सेबी क्या है - SEBI के प्रमुख काम क्या है | What is SEBI in Hindi

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क्या आप जानते है सेबी क्या है ? और SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया क्या काम करता है ? तो चलिए जानते है सेबी (SEBI) क्या है और सेबी के प्रमुख कार्य क्या है?
What is SEBI in Hindi

सेबी क्या है (What is SEBI)

SEBI यानि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया या भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड सब एक ही नाम है | सेबी की जिम्मेदारी भारतीय पूंजी बाजार को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करना, निवेशकों के इंटरेस्ट को बनाये रखना है |

सेबी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए कई रूल्स और रेगुलेशन बनाता है ताकि सभी मार्केट प्रतिभागी उन नियमो का पालन करे व धोखाधड़ी, स्कैम्स आदि को रोककर मार्केट को सुचारू रूप से चलाया जाये तथा कैपिटल मार्केट का डेवलपमेंट किया जाए |

सेबी का गठन 12 अप्रैल, 1992 को, सेबी एक्ट 1992 के तहत हुआ था, और इसका मुख्यालय (हेडक्वार्टर) मुंबई में है |

SEBI के प्रमुख काम क्या है?

सेबी मार्केट को रेगुलेट करता है और मार्केट के डेवलपमेंट के लिए, बेहतर बनाने के लिए SEBI हमेशा काम रहता है- सेबी के कुछ प्रमुख काम निम्न है -

  • कैपिटल मार्केट का विकास करना व निवेशको के इंटरेस्ट की रक्षा करना
  • स्टॉक एक्सचेंजों (NSE,BSE) आदि को रेगुलेट करना
  • अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस यानि अनुचित तरीकें से लेनदेन को रोकना
  • मार्केट से जुड़े लोगो की शिक्षा को बढ़ाने के लिए कदम उठाना
  • कॉर्पोरेट के अंडर होने वाले इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना

इन सारे कामों को करने के लिए सेबी को सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नही है क्योकिं सेबी एक ऐसी संस्था है इसे सेबी एक्ट 1992 के तहत अधिकार मिले है |


Mutual Funds रिडीम कैसे करें | Mutual Funds का पैसा कैसे निकाले | Mutual Funds Redemption Hindi

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Mutual Funds रिडीम कैसे करें मतलब म्यूच्यूअल फण्ड में जमा किया गया पैसा कैसे निकाले ? क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करने के तरीके जानते है | चलिए जानते है म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कैसे करें जिससे म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा निकल जाये |

हम सब म्यूच्यूअल फण्ड में पैसे लम्बे समय के लिए निवेश करते है लेकिन कई बार हम अपनी जरुरत के लिए या फिर किसी दुसरे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड से पैसा निकलना चाहते है तो चलिए जानते है म्यूच्यूअल फण्ड से पैसा निकालने का प्रोसेस क्या है |
Mutual Funds Redemption Hindi

Mutual Funds Redeem कैसे करें ?

जब हम म्यूच्यूअल फण्ड खरीदते है या निवेश करते है तो हमें म्यूच्यूअल फण्ड की यूनिट दी जाती है जिसकी प्राइस घटते-बढते रहती है जिसके कारण हमें फायदा या नुकसान होता है |

अब जब हम म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को सेल करना चाहते है या अपना पैसा निकलना चाहते है तो हमें कुछ प्रोसेस करनी पड़ती है जिसे म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कहते है |

Mutual Funds Redeem करने के दो तरीके है - ऑनलाइन व ऑफलाइन

Online Mutual Funds Redeem

आप घर बैठे मोबाइल व इन्टरनेट की मदद से ऑनलाइन म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम कर सकते है | ज्यादातर म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी ऑनलाइन म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम का आप्शन देती है |

घर बैठे म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करने के लिए आपको म्यूच्यूअल फण्ड हाउस के वेबसाइट में जाकर आपको अपनी यूजर ID, PAN नंबर या फोलियो नंबर आदि से लॉग इन करना है |

अब आपको एक एप्लीकेशन फॉर्म या Mutual Funds Redeem फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है | फॉर्म सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद आपको रजिस्टर्ड ईमेल व फ़ोन नंबर पर एक कन्फर्मेशन मेसेज आयेगा

