क्या है म्यूच्यूअल फण्ड एनएफओ | न्यू फण्ड ऑफर के सारे राज | Mutual Funds NFO in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड निवेश की बात की जाती है तो उसमें म्यूच्यूअल फण्ड NFO के बारे में चर्चा जरुर होती है | तो चलिए जानतें है आखिर म्यूच्यूअल फण्ड NFO क्या है और इसे जानना क्यों जरुरी है ?
Mutual Fund NFO in Hindi

Mutual Funds NFO क्या है?

जब भी कोई AMC ( एसेट मैनेजमेंट कंपनी ) कोई नया फण्ड स्कीम लाती है तो उसे NFO कहा जाता है | NFO का फुल फॉर्म New Fund Offer (न्यू फण्ड ऑफर ) है |

जब कोई AMC म्यूच्यूअल फण्ड NFO लाती है तो इसका उद्देश्य निवेशकों से पैसा जुटाना होता है ताकि शेयर्स या सरकारी बांड आदि में लगाया जा सकें |

एसेट मैनेजमेंट कंपनी NFO (न्यू फण्ड ऑफर) एक निश्चत समय के लिए या किसी भी समय निवेश करने के लिए ला सकती है अर्थात् Mutual Fund NFO क्लोज एंडेड या ओपन एंडेड हो सकते है |

कई AMC ( एसेट मैनेजमेंट कंपनी ) ऐसी भी होती है जो न्यू फण्ड ऑफर केवल इसलिए लाती है ताकि उनकें पास सभी प्रकार के फण्ड स्कीम हो सकें | उदाहरण के लिए अगर XYZ एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास लार्ज कैप फण्ड व स्मालकैप फण्ड है तो ऐसे में वो कंपनी अपना मिडकैप फण्ड भी NFO के जरिये ला सकती है |

अक्सर ऐसी कंपनियां (AMC) पब्लिक से ज्यादा से ज्यादा पैसा जुटाने के लिए NFO (न्यू फण्ड ऑफर) का जोरदार और जोरशोर से प्रचार प्रसार करती है ताकि अधिक से अधिक निवेशक उस कम्पनी के NFO में निवेश करें |

क्या Mutual Fund NFO में पैसा लगाना चाहिए?

इसके जवाब में मेरा एक ही सवाल है | Mutual Fund NFO में पैसा क्यों लगाना चाहिए ? क्या आपको NFO में केवल इसलिए इन्वेस्ट कर देना चाहिए क्योकिं आपको म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट 10 रुपयें में मिल रहे है |

 आपको NFO में पैसा बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए क्योकिं मार्केट में इतनें सारे स्कीम या फण्ड पहले से उपलब्ध है | जिनके फण्ड, फण्ड मैनेजर व पोर्टफोलियो के परफॉर्मेंस का ट्रैक रिकार्ड भी उपलब्ध है लेकिन NFO या नये फण्ड में आपको इसकी कोई जानकारी नही होती है |

और यदि आपको अपने पोर्टफोलियो को बेहतर करने के लिए न्यू स्कीम की जरुरत है तब भी आपको NFO को बहुत ही ध्यानपूर्वक चुनाव करना चाहिए |

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अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है या आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे है तो Mutual fund NAV को जानना बहुत ही आवश्यक है | तो आइये म्यूच्यूअल फण्ड NAV से जुड़ीं सारी बातों को जानतें है |
Mutual Fund NAV in Hindi

Mutual Fund NAV क्या है?

