म्युचुअल फण्ड में निवेश कैसे करे | Mutual Fund me Nivesh Kaise Kare

क्या आपने कभी mutual funds investment किया है? अगर नही, तो आज मैं इस पोस्ट के द्वारा म्युचुअल फंड्स में निवेश के बारे में बता रहा हूँ |
Mutual Funds Investment image

Mutual Funds me Nivesh Kaise Kare?

म्युचुअल फंड्स में निवेश करना बहुत ही आसान है | म्युचुअल फंड्स में आप समय, रिस्क व क्षमता के आधार पर निवेश कर सकते है |
  • SIP या Systemetic Investment Plan (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान )
  • LumpSum Investment (लम्प सम )
दोनों तरीकों के बारे में हम नीचे बात करेंगे लेकिन सबसे पहले जानते है कि mutual funds में investment करते कैसे है | mutual funds में निवेश करने का सबसे आसान तरीका है ?

बैंक- अगर आपके पास बैंक अकाउंट है तो आप बैंक में जाकर mutual funds में SIP करा सकते है | mutual funds में इन्वेस्ट करने के लिए आपको एक बार KYC कराना पढ़ता है, इसलिए आप अपने साथ पैन कार्ड, आधार कार्ड, एक फोटो, एड्रेस इनफार्मेशन आदि रखें |

डीमैट अकाउंट - अगर आप mutual funds में इन्वेस्ट करना चाहते है तो आपको डीमैट अकाउंट खुलवाने की जरूरत नही है, लेकिन मैं आपको यह बता रहा हूँ कि कई स्टॉक ब्रोकर आपको डीमैट अकाउंट के जरिये भी mutual funds में निवेश करने की सुविधा देते है |


ऑनलाइन - आजकल आपको कई ऑनलाइन वेबसाइट व मोबाइल एप्लीकेशन भी मिल जाएगी जिसके द्वारा आप mutual funds में investment कर सकते हो | जैसे - Paytm, Groww, Kuvera आदि |

Mutual fund में निवेश कैसे करे




म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार अलग अलग होते है जिसके बारे में मैं बता चुका हूँ | आइये अब हम mutual funds में SIP व लम्पसंप निवेश के बारे में एक एक करके समझने का प्रयास करें |

SIP Investment (SIP निवेश)

सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान अर्थात एक निश्चित समय में इन्वेंस्टमेंट होता  है जैसे एक महीने, दो महीनें , चार महीने  आदि |

अगर आपकी कमाई कम भी है तो आप इस सिस्टम के द्वारा निवेश कर सकते है |

SIP Investment करने के लिए आपको बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता नही होती है आप 100 रूपये की बचत से अपना SIP investment शुरु कर सकते है लेकिन कई म्यूच्यूअल फंड्स में आपको 500 से शुरु करना होता है |

LumpSum Investment (लम सम निवेश)

जैसा की आपने जाना कि SIP Investment करने के लिए आपको बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता नही होती है लेकिन जब आप लम्प सम निवेश में आपके पास बड़ी पूंजी का होना आवश्यक है |
जैसेः एक लाख , दो लाख , तीन लाख या इससे ज्यादा आदि |

आसान शब्दों में : जब आपके पास एकमुश्त एक लाख , दो लाख , तीन लाख या इससे ज्यादा की राशि हो तो आप  लम्प सम निवेश कर सकते  है |

ये हमारे FD (फिक्स्ड डिपॉजिट्स ) की तरह होता है जिसमे एक साथ व एकमुश्त पैसा जमा कराना होता है |

Disadvantage of LumpSum Investment

  • एकमुश्त पैसो (एक लाख, दो लाख ) की जरुरत होती है |
  • बाजार गिरा तो आपका पैसा डूबने की सम्भावना ज्यादा है |

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | What is Mutual Funds in Hindi

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क्या है इंडेक्स फण्ड | क्या आपको निवेश करना चाहिए | Index Funds in Hindi
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स्टॉक स्पिलिट क्या है | स्टॉक स्पिलिट का फायदा किसे मिलता है | Stock Split in Hindi

स्टॉक स्पिलिट क्या है | स्टॉक स्पिलिट का फायदा किसे मिलता है | Stock Split in Hindi
क्या आपका Stock कभी स्प्लिट हुआ है? Stock Split कब, और क्यों होता है?