और फिर एप्लीकेशन फॉर्म अप्रूव होने के बाद आपका पैसा आपके बैंक खाते 3 से 4 दिन में आ जायेगा, अगर आपने अपनी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम खरीदते वक्त बैंक डिटेल्स दी है |

Offline Mutual Funds Redeem

mutual fund ऑफलाइन रिडीम  करने के लिए आपको म्यूच्यूअल फण्ड ऑफिस या म्यूच्यूअल फण्ड एजेंट के पास जाना है |

म्यूच्यूअल फण्ड ऑफिस में आपको एक एप्लीकेशन फॉर्म या रिडेम्पशन फॉर्म भरना है जिसमें आवश्यक डिटेल भरने है जैसे - अपना नाम, फोलियो नंबर, पैन नंबर, म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का नाम और आप कितना यूनिट्स या पैसा रिडीम करना/निकलना चाहते है |

रिडेम्पशन फॉर्म भरने के बाद ऑफिस में जमा कर देना है और उसके बाद जब म्यूच्यूअल फण्ड हाउस/कंपनी एप्लीकेशन फॉर्म अप्रूव कर लेती है तो आपका पैसा आपके बैंक अकाउंट में 3 से 4 दिन में आ जाता है | अगर आपने अपनी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम खरीदते वक्त बैंक डिटेल्स दी है |

Mutual Funds Redeem करते समय ध्यान रखें?

म्यूच्यूअल फण्ड एक साल से कम समय में रिडीम करते है तो 1% एग्जिट लोड देना पड़ता है | म्यूच्यूअल फण्ड के एग्जिट लोड चार्ज व समय म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के अनुसार अलग अलग होते है |

म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स बेचते समय वर्तमान NAV मतलब एक म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट का दाम आवश्यक चेक करें क्योकिं इसी के आधार पर आपको पैसा मिलता है |

म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम करते समय लगने वाले टैक्स का भी ध्यान रखे |

कई म्यूच्यूअल फण्ड का एक फिक्स समय (लॉक in पीरियड) होता है तो समय से पहले आप म्यूच्यूअल फण्ड रिडीम नही कर सकते है | जैसे: ELSS में 3 साल 

निवेश के लिए स्टॉक्स कैसे खोजें | How to Generate Stock Ideas

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एक अच्छा इन्वेस्टमेंट आपको सफल इन्वेस्टर व धनवान बना सकता है लेकिन इसके लिए आपको एक अच्छा स्टॉक खोजना बहुत जरुरी है क्योकिं एक अच्छी क्वालिटी वाला स्टॉक ही बेहतर आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है |
क्या निवेश के लिए अच्छे स्टॉक खोजे जा सकते है ? अगर हाँ तो निवेश के लिए स्टॉक कैसे खोजें |
How to Generate Stock Ideas

How to Generate Stock Ideas ?

हमारे आसपास इतने सारे क्वालिटी वाले स्टॉक होने के बावजूद भी हम सब एक अच्छे स्टॉक को सेलेक्ट नही कर पाते है और जिसकी वजह से हम धन क्रिएट(बनाने) करने का एक अच्छा अवसर खो देते है |

तो चलिए जानते है कि ऐसे कौन से तरीके है जिससे निवेश के लिए एक अच्छा स्टॉक खोज सकते है |

रोजाना चीजों को देखना

हमारे आसपास ऐसे बहुत से क्वालिटी स्टॉक होते है और कंपनी का प्रोडक्ट भी बहुत ही जबरदस्त होता है जिसे हम अक्सर प्रयोग भी करते है लेकिन एक निवेशक की नज़र से हम कभी भी इन प्रोडक्ट्स / सामान को नही देखते है |

अब से जब भी आप किसी प्रोडक्ट/सामान का प्रयोग करते है तो एक बार अपने आप से सवाल पूछना है कि क्या यह सामान बनाने वाली कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है ? अगर कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट है तो आपको उसके रेवेन्यू व प्रॉफिट और बिज़नस के अन्य चीजों को जरुर चेक करना चाहिए |


क्षमता का दायरा

अगर आप किसी कम्पनी में काम कर रहे है तो उस कंपनी के बारे में, उस कंपनी के इंडस्ट्री के बारे में अच्छी जानकारी होती है |

मान लीजिये आप आईटी कंपनी में जॉब करते है तो आपको IT कंपनी के काम काज के बारे में अच्छे से मालूम होगा और आप आईटी कंपनी को अच्छे से एनालिसिस कर सकते है |