Mutual Fund NAV का मतलब नेट एसेट वैल्यू होता है | इसे आप म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट का प्राइस या दाम भी कह सकते है |

जब आप म्यूच्यूअल फण्ड खरीदते है तो आपको इन्वेस्ट किये गये पैसे के लिए Mutual फण्ड यूनिट दिया है और इसके प्रति यूनिट के दाम को ही NAV कहा जाता है |

Mutual Fund NAV का प्राइस या दाम घटता-बढ़ता रहता है | और इस उतार-चढाव के कारण ही म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टर को फायदा या नुकसान होता है | मतलब mutual fund NAV से आपके इन्वेस्टमेंट में कितना रिटर्न आया है इसका पता लगाया जाता है |



म्यूच्यूअल फण्ड NAV का उतार चढाव शेयर बाजार और डेट मार्केट आदि पर निर्भर करता है | अर्थात इन सिक्योरिटीज़ या साधन के दाम घटने या बढ़ने का सीधा संबध Mutual fund NAV से होता है | यानि कि म्यूच्यूअल फण्ड NAV भी घटता-बढ़ता है |

Mutual Fund NAV कैसे काम करता है ?

मान लीजिये एक फण्ड में NAV का प्राइस 50 रूपये है और आप 5000 रूपयें निवेश करतें है तो आपको 5000/50 =  100 म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट मिलते है |

मान लीजिये एक साल बाद Mutual Fund NAV का प्राइस 60 रूपयें हो जाता है | इसका मतलब NAV में 20%
का ग्रोथ हुआ है | और अगर आप इसे 60 रुपयें के NAV में ही बेच देते है तो आपको 60 X 100 यूनिट = 6000 रुपयें मिलते है |

नोट: जब आप किसी म्यूच्यूअल फण्ड को बेचते है या रिडीम करते है तो आपको एग्जिट लोड के रूप में फीस देना होता है | जो 1% या एक फीसदी होती है |

मतलब जब आप म्यूच्यूअल फण्ड से बाहर निकलते है तो आपको  60 x 100 यूनिट - 1% एग्जिट लोड ( इस उदाहारण में 60 रूपये) = 5940 रूपयें मिलते है |

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एसआईपी या लम्पसम - बेहतर रिटर्न किसमें मिलता है | SIP vs Lumpsum in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करने के दो तरीके है - SIP व लम्पसम | इन दोनों तरीकें से इन्वेस्ट किया जा सकता है लेकिन दोनों के परफॉर्मेंस की तुलना कई कंडीशन के आधार पर की जाती है | इसके अतिरिक्त SIP व लम्पसम दोनों में अलग-अलग लक्ष्य और रिस्क को ध्यान में रखकर निवेश किया जाता है |
SIP Vs Lumpsum in hindi

SIP निवेश

SIP में छोटी-छोटी बचत करके निवेश किया जा सकता है अर्थात् SIP के लिए आपके पास ज्यादा पैसा होना जरुरी नही है | SIP स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव के रिस्क को कम कर देता है क्योकिं SIP कम पैसों से शुरु किया जाता है और मार्केट नीचें जाने से आपको कम पैसे से ही ज्यादा म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट मिलने लगते है | मतलब SIP से रूपी कास्ट एवरेगिंग का लाभ उठाया जा सकता है | आप SIP को कम पैसे से शुरुआत कर बाद में SIP की रकम बढ़ा भी सकते है |

उदाहरण: प्रति महीनें 1000 रूपयें का SIP, 12 महीनें में 12000 रूपयें |


Lumpsum निवेश

म्यूच्यूअल फण्ड में लम्पसम निवेश आपको लम्बें समय में अच्छी रिटर्न देता है लेकिन अगर मार्केट क्रैश होता है तो आपको बहुत ज्यादा लोस भी होता है क्योकिं लम्पसम निवेश में एकमुश्त (बड़ी रकम ) एक ही बार में इन्वेस्ट किया गया होता है | इसलिए लम्पसम निवेश शेयर बाजार के कंडीशन को अच्छी तरह से जाँच परख कर किया जाता है | सही समय में किया गया लम्पसम निवेश लॉन्ग टर्म में शानदार रिटर्न दे सकता है पर लम्पसम निवेश में हमेशा मार्केट मार्केट डाउन होने की चिंता इन्वेस्टर्स को परेशान करती है | मतलब लम्पसम निवेश में रिस्क का स्तर बहुत ज्यादा होता है |

उदाहरण: एक बार में ही 12000 रूपयें का लम्पसम निवेश, 12 महीनें में 12000 रूपयें |

SIP vs Lumpsum बेहतर रिटर्न किसमे मिलता है?