Stock Split क्या है?

Split या स्प्लिट का अर्थ = विभाजन (Partition), या टुकड़े करना |

स्टॉक का अर्थ = शेयर या कम्पनी का हिस्सा 

इस प्रकार स्टॉक स्प्लिट का अर्थ शेयर के टुकड़े करना है लेकिन ये स्टॉक स्प्लिट कब ,क्यों और कैसे किया जाता है इसके पीछे किसी कम्पनी का क्या उद्देश्य होता है ?

हर शेयर मे स्पिलिट हो, ऐसा जरुरी नही है लेकिन स्टॉक मार्केट में किसी न किसी कम्पनी का स्टॉक स्पिलिट होता रहता है |

Stock Split कब, क्यों होता है?

स्टॉक स्पिलिट एक कॉर्पोरेट एक्शन होता है और इसका महत्वपूर्ण प्रभाव स्टॉक मार्केट व निवेशक पर पड़ता है |

लेकिन स्टॉक स्पिलिट का सबसे ज्यादा फायदा कम्पनी को होता है | कोई भी कंपनी अपने स्टॉक या शेयर को स्पिलिट इसलिए करती है ताकि कम्पनी शेयर के मूल्य व फेस वैल्यू को कम कर सके |

जिससे नये निवेशक कंपनी के शेयर को आसानी से कम दाम में खरीद सके और कम्पनी को लाभ हो |

Stock Split कैसे होता है?

जब भी कोई कम्पनी स्टॉक स्पिलिट करती है तो उस कम्पनी के शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि उस कम्पनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization ) नही बढ़ता है और न  ही शेयर धारकों की इन्वेस्मेंट वैल्यू बढती है

शेयर धारकों के शेयर कि संख्या बढ़ जाती है,  यह एक प्रकार से बोनस शेयर जारी करने की तरह होता है |

स्टॉक स्पिलिट, फेस वैल्यू को ध्यान में रख कर व निश्चित अनुपात में किया जाता है-

जैसे 1:2 या 1:5

आपके पास XYZ कम्पनी का एक शेयर है जिसका फेस वैल्यू 10 है और स्टॉक स्पिलिट 1:2 अनुपात में होता है 
जिससे उसका फेस वैल्यू बदलकर 5 हो जाता है

आपके पास जो पहले एक शेयर था तो इस प्रकार एक शेयर बढकर दो शेयर हो जायेगा |
स्पिलिट रेश्यो पुराना फेस वैल्यू आपके शेयर स्पिलिट से पहले शेयर के दाम स्प्लिट से पहले निवेशित पूंजी स्पिलिट से पहले नया फेस वैल्यूआपके शेयर स्पिलिट से बादशेयर के दाम स्प्लिट से बाद निवेशित पूंजी स्पिलिट से बाद
1:21010090090,000520045090,000
1:51010090090,000250018090,000
स्टॉक स्प्लिट होने के बाद फेस वैल्यू व शेयर की संख्या बदल गयी है लेकिन शेयर होल्डर्स के द्वारा इन्वेस्ट किया गया पूंजी या राशि में कोई वृद्धि नही हुई है|

ये भी पढ़े:

फेस वैल्यू क्या है | Face value in Hindi
बोनस शेयर क्या है | Bonus Share in Hindi

उम्मीद करता हूँ आपको स्टॉक स्प्लिट (Stock Split )  क्या होता है समझ में आया होगा |

म्यूचुअल फंड के प्रकार -Types of Mutual Fund Investment

एक बेहतर निवेशक बनने व लाभ लेने के लिए म्युचुअल फंड्स के प्रकार ( Type of Mutual Funds) को समझना आवश्यक है | इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे कि भारत में म्युचुअल फंड्स के प्रकार कितनें है |
Mutual Fund Investment image

म्युचुअल फण्ड सही है ?