एक नये निवेशक के लिए अपने क्षमता के दायरे में स्टॉक चुनना अच्छा होता है | आपके क्षमता का दायरा किसी भी इंडस्ट्री का हो सकता है | जैसेः बैंकिंग और फाइनेंस, एग्रीकल्चर, आईटी आदि |

न्यूज़पेपर, मैगज़ीन, टीवी

टीवी, मैगज़ीन, न्यूज़ पेपर भी एक क्वालिटी वाले स्टॉक को चुनने में आपकी मदद कर सकते है जैसे अगर एक कम्पनी के सीईओ, चेयरमैन टीवी में या न्यूज़ चैनल में इंटरव्यू देते है तो आपको उस कंपनी के बारे में बहुत कुछ पता चलता है |

फिर भी एक निवेशक के रूप में आपको टीवी पर आने वाले इंटरव्यू के माध्यम से ही किसी स्टॉक को नहीं चुनना चाहिये बल्कि इसे एक स्टॉक आईडिया के रूप में देखना चाहिए और जिस कंपनी के मैनेजमेंट ने इंटरव्यू दिया है उस कंपनी का अच्छे से एनालिसिस करना चाहिए |

एक निवेशक के तौर पर यह जिम्मेदारी आपकी है कि आप अपने पैसे को सावधानी से, व समझदारी से निवेश करें |

अपने आँख और कान हमेशा खुले रखें क्योकिं निवेश करने के लिए एक स्टॉक आईडिया आपको कही से भी मिल सकता है | कोई प्रोडक्ट, कोई समाचार, कोई इंटरव्यू, या फिर आपका कोई दोस्त व फैमिली मेम्बर भी स्टॉक आईडिया दे सकते है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है | Debt To Equity Ratio

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क्या आप जानते है डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो क्या है? और निवेशकों को यह रेश्यो क्यों चेक करना चाहिए ? कोई भी कंपनी जब ज्यादा मात्रा में डेब्ट लेकर बिज़नस के लिए अपना ऑपरेशन करती है तो यह बहुत रिस्की हो सकता है क्योकि इकोनॉमिक डाउनटर्न में रेवेन्यू व प्रॉफिट कम हो जाती है |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से यह आसानी से पता किया जा सकता है कि कोई बिज़नस में कितना डेब्ट/ उधार लिया गया है जिससे बिज़नस का ऑपरेशन परफॉर्म किया जा रहा है |
Debt To Equity Ratio

Debt To Equity Ratio क्या है?

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो एक लिवरेज रेश्यो (Leverage ratio) है | लिवरेज रेश्यो का प्रयोग कंपनी के द्वारा उपयोग में लाये गये उधार को एनालिसिस करने के लिए किया जाता है |

किसी बिज़नस को बहुत अधिक लोन/उधार लेकर चलाने से बिज़नस के परफॉर्मेंस कम होने पर, उधार देने वाले को पैसा न दे पाने पर कंपनी दिवालिया हो जाता है |

अगर बिज़नस को केवल ज्यादा उधार लेकर चलाया जाता है या उधार के पैसे से मशीन, प्लांट्स आदि बनाये जाते है तो यह बहुत रिस्की हो जाता है अगर कम्पनी अपने मशीन व प्लांट्स से प्रॉफिट नही ला पाती है क्योकिं ऐसे में उधार का ब्याज (फाइनेंसियल चार्ज ) देने ही पढ़ते है |

इसलिए इन्वेस्टर को ऐसे बिज़नस में इन्वेस्ट करने को लेकर सतर्क रहना चाहिए | इन्वेस्टर को एक बिज़नस में इन्वेस्ट या निवेश करना चाहिए या नही इसें डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो से पता करना चाहिए |

डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो = लॉन्ग टर्म डेब्ट / नेट वर्थ

उदाहरण 1:

= 500 करोड़ / 100 करोड़

= 5x

यहाँ पर कंपनी 500 करोड़ उधार व 100 करोड़ खुद के पैसे से बिज़नस कर रही है और इसलिए यह बहुत ही रिस्की हो सकता है क्योकिं डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 5x है | और इस तरह की कंपनियों से आपको बचकर रहना चाहिए |

उदाहरण 2:

= 100 करोड़ / 100 करोड़

= 1x

अगर कंपनी खुद के 100 करोड़ व उधार के 100 करोड़ से काम करती है तो डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 है | डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो 1 या 1 से कम हो तो अच्छा है, पर यह भी निर्भर करता है कि कंपनी का ट्रैक रिकार्ड, कैपिटल की जरुरत कैसा/कितना है |


शेयर बाजार कैसे काम करता है | ऊपर-नीचें क्यों होता है स्टॉक प्राइस | How Share Market Works in Hindi

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क्या आप जानते है शेयर बाजार कैसे काम करता है? (How Share Market Works) स्टॉक मार्केट में प्राइस कैसे बदलता रहता है ? कौन सी वजह के कारण स्टॉक प्राइस ऊपर जाता है और कौन से फैक्टर के स्टॉक प्राइस नीचें जाता है ? तो चलिए जानते है आखिर कौन Stock market को चलाता है |
How Share Market Works in Hindi

शेयर बाजार कैसे काम करता है? (How Share Market Works)

जब स्टॉक प्राइस घटता या बढ़ता है तो इससे ट्रेडर/इन्वेस्टर को घाटा व फायदा होता है इसलिए ट्रेडर/इन्वेस्टर कंपनियों के शेयर को खरीदते व बेचते है |

मान लीजिये एक कंपनी ABC है जो सायकल बनाने का बिज़नस करती है और जिसका तिमाही रिजल्ट आज आने वाली है | तो अब आप ABC के शेयर खरीदेंगे या बेचेंगे ?

मुझे यकीन है आप रिजल्ट के आने का इंतजार कर सकते है और अन्य मार्केट प्रतिभागी भी क्योकिं स्टॉक मार्केट में ऐसे होने वाले इवेंट्स ही शेयर के दाम को घटाने व बढ़ाने का समाचार देते है |

चलिए देखतें है आज आने वाला तिमाही रिजल्ट के आधार पर शेयर का दाम कैसे घटेगा या बढ़ेगा|

कंडीशन 1:

कंपनी ABC का रिजल्ट ख़राब आया, कंपनी ने प्रॉफिट न करके नुकसान उठाया | अब ऐसे में यह नेगेटिव खबर पूरे जगह फैलती है और सभी निवेशक/ट्रेडर अगले दिन इस कम्पनी के स्टॉक को बेचने लगते है क्योकिं कम्पनी को घाटा हुआ है |

अब नियम कहता है कि जब ज्यादा लोग बेचने वाले हो जाते है तो किसी भी वस्तु की कीमत कम हो जाती है | कंपनी ABC के शेयर के दाम भी कम हुए क्योकिं सभी इसके शेयर बेच रहे थे |

कंडीशन 2:

ABC कम्पनी का रिजल्ट अच्छा आता है, कम्पनी का मुनाफा बढ़ जाता है | यह एक पॉजिटिव खबर है और जब यह खबर निवेशकों/ट्रेडर्स को पता चलता है तो वे ABC के शेयर खरीदनें लगते है |

अब नियम कहता है कि ज्यादा लोग जब किसी वस्तु को खरीदने की मांग करते है तो उस वस्तु की कीमत बढ़ जाती है | कंपनी ABC के शेयर के दाम भी बढ़ गये क्योकिं सभी इसके शेयर खरीद रहे थे |

इस प्रकार से जब स्टॉक मार्केट से किसी शेयर को ख़रीदा या बेचा जाता है जिससे स्टॉक मार्केट ऊपर नीचें होता है | इसी तरह से किसी भी देश का स्टॉक मार्केट काम करता है |


क्या म्यूच्यूअल फण्ड सुरक्षित है | Are Mutual Funds Safe?

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भारत में म्यूच्यूअल फण्ड का निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन कई बार निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित है ? कोई म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अपना बिज़नस बंद करके भाग जाएगी तो क्या होगा ?  तो चलिए जानते है |
Are Mutual Funds Safe?


म्यूच्यूअल फण्ड में मार्केट से जुड़े रिस्क होते है क्योकिं म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा शेयर बाजार, बांड, गोल्ड आदि सिक्योरिटीज़ में लगाया जाता है लेकिन इन रिस्क को आप अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर कम या ज्यादा कर सकते हो |

आप म्यूच्यूअल फण्ड के कोई भी प्रकार - इक्विटी फण्ड, डेट फण्ड, हाइब्रिड फण्ड चुन सकते है| अब मान लीजिये कि आप ने एक बेहतर म्यूच्यूअल फण्ड चुन लिया और आपको अच्छे रिटर्न की भी उम्मीद है लेकिन क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित है ? क्या हम म्यूच्यूअल फण्ड हाउस पर इतना भरोसा कर सकते है कि वे हमारे पैसे लेकर भाग नही सकती है ?