SIP या Lumpsum निवेश में बेहतर रिटर्न पूरी तरह से शेयर मार्केट के कंडीशन पर निर्भर करता है | ऊपर जाते शेयर बाजार में लम्पसम निवेश बेहतर रिटर्न देता है | जबकि गिरते शेयर बाजार में SIP निवेश से बेहतर रिटर्न मिलता है |

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SIP in Hindi-एसआईपी क्या है और कैसे करें निवेश

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SIP in Hindi: पिछले कुछ सालो में म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट बहुत तेजी से बढ़ा है | इसकी मुख्य वजह म्यूच्यूअल फण्ड में SIP या सिप का विकल्प है | लेकिन SIP क्या है और mutual fund SIP  में निवेश कैसे करते है? तो चलिए जानते है SIP यानि Systematic Investment Plan से जुड़ी सारी जानकारी व SIP के क्या-क्या फायदे है ?
SIP in hindi

SIP (Systematic Investment Plan) क्या है ?

SIP या सिप का अर्थ सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान(systematic investment plan) है मतलब आप एक सिस्टेमेटिक ढंग से हर महिना एक निश्चित राशि म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट कर सकते है |

उदाहरण- मान लीजिये आप हर महीनें 1000 रूपये की बचत करते है और निवेश करना चाहते है, आप यह सोच कर निवेश नही करते है कि 1000 रूपये बहुत छोटा अमाउंट है लेकिन SIP (Systematic Investment Plan) के जरिये से आप हर महीने एक हजार रूपये भी निवेश कर सकते है |

SIP या सिप के फायदे

SIP में आपको एकमुश्त पैसे लगाने की जरूरत नही होती है अतः जिसके पास कम पैसे है वह भी SIP करा सकते है |

SIP करने से आपको शेयर बाजार के उतार-चढाव का भी डर नही होता है क्योकिं आप थोड़ा-थोड़ा पैसा हर महीनें लगाते है इसलिए आपको पैसा डूबने का डर नही होता है |

SIP की राशि को समय समय में घटाया या बढ़ाया जा सकता है | जैसेः शेयर बाजार जब नीचें रहता है तो उस समय SIP की राशि को बढ़ाने से आपको ज्यादा म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट मिलते है |

SIP कैसे करें?

SIP करने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होता है ताकि आपको रिटर्न भी अच्छा मिलें और आपके लक्ष्य भी पूरा हो जायें
  1. अपने लक्ष्य निर्धारित करे उसके बाद ही SIP कराये और SIP बचत किये गये पैसों का ही करें 
  2. सिप या SIP लम्बें समय के लिए करें क्योकिं लॉन्ग टाइम में ही SIP अच्छा रिटर्न देती है 
  3. SIP करने से पहले KYC केवाईसी कराले यह केवल एक बार की प्रक्रिया है | उसके बाद आप किसी भी फण्ड हाउस से म्यूच्यूअल फण्ड में SIP करा सकते है 
  4. SIP कराने के लिए फ़ोटो, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक डिटेल्स, लेकर नजदीकी फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट से भी संपर्क कर सकते है 
  5. निवेश की राशि और तारीख़ तय जरुर करें | जिससे आपका पैसा एक निश्चित दिनाकं को आपके खाते से निवेश के लिए कटौती किया जा सकें
  6. SIP शुरु करने से पहले अपने फाइनेंसियल सलाहकार से परामर्श अवश्य करें

SIP करते समय इन गलतियों से बचे

लम्बे समय  के लिए निवेश न करना - अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में 3-5 वर्ष के लिए sip निवेश नही करते है तो आपको म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश नही करना चाहिए क्योकि म्यूच्यूअल फण्ड में लम्बे समय में ही बेहतर रिटर्न मिलता है लेकिन निवेशक अक्सर म्यूच्यूअल फण्ड से अपना पैसा बहुत जल्दी निकाल लेते है |