आपने ये विज्ञापन तो जरुर देखा होगा "म्युचुअल फंड्स सही है " लेकिन क्या आप बिना म्युचुअल फंड्स के प्रकार ( Type of Mutual Funds) को समझे बिना बता  सकते है कि कौन सा म्युचुअल फण्ड सही है | इससे पहले हम म्युचुअल फण्ड के बारे में बता चुके है | आइये जानते है म्यूच्यूअल फंड्स के कितने प्रकार है |

Mutual Funds के प्रकार

Mutual Fund आपके और हमारे जैसे लोगों से एकत्रित किया हुआ बहुत सारा पैसा है जिसे इन्वेस्टमेंट के लिए लोगों से, लोगों के फायदे के लिए कलेक्ट किया जाता है |

लेकिन क्या कोई एक ही कम्पनी इन सारे फंड्स को कलेक्ट या मैनेज करने का काम करती है तो ऐसा नही है |

भारत में लगभग 50 से भी ज्यादा म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी काम कर रही है जो लोगों का पैसा इकठ्ठा करती है |

जिसकी वजह से हमारे पास बहुत सारे ऑप्शन्स ( Mutual Funds Scheme व ऑफर ) है जिसे अलग अलग कम्पनिया प्रोवाइड करती है |

Mutual Fund Types

म्युचुअल फंड्स में निवेश करने का हमारा व आपका उद्देश्य अलग अलग हो सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए कोई भी म्युचुअल फंड्स हाउस या कम्पनी अपने स्कीम लाती है |

Based on Asset Class (एसेट क्लास पर आधारित )

इस प्रकार के फंड्स अलग अलग एसेट में इन्वेस्ट करते है जैसे: बांड्स, शेयर, आदि | 
  • Equity Funds
  • Debt Funds
  • Hybrid or Balanced Funds
  • Tax - Saving Funds
  • Sector Funds
  • Index Funds
  • Funds of Funds

Based on Structure (स्ट्रक्चर पर आधारित )

स्ट्रक्चर आधारित म्यूच्यूअल फंड्स वे होते है जो एक निश्चित समय में ख़रीदा एक बेचा जा सकता है -
  • Closed-Ended Funds
  • Open-Ended Funds

Based on Investment Objective(लक्ष्य पर आधारित )

इस प्रकार के म्यूच्यूअल फंड्स स्कीम आपके इन्वेस्टमेंट लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया जाता है -
  • Growth Funds
  • Income Funds
  • Liquid Funds

List Of Mutual Funds India

  1. Sundaram Mutual Funds
  2. Mirae Asset Mutual Funds
  3. LIC Mutual Fund
  4. Kotak Mutual Funds
  5. HSBC Mutual Funds
  6. Tata Mutual Fund
  7. UTI Mutual Fund
  8. Edelweiss Mutual Funds
  9. Canara Robeco Mutual Fund
  10. BNP Paribas Mutual Fund
  11. Baroda Pioneer Mutual Fund
  12. Religare Mutual Funds
  13. IDBI Mutual Funds
  14. HDFC Mutual Funds
  15. Motilal Oswal Mutual Funds
  16. Sahara Mutual Funds
  17. L&T Mutual Fund
  18. JM Financial Mutual Funds
  19. Fidelity's Mutual Funds
  20. DSP Black Rock Mutual Funds
  21. Taurus Mutual Funds
  22. Morgan Stanley Mutual Funds
  23. Franklin Templeton Mutual Funds
  24. Bharti AXA Mutual Funds
  25. Axis Bank Mutual Fund
  26. IDFC Mutual Funds
  27. Quantum Mutual Funds
  28. Principal Mutual Funds
  29. SBI mutual fund
  30. Aditya Birla Sun Life Frontline Equity Fund
  31. Escorts Mutual Funds
  32. Deutsche Mutual Funds
  33. Pramerica Mutual Funds
  34. ING Vysya Mutual Funds

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Net Worth in Hindi-नेटवर्थ क्या होता है | Net worth कैलकुलेट करना जानिए

क्या आप जानते है? Net worth क्या है? आपकी कितनी NetWorth है? और इसे कैलकुलेट करने के लिए आप नीचें दिए Net worth Formula का use कैसे करेंगे |
what is Net Worth in hindi

What is Net Worth in Hindi

Net worth को समझने के लिए हम इसके दोनों शब्दों को अलग करेंगे -

Net = शुद्ध
Worth = सम्पति 

अर्थात इसका मतलब शुद्ध सम्पति है

इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार
नेट वर्थ किसी व्यक्ति या कंपनी की संपत्ति और दायित्व के बीच का अंतर है। 
इसका उपयोग तो कम्पनी, व्यक्ति , संस्था आदि के साथ किया जाता है जो उस कम्पनी , व्यक्ति या संस्था के आर्थिक स्थितियों को बताता है |