क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश सुरक्षित है?

सिक्म्यूयोरिटीज एंड एक्च्यूसचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) एक ऐसी संस्था है जो शेयर बाजार , म्यूच्यूअल फण्ड जैसे सिक्योरिटीज को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करती है |

SEBI का काम ही यह है कि कोई भी निवेशकों के पैसे को हानि न पंहुचा सके और यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करते भी पाया जाता है तो उसपर तुरंत कड़ी कार्यवाही की जाती है |

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सुरक्षित होता है इसमें इन्वेस्ट करने से आपको बिल्कुल भी नहीं डरना चाहिए क्योकिं भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) आपके पैसे की सेफ्टी के लिए जरुरी कदम उठाता है जो नीचें दिए गये है -


  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी या एसेट मैनेजमेंट कंपनी को रेगुलेट (कण्ट्रोल ) करता है 
  • कोई भी स्कीम या प्रोडक्ट को SEBI के द्वारा ही अनुमति दी जाती है 
  • सेबी के नियम अनुसार कोई म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी बिज़नस बंद करके भाग नही सकती है 
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी बिज़नस बंद करना चाहती है तो सेबी के नियमों का पालन करना होता है 
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी दिवालिया (बैंकरप्ट) होने पर भी स्कीम का पैसा सुरक्षित होता है क्योकिं यह एक ट्रस्ट में  होता है और म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी पैसे को हाथ नही लगा सकती है
  • म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों का रेगुलर ऑडिट SEBI करता है 

बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड कैसे चुनें | Best Mutual Funds in Hindi | how to select mutual funds in hindi

क्या अक्सर निवेश करने से पहले आपके मन में ख्याल आता है कि एक best mutual funds कैसे चुने ? यह एक आम बात है मेरे मन में भी ऐसा ख्याल आता है- कौन सा mutual funds बेस्ट है? किस mutual funds से ज्यादा रिटर्न मिलता है?

तो चलिए आज जानते है कि best mutual funds कैसे चुनते है, जिससे आप रिस्क कम करके बेहतर रिटर्न कमा सके |
Best Mutual Funds in hindi

Best Mutual Funds कैसे चुनें ?

अगर म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगाना ही है तो क्यों न एक best mutual funds को चुना जाए जिससे की लॉन्ग टर्म में हमें बेहतर रिटर्न मिले व हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें |

एक बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड को चुनने के लिए आपको कुछ फैक्टर्स को ध्यान रखना होता है तो चलिए इन फैक्टर्स को एक-एक करके देखते है -

फण्ड का उम्र और प्रदर्शन

किसी भी फण्ड में इन्वेस्ट करने से पहले आपको फण्ड की उम्र कितना है, क्या फण्ड अभी-अभी लायी गयी है या फण्ड 4-5 साल या उसके भी अधिक पुरानी है |

इसके अतिरिक्त फण्ड ने पिछलें 3-5 वर्ष में कैसा प्रदर्शन किया है, क्या फण्ड ने लगातार अच्छा रिटर्न दिया है और क्या आगे आने वर्षों में भी बेहतर प्रदर्शन करने वाली है | इन सब को जरुर पता करें |

फण्ड ने 1 साल में व 3 साल में निवेशकों को कितना रिटर्न दिया है अर्थात् छोटी व लम्बी अवधि में कैसा रिटर्न दिया है |

इसके साथ ही फण्ड ने बाजार में कमजोरी के वक्त कैसा प्रदर्शन किया है, अगर बाजार में गिरावट (Bear मार्केट) के समय भी फण्ड में ज्यादा गिरावट नही आई है तो यह एक बेहतर फण्ड का संकेत होता है |

फण्ड का खर्च

एक फण्ड आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है, लेकिन क्या वह फण्ड खर्च भी ज्यादा लेता है | अगर ऐसा है तो आप फण्ड के कास्ट को सावधानीपूर्वक कैलकुलेट करें |