समय के साथ SIP की रकम न बढ़ाना - SIP के जरिये कम पैसे से निवेश शुरु कर सकते है लेकिन जब समय के साथ इनकम बढ़ती है तो SIP की रकम भी बढ़ाना चाहिये, परन्तु अक्सर निवेशक यह गलती करते है और समय के साथ SIP की रकम नही बढ़ाते है |

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रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | रेगुलर प्लान व डायरेक्ट प्लान में अंतर | Regular Mutual Funds in Hindi

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म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक बेहतर ऑप्शन समझा जाता है | म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश आप दो तरीके से कर सकते है | रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड या डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड | पर आज हम रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानने वाले है |
Regular Mutual Funds in Hindi

म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर निवेश का विकल्प माना जाता है क्योकिं इसमें कम रिस्क में अच्छा रिटर्न लिया जा सकता है |

और इसकी ख़ास बात यह है कि इसमें आपको केवल पैसे इन्वेस्ट करने होते है, रिसर्च व स्टडी का काम प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर के द्वारा किया जाता है |

Regular Mutual Funds क्या है ?

अगर आपको म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में कोई जानकारी नही है तो भी इन्वेस्ट कर सकते है क्योकिं रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड में आपको डिस्ट्रीब्यूटर के द्वारा मदद या सपोर्ट मिल जाती है |

म्यूच्यूअल फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर जब आपकी मदद करता है तो इसके लिए उसे फण्ड हाउस के द्वारा कमीशन मिलता है | फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर को यह कमीशन आपके इन्वेस्ट किये गये पैसे से दिया जाता है |

म्यूच्यूअल फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट को कमीशन केवल एक बार नही मिलता है, बल्कि जब-जब आप निवेश करते है तो उसमे से थोड़ा पैसा काटकर कमीशन के रूप में दे दिया जाता है |

रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड व डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड अंतर केवल डिस्ट्रीब्यूटर सपोर्ट और कमीशन का है |

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | What is Mutual Funds in Hindi

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डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड क्या है | डायरेक्ट प्लान क्यों चुनें | Direct Mutual Funds in Hindi

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इसमें कोई शक नही है कि म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक बेहतर विकल्प है | लेकिन म्यूच्यूअल फण्ड  में दो तरह से निवेश किया जा सकता है | रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड व डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड | पर आज हम डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड के बारें में बात कर रहे है |

Direct Mutual Fund in Hindi

इससे पहले म्यूच्यूअल फण्ड को शोर्ट में समझ लेते है | म्यूच्यूअल फण्ड बहुत सारें इन्वेस्टर्स के पैसे को कहा जाता है जिनका उद्देश्य निवेश करके रिटर्न कमाना होता है | म्यूच्यूअल फण्ड की खास बात यह है कि इसमें लगाया गया पैसा स्टॉक मार्किट, गोल्ड , रियल एस्टेट (जमींन), बांड आदि में लगता है |

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करना चाहते है तो आप फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर या फाइनेंसियल सलाहकार की मदद ले सकते है | पर यह डायरेक्ट प्लान में जरुरी नही है |

 Direct Mutual Fund क्या है?

अगर आप डिस्ट्रीब्यूटर का सपोर्ट नही चाहते है तो डायरेक्ट प्लान आपको फण्ड में निवेश करने की सुविधा देता है | हर फण्ड का डायरेक्ट प्लान होता है ताकि आप बिना किसी डिस्ट्रीब्यूटर सपोर्ट के भी फण्ड में इन्वेस्ट कर सके |

डायरेक्ट प्लान, रेगुलर प्लान की तुलना में सस्ता होता है, क्योकिं  रेगुलर प्लान में आपकों 0.5 फीसदी से 1.0 फीसदी ज्यादा कमीशन देना होता है |