अब सवाल ये उठता है कि कम्पनी, व्यक्ति या संस्था की शुद्ध सम्पति क्या होती है |

कम्पनी, व्यक्ति या किसी संस्था का Net worth उनकी कुल सम्पति (Total Asset) में कुल दायित्व (Total Libelities) में घटाने से प्राप्त होता है |

आपने अक्सर तरह तरह के माध्यमों से चाहे वह टीवी , रेडियो, या फिर समाचार पत्रों में हो, किसी कम्पनी , फिल्म स्टार्स , स्पोर्ट्स पर्सन(खिलाडियों ) के Net worth के बारे में सुना होगा |

अगर आप किसी कम्पनी या सेलिब्रेटीज का आर्थिक स्थिति (Financial Position ) के बारे में जानना चाहते है तो आपको उस कम्पनी या सेलिब्रिटीज का Net worth कैलकुलेट करना होगा |

Networth की गणना

Net worth की गणना करना बहुत ही आसान है अगर आपको जोड़ना व घटाना आता है तो आप आसानी से Net worth कैलकुलेट कर सकते है |

नोट: यह फार्मूला स्टॉक मार्केट की किसी कंपनी के नेट वर्थ को जानने के लिए आप प्रयोग कर सकते है |


Net Worth = (Total Asset -Total Liabilities)
नेट वर्थ = कुल सम्पति – कुल दायित्व

यहाँ पर आपको net worth कैलकुलेट करने के लिए कुल सम्पति व कुल दायित्व को जानना आवश्यक है क्योंकि इनके बिना आप किसी व्यक्ति या कम्पनी का नेट वर्थ नही निकाल सकते है |


कुल सम्पति : सबसे पहले आपको सभी सम्पतियों का लिस्ट बनाना होगा अगर आपने अमिताभ बच्चन की डायलॉग सुनी हो "आज मेरे पास गाड़ी है , बंगला है , बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है? " तो आप आसानी से कुल सम्पतियो की लिस्ट बना सकते हो |


कुल सम्पति में  जमीन , प्लांट , बैंक बैलेंस, इन्वेस्टमेंट, स्टॉक, म्यूच्यूअल फंड्स , गाड़ी, बंगला सब को शामिल किया है |


कुल दायित्व : कुल दायित्व में किसी भी प्रकार का लोन (कार लोन , गोल्ड लोन , होम लोन आदि ) को शामिल किया जाता है |


उदहारण के लिए हमने माना कि एक कंपनी का कुल सम्पति 1000 करोड़ है व कुल दायित्व 700 करोड़ है 
तो उस कम्पनी का नेट वर्थ होगा -

300 करोड़ = 1000 करोड़  – 700 करोड़

इस प्रकार हम कह सकते है कि उस कम्पनी की नेट वर्थ 300 करोड़ है |

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?
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शेयर बाजार क्या है?
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SIP या Lumpsum बेहतर रिटर्न किसमे मिलता है?

फेस वैल्यू क्या है | फेस वैल्यू का कारपोरेशन एक्शन में महत्व | Face Value in Hindi |

Face Value in Hindi: Face Value का कारपोरेशन एक्शन में क्या महत्त्व है? शेयर Split का फेस वैल्यू पर क्या असर होता है ?
Face Value in hindi

Face Value in Hindi

स्टॉक का Face value दिखाता है कि शेयर का वास्तविक मूल्य शेयर प्रमाण पत्र में क्या है | कॉर्पोरेट एक्शन जैसे डिविडेंड और शेयर स्पिलिट, फेस वैल्यू के आधार पर ही लिया जाता है |

उदाहरण: यदि कम्पनी ABC फाइनेंसियल इयर 2012-13 में फाइनल डिविडेंड 60 रूपये देती है वही कंपनी का फेस वैल्यू 5 रूपये है तो कम्पनी ने 60/5= 12 अर्थात कम्पनी ने फेस वैल्यू (5) का 1200%  डिविडेंड दिया |