क्योकिं आप लम्बें समय तक फण्ड में निवेश करने वालें है तो 1% - 2% का अतिरिक्त खर्च भी लॉन्ग टर्म में बहुत ज्यादा होता है | इसलिए किसी फण्ड में इन्वेस्ट करने से पहले फण्ड का खर्च जरुर चेक करें |

निवेशित रहने का समय (Time Horizon)

एक बेहतर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम चुनने के लिए time horizon भी महत्वपूर्ण होता है |

यह जानने के बाद कि आप किसी फण्ड में कितने समय तक निवेशित रहना चाहते है तो म्यूच्यूअल फण्ड की बहुत से विकल्प में से एक अच्छा आप्शन चुनना आपके लिए आसान हो जाता है |

फण्ड हाउस (AMC)

फण्ड हाउस या एसेट मैनेजमेंट कंपनी पर लोग कितना विश्वास करते है | एक अच्छा फण्ड हाउस वह होता है जो निवेशकों के अच्छे इन्वेस्टमेंट के लिए कई स्कीम्स की विकल्प रखता है |

एक निवेशक को फण्ड हाउस के उम्र, हाउस के मैनेजमेंट का पिछला रिकार्ड, इन्वेस्टमेंट का प्रोसेस, व फण्ड हाउस ने कितना फण्ड (AUM) मैनेज किया है | एक फण्ड हाउस या AMC को चुनने से पहले इन सब बातों को जरुर ध्यान दे |

इसके अलावा यह जरुर पता करे कि फण्ड हाउस के टॉप परफॉर्मेंस वाली कितनी स्कीम्स है |

फण्ड का पोर्टफोलियो

किसी भी फण्ड में निवेश से पहले उस फण्ड के पोर्टफोलियो को अवश्य देखें | क्या फण्ड अच्छी तरह से डाइवर्सिफाई किया गया है मतलब अलग-अलग एसेट क्लास व सेक्टर्स में पैसे लगाया जाता है या नही |

क्या फण्ड में इक्विटी, बांड आदि सिक्योरिटीज़ शामिल है ? क्या निवेशकों के लक्ष्य, रिस्क क्षमता आदि के आधार पर निवेश किया जाता है या फिर फण्ड मैनेजर अपनीं मन से कुछ भी पोर्टफोलियो तो नही बना रहा है |


फण्ड मैनेजर का प्रदर्शन

म्यूच्यूअल फण्ड इन्वेस्टमेंट का एक बेस्ट ऑप्शन माना जाता है क्योकिं इसे प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर मैनेज करता है और निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए अच्छे विकल्पों का चुनाव करता है इसलिए एक बेहतर फण्ड मैनेजर को चुनना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है |

किसी फण्ड में पैसा लगाने से पहले आपको फण्ड मैनेजर के पिछलें रिकार्ड, रिटर्न, अनुभव, कितने स्कीम्स का मैनेजमेंट, इन्वेस्टमेंट स्टाइल आदि का अवश्य पता होना चाहियें |



नोट 1: एक फण्ड का पिछला रिकार्ड बेहतर है इसका मतलब फण्ड मैनेजर ने उस फण्ड को अच्छा मैनेज किया है लेकिन क्या वह फण्ड मैनेजर अभी भी फण्ड मैनेज कर रहा है या नहीं |

क्या उस फण्ड मैनेजर के जगह पर कोई नया फण्ड मैनेजर तो फण्ड को मैनेज नही कर रहा है और क्या नया फण्ड मैनेजर अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम है या नही | इन बातों को किसी भी फण्ड में निवेश करने से पहले अवश्य ध्यान रखें |



नोट 2: एक निवेशक के नजरिये से आपको किसी भी mutual funds में इन्वेस्ट करने से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेशित रहने का समय, निवेश का उद्देश्य, रिटर्न की उम्मीद आदि जानना बहुत आवश्यक होता है क्योकिं इससे ही आपको एक best mutual fund सेलेक्ट करने में मदद मिलती है |

म्यूच्यूअल फण्ड में कितना रिस्क होता है | Are Mutual Funds Risky?

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पैसो को निवेश करने से रिस्क तो होता है, कहीं पर ज्यादा रिस्क तो कही पर कम रिस्क और म्यूच्यूअल फण्ड भी इससे बचा नही है | म्यूच्यूअल फण्ड में भी रिस्क होते है लेकिन कितना रिस्क होता है ये बता पाना आसान नही है | फिर भी चलिए जानते है कि म्यूच्यूअल फण्ड में रिस्क क्या होता है |
Are Mutual Funds Risky?