डायरेक्ट फण्ड में इन्वेस्ट करने के लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नही होती है, बल्कि डायरेक्ट प्लान के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट आधार कार्ड, पैन कार्ड, और एक बैंक अकाउंट की जरूरत होती है | या आप केवाईसी भी करा सकते है |

रेगुलर म्यूच्यूअल फण्ड व डायरेक्ट म्यूच्यूअल फण्ड अंतर केवल डिस्ट्रीब्यूटर सपोर्ट और कमीशन का है |

नोट: डायरेक्ट प्लान में निवेश उन लोगों के लिए सही होता है जिन्हें म्यूच्यूअल फण्ड की जानकारी है | अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में नही जानते है तो ऐसें में आपको म्यूच्यूअल फण्ड डिस्ट्रीब्यूटर या फाइनेंसियल सलाहकार से मदद लेना अच्छा होता है |

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बचत कैसे बढ़ायें | बचत के कारगर उपाय | How to Save Money in Hindi

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How to Save Money in Hindi:बचत कैसे करें ? इसे जाननें से पहले आपको ये जानना जरुरी है कि पैसों की जरुरत हमें हर वक्त होती है | पैसों के बिना हम दैनिक जरुरत की समान भी खरीद नही सकते है | इसलिए आपको पहले से तैयार होना जरुरी है |

How to save money in hindi

आप बचत करके अपने भविष्य के लिए पैसें इक्कठे करते है | लेकिन बचत करने से पहले आपको दो चीज समझनी है - पहला आपकी जरूरत | दूसरा आपकी इच्छाओं को | क्योकिं बचत का बीज इन्ही दोनों के बीच में बोया जाता है |

How to Save Money

आज मैं आपको एक तरीकें के बारे में बताऊंगा जो आपको पैसें बचाने में मदद करेगी, और आपको इसके लिए ज्यादा कुछ करने कि जरूरत भी नही होगी | यह तरीका बहुत ही प्रभावशाली है, अगर आपने इसे अपना लिया तो आप आसानी से बचत करनें कि आदत व अनुशासन बना लेंगे |

एक गाँव में एक लड़की रहती थी, जो रोजाना अपने परिवार के लिए खाना बनाती थी | लड़की खाना बहुत मस्त बनाती थी | सब घरवाले उसकी तारीफ़ करते नही थकते थे|

लड़की होशियार भी थी | वह जानती थी कि कभी-कभी घर में चावल की कमी हो जाती है, इसलिए वह जब सभी के लिए खाना बनाती तो थोड़ा सा चावल, सभी के खुराक वाले बर्तन से निकालकर अलग बर्तन में रख देती थी |

और इससे परिवार वालों को कोई फर्क भी नहीं पड़ता था | वे रोजाना भर पेट खाना खाते थे | पर रोज थोड़ा सा चावल निकाल करके रखने से वह लड़की महीनें में दो किलो चावल बचा लेती थी | जो उसके परिवार के लिए दो दिन का खुराक था |

टिप:  इसी प्रकार अगर आप भी उस लड़की की तरह रोजाना अपनें खर्चों से 10 रूपये भी बचाते है तो आप एक महीने में लगभग 300 रूपये बचा लेंगे | आप 10 रूपये को आपकी इच्छानुसार बढ़ा सकते है | इस तरीके से आप जितना चाहें उतना बचा सकते है | आपको इसका पता भी नही चलेगा की आप बचत भी करते है | और आपके पास बहुत सारे पैसे इक्कठे हो जायेंगे |


अंतिम: अगर आप गैर-जरुरी चीजों पर खर्च न करके, उन पैसों कि बचत करते है तो एक समय ऐसा आएगा जब आपके पास बहुत सारें पैसें होंगे | लेकिन बचत करने के बाद आपको उन पैसों को निवेश करना होगा, जिससें पैसें भी आप के लिए कमाना शुरू कर देंगे | और इससे आपके पास आय के दो सोर्स (  स्त्रोत ) हो जायेंगे |

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पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग क्या है | दुनिया का आठवां अजूबा क्यों कहतें है | Power Of Compounding in Hindi

पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) जिसे दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाता है | आज सब कोई ये नही जानते है कि हम पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके कैसे अपने जीवन में सफलता की ओर आगे बढ़ सकते है?