Face Value व Share Split

जब भी कोई शेयर स्पिलिट होता है तो कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, कोई कंपनी शेयर स्पिलिट तब करती है जब उस कम्पनी के शेयर का भाव बहुत ज्यादा हो जाता है जिससे छोटे निवेशक भी कंपनी के शेयर कम दामों में खरीद सके |

शेयर स्पिलिट के साथ ही शेयर का फेस वैल्यू बदल जाता है, आइये इसे उदहारण की मदद से समझने का प्रयास करे |

मान लीजिये आपने कम्पनी ABC का 50 शेयर 200 रूपये के भाव में खरीद रखे है जिसका फेस वैल्यू 10 रूपये  है लेकिन जब शेयर स्पिलिट किया जायेगा तो आपके पास 100 रूपये के 100 शेयर हो जायेंगे और इसका फेस वैल्यू 5 रूपये का हो जायेगा |

बुक वैल्यू क्या है | बुक वैल्यू की सच्चाई | Book Value in Hindi

BookValue per share की मदद से किसी भी कंपनी के कुल कीमत का कैसे पता लगाया जाता है ? किसी कंपनी का बुक वैल्यू ज्यादा या कम हो तो इसका कंपनी के सेहत से क्या लेना देना है ?
Book Value in hindi

BookValue in Hindi

बुक वैल्यू को जानने से पहले आप से एक सवाल हैं -

जब किसी कंपनी को एक निश्चित समय पर बेचा जायेगा तो आप उस कंपनी के कुल कीमत का पता कैसे लगायेंगे ?

इसका जवाब है बुक वैल्यू (Book Value per Share) , आपने एकदम सही पढ़ा |

Book Value (बुक वैल्यू) किसी भी कंपनी या वस्तु की वह कीमत होती है, जो एक निश्चित समय पर उसे बेचने पर प्राप्त होती है | 

आइये इसे एक उदहारण की मदद से समझने की कोशिश करते है -

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जो बंद होने के कगार पर है अब ऐसे समय में जब कंपनी के एसेट्स (Assets) जैसे जमीन , प्लांट , मशीन आदि को बेचा गया(100 करोड़ ) जिसे रिज़र्व में जोड़ा तो 3500 करोड़ का हुआ |

कंपनी का शेयर कैपिटल 25 करोड़ है मतलब शेयर कैपिटल और रिज़र्व 3525 करोड़ के है |

कम्पनी ने अपने उपर की सारे कर्ज (debts) को चुकाया जो लगभग 1025 करोड़ था |

तो कम्पनी ABC का कुल कीमत 3525 - 1025 = 2500 करोड़ हुआ, लेकिन इस 2500 करोड़ को कंपनी के टोटल शेयर होल्डर के बीच में बांटने पर जो वैल्यू आएगी वही इस कंपनी का बुक वैल्यू होगा |

Book Value Formula

बुक वैल्यू कैलकुलेशन करना बहुत ही आसन है -

Share Capital + Reserves / Total Number of shares = Book Value
शेयर कैपिटल + रिज़र्व / कंपनी के कुल शेयर = बुक वैल्यू

शेयर कैपिटल + रिज़र्व = 2500 करोड़
कुल शेयर की संख्या = 25 करोड़ 

2500 करोड़ / 25 करोड़ = 100 रुपये (बुक वैल्यू )

तो अब आप भी आसानी से इस फार्मूला की मदद से किसी कम्पनी की बुक वैल्यू कैलकुलेट कर के देख सकते हो |

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पीई रेश्यो क्या है | पीई रेश्यो का उपयोग कैसे करते है | Price Earnings (PE) Ratio in Hindi

 शेयर बाजार की बात हो और PE Ratio का जिक्र न हो ऐसा हो नही सकता है लेकिन PE Ratio क्या है ? और शेयर बाजार में क्यों ज्यादा PE ratio यानि Price Earnings Ratio का प्रयोग किया जाता है? तो चलिए जानते है PE Ratio को और Price Earnings Ratio कैसे कैलकुलेट किया जाता है? तथा इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " क्यों कहते है |
PE Ratio in Hindi
अगर आप दो शेयरों, दो उद्योगों, दो देशों के बाजारों की तुलना करना चाहते है तो Price Earnings Ratio बहुत ही काम का है।

आप इसकी सहायता से बहुत आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि शेयर का भाव बढ़ने की कितनी संभावना है |

PE Ratio क्या है ?