Are Mutual Funds Risky?

"Mutual funds investments are subject to market risk. Please, read all scheme related documents carefully before investing."

ऐसा ही बोला जाता है न टीवी में आने वाले विज्ञापनों में "म्यूच्यूअल फण्ड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, योजना से जुड़ें सारे दस्तावेज़ सावधानी से पढ़े |"

यहाँ बाजार कोई भी हो सकता है जैसे शेयर बाजार, गोल्ड, रियल एस्टेट, बांड मार्केट आदि | म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का एक बेहतर विकल्प माना जाता है क्योकिं यह डाईवर्सिफ़िइड होता है |

डाईवर्सिफ़िइड मतलब म्यूच्यूअल फण्ड में लगायें निवेशकों का पैसा अलग-अलग एसेट जैसेः शेयर बाजार(इक्विटी), बांड(डेब्ट) आदि में लगाये जाते है इसलिए इन एसेट के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के कई प्रकार है और इन्ही के आधार पर रिस्क लेवल भी|  जैसे -


  • इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड
  • डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड 
  • हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड का रिस्क ज्यादा होता है क्योकिं इक्विटी फण्ड का पैसा शेयर बाजार में कंपनियों के शेयर खरीदनें में लगाया जाता है | इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के हो सकते है | जैसे: स्मालकैप, लार्ज कैप आदि |

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड में रिस्क कम होता है क्योकिं डेब्ट फण्ड का पैसा कंपनियों के बांड में व सरकारी बांड में भी लगाया जाता है | डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के भी अलग- अलग प्रकार है | जैसे: गिल्ट फण्ड, इनकम फण्ड आदि|

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड

इस फण्ड का पैसा कंपनियों के शेयर में और सरकारी व कंपनी के बांडों लगाया जाता है इसलिए इसमें रिस्क  मीडियम होता है | इनके भी कई प्रकार होते है | जैसेः बैलेंस्ड फण्ड, डायनामिक फण्ड

क्या मार्केट रिस्क के अलावा और भी कोई जोखिम है ?

हां, और म्यूच्यूअल फण्ड के रिस्क को कुछ फैक्टर से पता किया जा सकता है और इनमें निवेश करने के लिए उन रिस्क को भी कम किया जा सकता है |

फण्ड मैनेजर की क्षमता व मैनेजमेंट

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के बाद एक रिस्क फण्ड मैनेजर की क्षमता है मतलब अगर आपनें पैसें इन्वेस्ट कियें और फण्ड मैनेजर ने अच्छा परफोर्म नही किया तो आपको रिटर्न भी अच्छे नही मिलेंगे |

मार्केट रिस्क तो सभी के लिए एक सामान होता है लेकिन फण्ड मैनेजर व उसकी टीम की क्षमता का रिस्क हर एक फण्ड में अलग- अलग हो सकता है |

एक अच्छा फण्ड मैनेजर मार्केट रिस्क से भी बचा सकता है इसलिए म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के रिस्क को कम करने के लिए एक अच्छे फण्ड मैनेजर को चुनना बहुत अवश्यक है |

एक अच्छा फण्ड मैनेजर चुनने के लिए फण्ड मैनेजर ट्रैक रिकार्ड चेक करें, कितने फण्ड मैनेज कर रहा है ? कितने रिटर्न ला रहा है ?


Annual Report कैसे पढ़ें | How to Read An Annual Report

क्या आप जानते है ? Annual रिपोर्ट कैसे पढ़ते है ?..आज के इस विडियो में मैं बताऊंगा कि Annul Report में  क्या क्या देखना चाहिए और किन चीजों पर हमें फोकस करना चाहिए और क्या पढना चाहिए?


How to Read An Annual Report


Annual Report क्या है ?