Power Of Compounding in Hindi


Power Of Compounding

पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) के बारे में दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने कहा: "Compound interest या चक्रवृधी व्याज दुनिया का आठवां अजूबा है, क्योकिं जो इसे समझता है, वो कमाता (Earn) है, और जो इसे नहीं समझता वह भरता (Pay) है"

कोई भी इन्सान चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न हो पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग ( Power Of Compounding ) का प्रयोग करके सफल हो सकता है | आप भी इसे अपने जीवन में अप्लाई (प्रयोग ) करके निश्चित ही सफल हो सकते है |

उदहारण से समझे -

राम, श्याम और मोहन तीन दोस्त थे, तीनो ने एक साथ एक ही कम्पनी में काम की शुरुवात की थी | सभी 9 बजे ऑफिस काम पर जाते थे ?

राम को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग के बारे में जानकारी थी इसलिए वह रोज सुबह जल्दी उठ कर योग व सेल्फ इम्प्रोविंग किताबें पढ़ता था, और ऑफिस में थोड़ी सी ज्यादा काम करता थे इसलिए कभी कभी उसे लेट भी हो जाता था |

श्याम वक्त का पाबंद था, वह रोज सुबह 7 बजे उठता था फिर तैयार होकर ऑफिस निकल जाता था | ऑफिस का काम 5 बजे समाप्त करके वह घर आ जाता था |

जबकि मोहन रोज सुबह 8 बजे उठता था और फिर जल्दी जल्दी तैयार होकर काम पर निकल जाता है लेकिन ऑफिस में भी उसका मन काम पर नही लगता और वह काम समाप्त होने से पहले ही ऑफिस से निकल जाता था |

एक साल बाद जब तीनों के काम को जांचा परखा गया तो निरीक्षक ने पाया की राम ने अपने ऑफिस में सबसे अच्छा काम किया है, उसे प्रमोट करके मैनेजर बना दिया और उसकी तनख्वाह भी बढ़ा दी गयी |

जबकि श्याम वक्त का पाबंद था इसलिए उसका काम भी ठीक था उसकीं तनख्वाह में थोड़ी सी वृद्धि हुई |

लेकिन जब मोहन के कामों की जांच परख की गई तो पाया की उसने सालभर में बहुत काम किया है और ऑफिस में सबसे कम काम करने वाले के लिस्ट में उसका नाम पहले स्थान पर है इसलिए उसे कंपनी से निकाल दिया गया |

इस तरह एक ही कंपनी में एक साथ काम करने वाले तीन दोस्तों को पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग का अलग अलग परिणाम मिला |

जिसने पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग को समझा उसने कमाया , जिसने इसे नही समझा उसने खोया |

आप भी अपने जीवन में पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग सही तरीके से करे और राम की तरह बने |

क्योंकि "बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है "  चाहे वह सफलता का हो या फिर असफलता का |

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बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शन क्या है | Best Investment Options in Hindi

क्या आप जानते है? Best Investment Options/Plans कौन सा है ? आज इस पोस्ट में आपके सारे सवालो के मिलने वाले है तो इसे लास्ट तक जरुर पढ़े |

अलग- अलग लोग अलग- अलग चीजों में इन्वेस्ट करते है क्योंकि सभी लोगों का पसंद अलग अलग होता है | किसी को खाना अच्छा लगता है , किसी को गाना अच्छा लगता है | इसी प्रकार किसी सोना पसंद है तो किसी म्यूच्यूअल फण्ड या स्टॉक मार्किट इन्वेस्ट न करके रोना पसंद है | सबकी चॉइस अलग है | इश्वर ने सबको बनाया ही ऐसा है |

Best Investment Options in Hindi


मैं बेस्ट इन्वेस्टमेंट के बारे में बताने के बजाय खाना, गाना , सोना और रोना क्यों रो रहा हूँ | 