PE रेश्यो यानि कि Price Earnings Ratio सबसे पोपुलर रेश्यो है और सब कोई इसे जानना पसंद करते है |
इसकी पॉपुलैरिटी के कारण इसे "फाइनेंसियल रेश्यो सुपरस्टार " भी कहते है | हम EPS की मदद से PE रेश्यो कैलकुलेट करते है |



इसका फार्मूला है -
Market Price / EPS = PE Ratio 
शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय = PE रेश्यो

आप किसी भी कम्पनी का PE रेश्यो तबतक नहीं जान सकते है जबतक आप उसकी EPS नही जान लेते है |

आइये इसे उदहारण की सहायता से समझने की कोशिश करे , एक कंपनी JKL है जिसके 10 लाख शेयर से कंपनी को  20 लाख Earnings (शुद्ध लाभ ) हुआ और इस कम्पनी के शेयर का मार्केट प्राइस (शेयर की बाजार में कीमत) 40 रूपयें है |


तो इसका EPS 20 लाख / 10 लाख = 2 रूपये होगा |

जबकि इसका PE ratio होगा-

40 / 2 = 20 रुपयें 

इसका एक मतलब ये भी होता है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स प्रति यूनिट प्रॉफिट पाने के लिए 20 गुना ज्यादा पैसे देने को तैयार है |

PE (Price Earnings) Ratio कैसे प्रयोग करे?

Price Earnings Ratio का प्रयोग कर आप किसी कंपनी के ग्रोथ बढ़ने या घटने का अंदाजा भी लगा सकते है | इसके लिए कम्पनी के पिछलें कुछ सालों का रिकॉर्ड देखियें और पता करे कि मैक्सिमम PE कितना था उसके बाद पुरे इंडस्ट्री के औसत PE को पता करे और अंत में पुरे बाजार का औसत PE पता करके एक दुसरे से तुलना करे |

ध्यान रखने वाली बात (points to remember)

  • कभी भी केवल PE रेश्यो को ही देखकर निवेश न करे |
  • पूरी कंपनी व बिज़नेस की फंडामेंटल एनालिसिस करे |
  • PE दिखाता है कि कोई शेयर सस्ता या महंगा ट्रेड हो रहा है | 
  • ज्यादातर लोग 21 से ज्यादा PE वाले स्टॉक पर इन्वेस्ट नही करते |
" किसी कंपनी का पीई रेशियो निश्चित संख्या नहीं होता. यह हमेशा बदलता रहता है. मान लीजिए किसी कंपनी का पीई रेशियो आज 20 है. इसका मतलब यह नहीं है कि यह हमेशा 20 रहेगा. कंपनी के प्रदर्शन और शेयर बाजार में उसके शेयर की कीमत के अनुसार यह रेशियो घटता-बढ़ता रहता है. कंपनी के अच्छा मुनाफा कमाने पर उसके शेयरों की मांग बढ़ती है. इससे उसका पीई रेशियो बढ़ जाता है. इसी तरह अगर किसी कंपनी को नुकसान हुआ है तो इसके पीई रेशियो में गिरावट आ सकती है"

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ईपीएस क्या है | EPS Full Form in Hindi

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ईपीएस क्या होता है | EPS Full Form | What is EPS in Hindi

EPS in Hindi: EPS क्या है ? एक नये निवेशक को EPS के बारे में क्यों जानना चाहिए ? आज हम EPS Formula के मदद से EPS Calculate करेंगे |
eps full form in hindi

EPS Full Form

EPS Full Form - इसका पूरा नाम Earnings Per Share है, किसी भी कंपनी के आर्थिक सेहत जानने के लिए आप उस कंपनी के EPS को पता करे इससे आपको कम्पनी के तिमाही, वार्षिक ग्रोथ का अंदाजा लग जाता है|

EPS Calculation Formula

इस Formula का प्रयोग करके आप आसानी से किसी भी कंपनी का EPS Calculation कर सकते है |

शुद्ध लाभ / कुल शेयरों की संख्या
Net Profit / Total Number of Shares


मान लीजिये एक कंपनी ABC है जिसके मालिक ने 1 लाख शेयर, स्टॉक मार्केट में लिस्ट करा रखे है |