Annual Report कंपनी के द्वारा हर साल Shareholders और इंटरेस्टेड पार्टीज के लिए 
फाइनेंसियल इयर के एंड में पब्लिश किया जाता है| Annual Report में कंपनी साल
 भर यानि कि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के business का लेखा जोखा हिसाब किताब देती है|

किसी कंपनी का एक्यूरेट, trusted और रिलाएबल फाइनेंसियल डाटा लेने का सबसे अच्छा माध्यम एनुअल रिपोर्ट होता है |

अगर आप एनुअल रिपोर्ट पढना चाहते है तो आपको एनुअल रिपोर्ट कंपनि के वेबसाइट या NSE, BSE के वेबसाइट से सॉफ्ट कॉपी के रूप में मिल जाता है उसे आप डाउनलोड करके पढ़ सकते है |

How to Read An Annual Report

किसी भी एनुअल रिपोर्ट को पढ़ते समय नीचें दिए गये बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखे | एनुअल रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सेक्शन होते है और उन सेक्शन से आपको काम की सारी जानकारी लेनी होती है |

मार्केटिंग कंटेंट

जब भी आप किसी Annual Report को डाउनलोड करते है तो ये आवश्यक देखे कि कंपनी ने ज्यादा कलरफुल Annual Report तो नही बनाया मतलब क्या मार्केटिंग मटेरियल की तरह पेश किया है, मात्र इमेजेज तो नही रखे है |

अगर ऐसा है तो वो कंपनी आपका ध्यान भटकना चाहती है ताकि आपसे वह फैक्ट्स को छुपा सके तो ऐसे कंपनियों से सावधान रहना आपकी जिम्मेदारी है |

फाइनेंसियल हाइलाइट्स

इस सेक्शन में कंपनी पिछले कई वर्षों के डाटा को हाईलाइट करता है...जिसमे ग्राफ, टेबल आदि का use करती है...इस सेक्शन में कंपनी के कई सालो के ऑपरेशन व् business performance को compare करती है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट एंड Management Discussion and analysis

ये एनुअल रिपोर्ट के दो इम्पोर्टेन्ट सेक्शन है...इस सेक्शन से आपको मैनेजमेंट के business और इंडस्ट्री का क्या पर्सपेक्टिव है | यहाँ पर लिखे एक एक वर्ड को ध्यान से पढना इन्वेस्टर्स के लिए बहुत ही आवस्यक है |

मैनेजमेंट स्टेटमेंट से आपको पता चलता है कि जो व्यक्ति टॉप में बैठा है उसका business के प्रति क्या विचार है, क्या मैनेजमेंट ट्रांसपेरेंट है या नही..कुछ गलत या सही आपसे hide तो नही रही है...कही मैनेजमेंट हवा में तो बात नही कर रही है...ये सब को आपको ध्यान देना है…

Management डिस्कशन एंड एनालिसिस पुरे Annual Report का मोस्ट इम्पोर्टेन्ट सेक्शन है...क्योकि यहाँ कंपनी इकॉनमी के मैक्रो ट्रेंड, कंट्री में इकनोमिक एक्टिविटी, ग्लोबल इकनोमिक और business sentiment के बारे में बात करती है |

कंपनी यहाँ पर इंडस्ट्री व् business के फ्यूचर में क्या एक्स्पेक्ट करती है उसे भी discuss करती है |

शेयर होल्डिंग पैटर्न

कंपनी का कितना शेयर किसके पास है...promoters ग्रुप ने अपनी shareholoding कम कि है या ज्यादा, घरेलू व विदेशी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी या institution ने कितने percent hoding रखी है|

पब्लिक के पास कितना शेयर है इन सब के लिए शेयर होल्डिंग पैटर्न चेक करे….Ctrl + F और टाइप करे shareholiding pattern |

फाइनेंसियल स्टेटमेंट

इस सेक्शन में कंपनी के पुरे साल भर किये गये काम का हिसाब किताब रहता है -
  • Balance sheet statement
  • Profit loss statement
  • Cash flow statement
इन सब स्टेटमेंट को बहुत ही सावधानी से पढना होता है | इसके साथ स्टेटमेंट के notes को भी आवश्यक रूप से पढ़े ताकि सभी स्टेटमेंट को अच्छे से डिटेल में समझा जा सके |

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अगर आप डीमैट अकाउंट खोलना चाहते है तो कुछ Documents की आवश्यकता होंगी -
  • पैन कार्ड 
  • एक फ़ोटो
वही आपको एड्रेस प्रूफ के लिए
  • आधार कार्ड 
व इनकम प्रूफ के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स
  • कैंसल चेक ( Cheque )
  • या बैंक स्टेटमेंट
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