Paisa भारत का 2nd सबसे फ़ास्ट बढ़ने वाला डिस्काउंट ब्रोकर है | इसमें डीमैट अकाउंट खोलना बहुत ही आसान और पेपरलेस है | आप घर बैठे 5-10 मिनट में अपना डीमैट अकाउंट 5Paisa के साथ खोल सकते है |

5Paisa में जब आप शेयर्स को खरीद कर लॉन्ग टर्म ( लम्बे समय ) के लिए रखते है तो आपको कोई ब्रोकरेज चार्ज ( 0 ब्रोकरेज ) भी नहीं देना पड़ता है | जबकि ट्रेडिंग (रोज खरीद-बेच ) करने वालो को हर ट्रेड में 10 रूपये देने पढ़ते है |

5Paisa के डीमैट अकाउंट से आप स्टॉक्स, म्यूच्यूअल फण्ड, बीमा पालिसी आदि भी ले सकते है | और अगर इसके मोबाइल एप्प की बात करें तो वो भी काफी फ़ास्ट चलती है |

प्लस एक अच्छी बात की आप 5Paisa का डीमैट अकाउंट नीचें क्लीक करके फ्री में खोल सकते है |


Demat Account कैसे  खोले ?

अगर आप डीमैट अकाउंट खोलना चाहते है तो कुछ Documents की आवश्यकता होंगी -
  • पैन कार्ड 
  • एक फ़ोटो
वही आपको एड्रेस प्रूफ के लिए
  • आधार कार्ड 
व इनकम प्रूफ के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स
  • कैंसल चेक ( Cheque )
  • या बैंक स्टेटमेंट
बस फिर आपका डीमैट अकाउंट शेयर खरीद कर रखने के लिए तैयार है |

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पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग क्या है | दुनिया का आठवां अजूबा क्यों कहतें है | Power Of Compounding in Hindi

जुलाई 20, 2019
पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) जिसे दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाता है | आज सब कोई ये नही जानते है कि हम पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके कैसे अपने जीवन में सफलता की ओर आगे बढ़ सकते है?

Power Of Compounding in Hindi


Power Of Compounding

पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) के बारे में दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने कहा: "Compound interest या चक्रवृधी व्याज दुनिया का आठवां अजूबा है, क्योकिं जो इसे समझता है, वो कमाता (Earn) है, और जो इसे नहीं समझता वह भरता (Pay) है"

कोई भी इन्सान चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न हो पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके सफल हो सकता है | आप भी इसे अपने जीवन में अप्लाई (प्रयोग ) करके निश्चित ही सफल हो सकते है |

उदहारण से समझे -

राम, श्याम और मोहन तीन दोस्त थे, तीनो ने एक साथ एक ही कम्पनी में काम की शुरुवात की थी | सभी 9 बजे ऑफिस काम पर जाते थे ?

राम को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग के बारे में जानकारी थी इसलिए वह रोज सुबह जल्दी उठ कर योग व सेल्फ इम्प्रोविंग किताबें पढ़ता था, और ऑफिस में थोड़ी सी ज्यादा काम करता थे इसलिए कभी कभी उसे लेट भी हो जाता था |

श्याम वक्त का पाबंद था, वह रोज सुबह 7 बजे उठता था फिर तैयार होकर ऑफिस निकल जाता था | ऑफिस का काम 5 बजे समाप्त करके वह घर आ जाता था |

जबकि मोहन रोज सुबह 8 बजे उठता था और फिर जल्दी जल्दी तैयार होकर काम पर निकल जाता है लेकिन ऑफिस में भी उसका मन काम पर नही लगता और वह काम समाप्त होने से पहले ही ऑफिस से निकल जाता था |

एक साल बाद जब तीनों के काम को जांचा परखा गया तो निरीक्षक ने पाया की राम ने अपने ऑफिस में सबसे अच्छा काम किया है, उसे प्रमोट करके मैनेजर बना दिया और उसकी तनख्वाह भी बढ़ा दी गयी |

जबकि श्याम वक्त का पाबंद था इसलिए उसका काम भी ठीक था उसकीं तनख्वाह में थोड़ी सी वृद्धि हुई |

लेकिन जब मोहन के कामों की जांच परख की गई तो पाया की उसने सालभर में बहुत काम किया है और ऑफिस में सबसे कम काम करने वाले के लिस्ट में उसका नाम पहले स्थान पर है इसलिए उसे कंपनी से निकाल दिया गया |

इस तरह एक ही कंपनी में एक साथ काम करने वाले तीन दोस्तों को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग का अलग अलग परिणाम मिला |

जिसने पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग को समझा उसने कमाया , जिसने इसे नही समझा उसने खोया |

आप भी अपने जीवन में पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग सही तरीके से करे और राम की तरह बने |

क्योंकि "बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है "  चाहे वह सफलता का हो या फिर असफलता का |

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