पहले वर्ष कम्पनी ने अपने व्यापर से 40 लाख रूपये का अर्निंग्स (Earnings)  या शुद्ध लाभ(Net profit) करती  है |
40 लाख / 1 लाख = 40 रुपयें



दुसरे वर्ष कंपनी को व्यापर में घाटा होता है जिससे कम्पनी केवल 20 लाख रूपये का अर्निंग्स (Earnings) ही करती है |
20 लाख / 1 लाख = 20 रुपयें

तीसरे वर्ष कंपनी के मालिक सेल्स पर फोकस करते है जिससे कम्पनी की अर्निंग्स (Earnings) बढ़कर 60 लाख रूपये हो जाती है |
60 लाख / 1 लाख = 60 रुपयें


आपने देखा किस तरह से कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर कंपनी के शुद्ध लाभ(Net profit) में उतार चढ़ाव के साथ घटती बढती रहती है | 40 , 20 फिर 60 रुपयें


किसी कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर ज्यादा होना भी एक अच्छा संकेत होता है, क्योकिं कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर जितना ज्यादा होता है इससे इन्वेस्टर्स को उतना ही ज्यादा फायदा होता है | 

जानिये म्युचुअल फण्ड को आसान भाषा में | म्यूच्यूअल फण्ड कैसे काम करता है | Mutual Fund in Hindi

Mutual Fund in Hindi: क्या आप  जानते है म्युचुअल फंड  क्या है ?(What is Mutual Fund) और Mutual Funds काम कैसे करता है ? और म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने से निवेशको को क्या फायदा है ?

mutual fund in hindi

म्युचुअल फण्ड क्या है? (Mutual fund Hindi)

 Mutual Fund निवेश का एक बेहतर माध्यम है जिसमे निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है |

Mutual Fund का अर्थ है -लोगों से एकत्रित किया हुआ बहुत सारा पैसा है जिसे निवेश करने के लिए लोगों से, लोगों के फायदे के लिए कलेक्ट किया जाता है |

इसमें लोगों को सामूहिक रूप से फायदा होता है | म्युचुअल फंड को इस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट फण्ड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है क्योंकि इसमें सभी का पैसा लगा होता है |

म्युचुअल फंड की एक बहुत महत्वपूर्ण बात जो आपको याद रखनी चाहिए वह यह है कि  म्युचुअल फंड एक डाइवर्सिफाइड इन्वेस्टमेंट होता है यंहा पर डाइवर्सिफाइड का मतलब बेहतर व नियमित लाभ के लिए फंड मैनेजर अलग अलग सेक्टर्स व इंडस्ट्री में निवेश करती है | जैसेः शेयर मार्केट , गवर्नमेंट बांड  व कॉर्पोरेट बांड आदि |

इस बात का ध्यान रखे कि म्युचुअल फंड मैनेजर आपके बताये गये ऑब्जेक्टिव व शर्त के अनुसार ही निवेश करता है इसलिए एक बेहतर mutual funds को चुन कर निवेश करे जो आपको ज्यादा लाभ दे सकता है |

उदाहारण:

मान लीजिये म्यूच्यूअल फण्ड एक क्रिकेट टीम है, क्रिकेट टीम में 11 प्लेयर होते है, लेकिन म्यूच्यूअल फण्ड फण्ड में 11 से ज्यादा कंपनिया हो सकती है|

अब अगर क्रिकेट में दो बैट्समैन जल्दी आउट हो जाते है तो बाद के 4-5 बैट्समैन पारी को अच्छे से सँभालते है तो मैच जीत जाते है |

ठीक उसी प्रकार,म्यूच्यूअल फण्ड मे यदि 3 कम्पनी से आपको फायदा नही होता है तो 8-10 कम्पनियां मिलकर आपको फायदा दिला देती है |

Mutual Fund कैसे काम करता है ?