आपको ये बताना जरुरी था कि सब के पास अच्छे आप्शन होते है, लेकिन लोगों का पसंद ही ऐसा है कि वें रिस्क व ज्ञान लेते ही नही है |

चलो भी अब पकाना बंद करो और बताओ कि रिटर्न किसमें ज्यादा मिलता है | कुछ ऐसा ही तो नही सोच रहे न |
तो चलो फिर best investment plans के बारे में बता ही देता हूँ |

Best Investment Options/Plans in Hindi

इन्वेस्टमेन्ट आप्शन बहुत सारे है लेकिन मैंने जो जिक्र किया है (रिस्क, ज्ञान , व रिटर्न ) के आधार पर लोग अलग अलग आप्शन में इन्वेस्ट करते है |


फिक्स्ड डिपाजिट: सबसे आसन तरीका इन्वेस्ट करने का | बस बैंक में जाकर बोल दो "सर फिक्स्ड डिपाजिट " करना है | उसके बाद आपको 7 - 8 % का रिटर्न तो पक्का मिल जायेगा, लेकिन एक सीक्रेट बात बताता हूँ महंगाई दर 3% - 4% से बढ़ता है | महंगाई दर आपको दिखाई नही देगी लेकिन खा पूरा जाएगी | आपके पैसे की वैल्यू | और फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज दर में महंगाई दर घटा दो फिर जो बचेगा वो तुम्हारा |

रियल एस्टेट: जमींन जायदाद बोलते है शायद इसे | 8% - 9% तो रिटर्न दे देती है यह भी | लेकिन सोच समझ के खरीदना कमर्शियल एरिया व रेजिडेंशियल एरिया के हिसाब से मिलता है रिटर्न |

गोल्ड : आपको सोना है या आपको सोना चाहिए | लिखलो किसी कागज में वरना खो जाओगे सपने में | सोना 11% - 12% का रिटर्न देती है और सोना आभूषण तो है ही |

म्यूच्यूअल फंड:  फेसबुक में म्यूच्यूअल फ्रेंड और लाइफ में म्यूच्यूअल  फण्ड बहुत ही जरुरी  है | रिस्क जो कम हो जाता है | टेंशन ख़तम हो जाता है | कम रिटर्न व कम दोस्त होने का | म्यूच्यूअल फंड  15% - 16% का रिटर्न दे देता है | जो कि कम नही है | इससे आप स्टॉक मार्किट में भी पैसा लगा सकते हो | बिना किसी पढ़ाई व रिसेअर्च के | लेकिन थोड़े से रिस्की होते है ये म्यूच्यूअल फंड, पर आप फण्ड मैनेजर को बता कर रिस्क कम कर सकते  है | बहुत आप्शन है इसमें |

स्टॉक मार्केट: मैं न इसके बारे में बताने वाला ही नही था | क्योंकि बहुत से लोग सुनके ही डर जाते है | इसलिए मैंने इसको लास्ट में रखा है| इसमें रिटर्न ज्यादा मिलता है | 20% मिलता है | कई लोग तो रगड़ के बिज़नस का रिसर्च करने के बाद 35% तक ले आते है | रिटर्न | हैं न बहुत रिस्की | रिटर्न लाना | लेकिन 20% रिटर्न लाना भी बहुत संतोषजनक है | लम्बे समय में शेयर बाजार 100X (आपका पैसा 100 गुना  ) का रिटर्न भी दे सकती है

अब मेरा काम पूरा हो गया है, अब आपकी बारी है | ज्ञान बढ़ा के रिस्क कम | रिटर्न ज्यादा करने की| रुको एक बार और ज्ञान बढ़ा के रिस्क कम | रिटर्न ज्यादा करने की |

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शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में अंतर | Stock Market Vs Mutual Funds in Hindi

शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में बेहतर कौन है ? क्या Stock Market में इनवेस्ट करने से Mutual Funds से ज्यादा रिटर्न मिलता है ? अगर आपके मन में भी यह सवाल आता है तो आज मैं आपको इन सारे सवालों के जवाब दे रहा हूँ |

Stock Market Vs Mutual Funds in Hindi


चाहे आप stocks में इन्वेस्ट करना चाहते हो या mutual funds में, इसके लिए आपको तीन फैक्टर्स को समझना होगा |

पहला, आप कितना रिटर्न चाहते है ? क्या आप हाई रिटर्न के लिए हाई रिस्क लेने के लिए तैयार है?

दूसरा, आप फाइनेंसियल रिसर्च और स्टडी करना कितना पसंद करते है और इसके लिए आप कितना समय दे सकते हैं ?

तीसरा, आप कितना फीस, टैक्स आदि देने को तैयार है ?

Stock Market Vs Mutual Funds

जब आप share खरीदते है, इसका मतलब आप एक कंपनी का कुछ पार्ट खरीदते है, जिससे आपको दो तरह से लाभ होता है |

पहला, जब कम्पनी प्रॉफिट करती है तो वह आपको प्रॉफिट का कुछ भाग shareholders में बाँट देती है |


दूसरा, जब आप किसी कम्पनी को कम दाम में खरीदते है और जब कम्पनी के शेयर का दाम बढ़ता हैं और जब आप उसे बेच देते है तो उससे भी आपको लाभ होता है |


mutual funds डाइवर्सिफाइड होता है, डाइवर्सिफाइड का मतलब है, जब आप अपना पैसा लगाते है तो यह स्टॉक्स, बांड, फिक्स्ड डिपाजिट, गोल्ड आदि एसेट में लगता है |


इन एसेट में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के फंड मैनेजर रिसर्च करके आपके दिए गये पैसे को लगाता है, लेकिन रिसर्च करने में फंड मैनेजर को भी समय व एनर्जी दोनों लगता हैं | 


जब आप mutual funds में इन्वेस्ट करते है तो आपको mutual fund unit मिलता है जिसके दाम (NAV) नेट एसेट वैल्यू घटते बढ़ते है |


जब आप शेयर खरीदते है तो यह स्टॉक मार्केट में डायरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट होता है इसलिए इससें ज्यादा रिटर्न मिलने के सम्भावना होती है |

शेयर से आप 18% से 25% मिनिमम रिटर्न की उम्मीद कर सकते है, लेकिन इसके लिए आपको खुद से रिसर्च व स्टडी करनी पड़ती है, और आपका काफ़ी एनर्जी व समय लगता है |


स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने का इनडायरेक्ट तरीका mutual funds है अर्थात कि अगर आप स्टॉक में इन्वेस्ट करना चाहते है, लेकिन अपना टाइम व एफर्ट नही लगाना चाहते है, तो mutual funds आपको एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है, और इससे आप 15% से 18% का रिटर्न कमा सकतें है |


जब आप स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहते हो, तो आपको डीमैट अकाउंट ओपन पड़ता है, इस अकाउंट को ओपन करने व मेन्टेनेन्स के लिए आपको ओपनिंग चार्ज और एनुअल मेन्टेनेन्स चार्ज भी देना होता है |


जबकि mutual funds में invest करने के लिए डीमैट अकाउंट open करना जरुरी नही है, आप बैंक में या म्यूच्यूअल फंड डिस्ट्रिब्युटर के पास जाकर mutual funds की KYC करा सकते है |


स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने से पहले आपको कंपनियों के बिज़नेस मॉडल, प्रॉफिट, भविष्य में कंपनी के कारोबार आदि का एनालिसिस या विशलेषण करना होता है ताकि आपको लाभ हो, नुकसान न हो |


जिस प्रकार स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए हमें एक अच्छे शेयर को खरीदना होता है उसी प्रकार mutual funds में इन्वेस्ट करने के लिए आपको बेस्ट mutual funds, सक्षम फण्ड मैनेजर, एसेट मैनेजमेंट कंपनी का ट्रैक रिकार्ड आदि देखना होता है ?

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