Mutual Fund के प्रकार अलग अलग है पर सभी म्युचुअल फंड Unit Investment System पर आधारित है मतलब जब कोई निवेशक म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट करता है तो उसे पैसे के बदले Mutual Fund Unit दिया जाता है |

उन निवेशको को जो म्युचुअल फंड में निवेश करते है उन्हें Mutual Fund Unit Holder भी कहते है |

प्रत्येक Mutual Fund Unit का मूल्य होता है जो समय के साथ या रोजाना बदलते रहता है | यह यूनिट प्राइस (Unit Price) कहलाता है |

यह यूनिट प्राइस (Unit Price) अधिक होने पर निवेशक को लाभ व कम होने पर हानि होता है | जब Mutual Funds इन्वेस्टमेंट से लाभ होता है तो उस लाभ को ये म्युचुअल फंड मैनेजर निवेशकों में उनके निवेश या Mutual Fund Unit के आधार पर बाँट देते है |

Mutual Fund के लाभ

  • Mutual Fund से आपके जेब पर भार नही पड़ता है क्योंकि आप इसमें SIP Investment कर सकते है |
  • आप वित्त या फाइनेंस के बारे में सीखना नही चाहते है या आपके पास वक्त कि कमी है |
  • बचत बैंक से ज्यादा ब्याज या रिटर्न कमाना चाहते है |
  • एक बेहतर विकल्प है, यदि आपके पास बहुत कम पैसा है लेकिन आपको निवेश करना है तो आप 100, 500 रूपये से शुरु कर सकते है|
  • लम्बी अवधि में कम्पौन्डिंग का लाभ मिलता है |


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बेस्ट स्टॉक ब्रोकर कैसे चुने - फुल गाइडेंस | Best Stock Broker Kaise Chune

Best Stock Broker Kaise Chune: एक शेयर ब्रोकर ( Stock Broker ) हमारे buy व sell आर्डर को स्टॉक मार्केट में पूरा कराता है,आज की पोस्ट में हम How to Choose best Stock Broker in India जानेंगे |

Best Stock Broker kaise chune

Best Stock Broker कैसे चुने?

जब हम स्टॉक मार्केट में buy व sell आर्डर की बात करते है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले स्टॉक ब्रोकर का नाम आता है क्योंकि स्टॉक ब्रोकर के पास ही हम ट्रेडिंग व डीमैट अकाउंट ओपन कराते है |

लेकिन एक नया व्यक्ति जब स्टॉक मार्केट की दुनिया में आता है तो उसे स्टॉक ब्रोकर के बारे में कोई बात पता नही होती है स्टॉक ब्रोकर क्या है और वे क्या करते है |

आइये जानते है एक स्टॉक ब्रोकर को चुनने से पहले हमें क्या क्या देखना चाहिए |

एक स्टॉक ब्रोकर हमे संतुष्ट करने के लिए बहुत सारी सर्विसेस देते है और उन सर्विसेस के आधार पर या आपकी जरूरतों के आधार पर एक Best Stock Broker को परिभाषित कर सकते है |

हमने स्टॉक ब्रोकर क्या काम करते है वाले पोस्ट में स्टॉक ब्रोकर के दो प्रकार बताया है |
  • फुल सर्विस ब्रोकर ( Full Service Broker )
  • डिस्काउंट सर्विस ब्रोकर ( Discount Service Broker )
अब यहाँ सवाल ये आता है कि Best Stock Broker  कौन सा है जिसे चुनना चाहिए इसके लिए आपको कुछ बातों को ध्यान रखना आवश्यक है -
  • आप एक नये निवेशक है तो आपको किस प्रकार की सुविधा ( फुल सर्विस या डिस्काउंट सर्विस) चाहिए | 
  •  क्या आप खुद से रिसर्च करना चाहते है |
  • स्टॉक ब्रोकर की नजदीकी ब्रांच कहा है |
  • आप कम से कम सर्विस चार्ज (ब्रोकरेज ) देना चाहते है |
  • जो स्टॉक ब्रोकर आप चुनने वाले है उसका कस्टमर रिलेशनशिप कैसा है |
  • स्टॉक ब्रोकर ने कोई फ्रॉड या स्कैम या पैसा लेकर भागी नही है मतलब शेयर ब्रोकर की हिस्ट्री कैसी है |
  • फण्ड ट्रान्सफर करने के फैसिलिटी कैसी है |
  • ट्रेडिंग प्लेटफार्म (मोबाइल एप्प व वेबसाइट) कैसा है |
अगर आप इन सब बातों को गौर करे तो आप एक Best Stock Broker को सेलेक्ट कर सकते है जो फुल सर्विस ब्रोकर या डिस्काउंट सर्विस ब्रोकर में से कोई भी हो सकता है |